चीन की युद्ध तैयारियों के मद्देनजर सुरक्षा बंदोबस्त अपर्याप्त : मुरली मनोहर जोशी

Murli Manohar Joshi news

नई दिल्ली। संसद की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी ने चीन की युद्ध तैयारियों और विस्तार के मद्देनजर आंतरिक सुरक्षा बंदोबस्त को अपर्याप्त बताते हुए आज इस मोर्चे पर और अधिक सतर्कता बरतने की जरूरत बताई।

जोशी ने ‘केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल और अांतरिक सुरक्षा चुनौतियों’ पर प्राक्कलन समिति की लोकसभा में पेश 28वीं रिपोर्ट के बारे में यहां आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि चीन की युद्ध तैयारियों को देखते हुए आंतरिक सुरक्षा को पुख्ता बनाने के लिए विशिष्ट कार्यक्रम बनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि इस पड़ोसी देश की सीमा से लगते इलाकों में और ज्यादा सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि आंतरिक सुरक्षा को पूरीतरह पुख्ता बनाया जाना चाहिए।

जोशी ने चीन समेत सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों को स्थानीय भाषा के ज्ञान की जरूरत बताते हुए कहा कि या ताे उनके लिए दुभाषिये की व्यवस्था होनी चाहिए या कुछ जवानों का इसका ज्ञान कराया जाना चाहिए।

जोशी ने कहा कि जम्मू कश्मीर में युवकों का हिंसक गतिविधियों में शामिल होना अच्छी बात नहीं है।इन युवकों काे मुख्यधारा में लाने तथा सामाजिक एवं राजनीतिक अशांति दूर करने के लिए सिर्फ नौकरशाहों पर निर्भर नहीं रहा जा सकता है। अलबत्ता नामचीन विश्वविद्यालयाें और संस्थाओं की मदद से वहां की सामाजिक एवं सांस्कृतिक बनावट का अध्ययन कराकर जरूरी उपाय किए जाने चाहिए।

उन्होंने कहा कि यह चिंता की बात है कि आतंकवादियों के पास अत्याधुनिक उपकरण एवं विस्फोटक हैं और मुकाबला करने के लिए हमारी पर्याप्त तैयारी नहीं है।’ उन्होंने कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन जैसे संगठनों को उन्नत तकनीक विकसित करनी चाहिए तथा जवानों को उनका नियमित प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए।

जोशी ने कहा कि विकसित देशों के मुकाबले हमारी सुरक्षा प्रणाली बहुत पीछे है। मौजूदा वैश्विक परिदृश्य के मद्देनजर साइबर,जैविक,रासायनिक,तथा परमाणु खतरे और पेयजल को प्रदूषित करने जैसे खतरों के प्रति पुलिस एवं आम नागरिकों को जागरूक किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि समिति का मानना है कि कानून व्यवस्था के संदर्भ में किन परिस्थितियों में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल को राज्यों में तैनात किया जाएगा, इसका संविधान में स्पष्ट जिक्र नहीं है। इसलिए इस बल पर राज्यों की निर्भरता बढ गयी है जिससे उस पर बोझ बहुत ज्यादा है। उन्होंने इस खामी को दूर करने के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान करने की जरूरत बताई।