68 साल के मोदी भारी पड़े 48 साल के राहुल पर

modi vs rahul gandhi
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मोदी vs राहुल | एग्जिट पोल के अनुसार सभी को साफ-साफ नजर आ रहा है कि नरेंद्र मोदी एक बार फिर प्रधानमंत्री के लिए आगे आने वाले हैं यानी है तो साफ-साफ है कि भाजपा इस बार भी पूर्ण बहुमत से जीतने वाली है। इसके चलते कई विपक्षी दल जो की एग्जिट पोल को गलत भी बता रहे हैं। उसका तो यह भी कहना है कि ईवीएम में गड़बड़ है और कुछ का यह भी कहना है कि मीडिया मोदी से मिली हुई है इसके चलते कांग्रेस के राष्ट्रीय नेता राहुल गांधी जिनकी उम्र 48 साल है जिनकी स्थिति शारीरिक और मानसिक रूप से मोदी से ज्यादा बेहतर होनी चाहिए लेकिन यहां पर 68 साल के मोदी 48 साल के राहुल पर भारी पड़ गए हैं।

मोदी का दिमाग और शरीर दोनों राहुल गाँधी से बेहतर

नरेंद्र मोदी केवल मानसिक रूप से ही नहीं शारीरिक रूप से भी राहुल गांधी पर भारी पड़े हैं मोदी ने भाजपा के प्रतिनिधि के रूप में जितना प्रचार प्रसार बीते 70 दिनों में किया है उतना शायद ही किसी दूसरे नेता ने किया हो। यह आंकड़ा इस प्रकार से है मोदी ने लगभग हर दिन 1050 किलोमीटर की यात्रा की है जो कि बहुत ही बड़ा स्तर है वहीं राहुल गांधी व कांग्रेस पार्टी के अन्य नेता मोदी की टांग खींचने में ही लगे रहे जिसका फायदा भी मोदी को ही हुआ। मोदी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा कि मेरे प्रसिद्ध होने का कारण मेरे प्रतिद्वंदी हैं जिन्होंने मेरी बुराइयां करके मेरा और प्रचार कर दिया क्योंकि उनके बुरे प्रचार में भी मेरा नाम आना मेरे लिए कारगर सिद्ध हुआ।

राहुल गाँधी को ही समझ आया उनका घोषणा पत्र

इसके साथ ही राहुल गांधी जोकि अपने घोषणापत्र के साथ कई ऐसे वादे भी लेकर आए थे जो कि बहुत ही लाजवाब थे लेकिन यह केवल कांग्रेस पार्टी को ही समझ आए भारत की जनता को नहीं। वहीं नरेंद्र मोदी जोकि जीएसटी और नोटबंदी को लेकर पहले ही विवादों में रह चुके हैं लेकिन फिर भी भारत की जनता ने उन्हें एक बार फिर से मौका दिया और एग्जिट पोल के अनुसार बीजेपी फिर पूर्ण बहुमत से आने वाली हैं।

तुमको मिर्ची लगी तो में क्या करू

एग्जिट पोल के नतीजे से यह तो तय है कि बाकी का विपक्ष बहुत नाराज है या यूं कहें कि चिढ़ा हुआ है। इससे अनुमान लगाया जा सकता है विपक्ष में जो अलग-अलग राजनीतिक दल है इन्होंने अपने कार्यकाल में क्या किया और क्या नहीं इसके चलते आप देखे सकते हैं राहुल गांधी की चुप्पी बता रही है कि वह हार को सह नहीं पा रहे हैं, और मोदी एक बार फिर प्रधानमंत्री के लिए चयनित होने वाले हैं।