माउंट आबू के पीड़ित परिवारों का सिरोही कलेक्ट्रेट पर धरना, कलेक्टर ने बुलवाकर ये कहा

माउंट आबू में भवन निर्माण, पुनर्निर्माण आदि के लिए बैठक आयोजित करके निर्माण इजाजत नहीं दिये जाने से व्यथित लोगों द्वारा सिरोही कलेक्टर परिसर में दिया गया धरना।
माउंट आबू में भवन निर्माण, पुनर्निर्माण आदि के लिए बैठक आयोजित करके निर्माण इजाजत नहीं दिये जाने से व्यथित लोगों द्वारा सिरोही कलेक्टर परिसर में दिया गया धरना।

सबगुरु न्यूज-सिरोही। पिछले करीब 34 सालों से नए निर्माण, जर्जर भवनो के पुनर्निर्माण, मरम्मत आदि की समस्या से त्रस्त माउंट आबू के स्थानीय पीड़ितो ने गुरुवार के जिला कलेक्टर कार्यालय पर सांकेतिक धरना दिया। जिला कलेक्टर ने धरनार्थियों को बुलवाकर उनकी व्यथा जानी और वहीं मौजूद माउंट आबू उपखण्ड अधिकारी को इस संबन्ध में अग्रिम कार्रवाई को कहा।
शैतानसिंह ने बताया कि माउंट आबू में पिछ्ले करीब 35 सालों से नए निर्माण पर रोक लग रही है। 2009 में सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार ईको सेंसेटिव जोन लग गया। लेकिन, इनमें भी नए निर्माण, पुनर्निर्माण, एडीशन अल्ट्रेशन, मरम्मत आदि ओर रोक नहीं थी। बस नोटिफिकेशन की शर्त के अनुसार जोनल मास्टर प्लान लागू होने तक ये काम नगर पालिका की बजाय केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय के द्वारा गठित मोनिटरिंग कमिटी के माध्यम से करना था।

उन्होंने बताया कि माउंट आबू का जोनल मास्टर प्लान 2015 में लागू हो गया। निटिफिकेशन के अनुसार अब निर्माण मरम्मत की गतिविधियों को भवन निर्माण समिती के माध्यम आए करवाया जा सकता था। लेकिन, बिल्डिंग बायलॉज नहीं बना था। इसके बाद 2019 में बिल्डिंग बायलॉज भी बन गया। 27 दिसम्बर 2019 को डीएलबी ने नगर पालिका की भवन निर्माण समिति को फिर से माउंट आबू में भवन निर्माण के अधिकार हस्तांतरित कर दिए।

धरनार्थी शैतानसिंह ने बताया कि सिरोही विधायक संयम लोढ़ा के विधानसभा में मुद्दा उठाने के बाद 25 अप्रेल 2022 को एस 2 ज़ोन का सीमांकन भी कर दिया इसके बाद भी बैठक बुलाकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की मंशानुसार भवन निर्माण समिति के माध्यम से लोगों के हक बहाल नहीं किए जा रहे। शैतानसिंह ने बताया कि उनकी फाइल्स को डीएलबी ने स्वीकृति दे दी है। नगर पालिका स्तर पर भवन निर्माण समिति की बैठक करके इसकी स्वीकृति देनी है। लेकिन, इसे लटकाया जा रहा है। शैतानसिंह अपनी पत्नी के अलावा पुत्री के साथ धरने पर बैठे थे। उनके साथ अतानान जाना और दिलीप सिंह भी धरने पर बैठे थे।
-जिला कलेक्टर ने बुलवाया
शैतानसिंह ने बताया कि धरने के दौरान जिला कलेक्टर डॉ भंवरलाल ने उन्हें बुलवाया। कलेक्टर ने उनकी समस्या जानी। कलेक्टर को उन्होंने बताया कि मकान नहीं बनने के कारण सामाजिक परेशानी झेलनी पड़ रही है। बच्चो की शादियां नहीं हो पा रही हैं। शैतानसिंह ने बताया कि कलेक्टर चेम्बर में ही मौजूद माउंट आबू उपखण्ड अधिकारी से बैठक नहीं हो पाने के सम्बंध में जाना तो उन्होंने कोर्ट स्टे के बारे में बताया।

इस पर साथ में ही मौजूद याचिकाकर्ता अताना जाना ने कहा कि वे लोग स्टे वेकेट करवाने के लिए अर्जी लगा रहे हैं। लेकीन, नगर पालिका के वकील के उपस्थित नहीं होने से ये नहीं हो रहा है। शैतानसिंह ने बताया कि जिला कलेक्टर ने उपखण्ड अधिकारी से हमारी पत्रावली दिखवाने को कहा। इसके बाद धरना उठा लिया।
– माउंट आबू का अनशन भी उठा
उधरमाउंट आबू में होटल व्यवसाई मंजू गुरबानी द्वारा उनके पड़ोसी रतन देवासी के बीच चल रहे कथित विवाद को लेकर माउंट आबू में किया जा रहा अनशन भी बुधवार रात को प्रशासन के द्वारा लिखित आश्वासन मिलने के बाद समाप्त करवा दिया गया। गुरबानी पिछले तीन दिनों से इस आरोप के साथ अनशन पर बैठी थी कि उनके परिसर में उनकी सीवरेज लाइन, उनके पिल्लर आदि पर कब्जा कर लिया गया है। हाइकोर्ट के आदेश के बाद भी स्थानीय प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम नहीं कर रहा है। जिससे उन्हें न्याय नहीं मिल रहा है।
-इनका कहना है...
भवन निर्माण समिति की बैठक के लिए नगर पालिका आयुक्त को 23 जून को ही एजेंडा दे दिया गया था। उनके अन्य कामों में व्यस्त हो जाने के कारण बैठक की तिथि और एजेंडा नहीं निकल पाया था।
नारायण सिंह
अध्यक्ष, भवन निर्माण समिति
माउंट आबू।