उदयपुर की घटना इस्लाम की शिक्षाओं के विरुद्ध है: मौलाना मदनी

देवबंद। इस्लामिक सामाजिक संगठन जमीअत उलमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने राजस्थान के उदयपुर में एक दर्जी कन्हैया लाल की इस्लाम के नाम पर की गई बर्बर हत्या की निंदा करते हुए कहा हे कि जिस तरह भीड़ हिंसा की मुख़ाल्फ़त की गई उसी तरह यह अमानवीय कृत्य भी इस्लामिक शिक्षाओं के विरुद्ध है।

मदनी ने बुधवार को एक बयान में कहा कि वह इस घिनौनी वारदात को मुल्क की शांति व्यवस्था के लिए बहुत ख़तरनाक समझते हैं, यह देश के संविधान और धर्म के खि़लाफ़ है। उन्होंने कहा कि हम क़ानून को अपने हाथ में लेने के सदैव विरोधी रहे हैं। उदयपुर की घटना बहुत दुखद, ग़ैर इस्लामी और अमानवीय है। इसलिए इस घटना की जितनी भी निंदा की जाए कम है।

मौलाना मदनी ने यह भी कहा कि किसी की बदजुबानी के कारण हुए पैगम्बर के अपमान के फलस्वरूप जो कुछ हुआ, बहुत बुरा हुआ, लेकिन देश में शांति व्यवस्था और सांप्रदायिक सदभावना को बनाए रखने के लिए ज़रूरी है कि धैर्य रखा जाए।

गौरतलब है कि बीते दिनों पैगम्बर मोहम्मद के बारे में विवादित बयान देने वाली भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा के समर्थन में उदयपुर के दर्जी कन्हैला लाल ने सोशल मीडिया पर पोस्ट चस्पा कर दी। इसके विरोध में दो कट्टरपंथी युवकों ने तालीबानी अंदाज में दर्जी की गला रेत कर दुकान में ही हत्या कर सोशल मीडिया पर भड़काऊ पोस्ट भी वायरल कर दी।

मदनी ने इस घटना पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि हम जिस तरह इस घटना का विरोध करते हैं उसी तरह हम इस बात के भी घोर विरोधी हैं कि किसी भी धार्मिक व्यक्ति का अपमान करके या किसी धर्म के खि़लाफ़ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करके उसके मानने वालों की भावनाओं को आहत किया जाए।

मौलाना मदनी ने कहा कि देश के शक्तिशाली व्यक्तियों की ख़ामोशी और अपमान करने वालों की गिरफ़्तारी न होना ही वह कारण है, जिसने सारी दुनिया में देश की छवि को ख़राब किया है और शांति व्यवस्था को आग लगाई है।

उन्होंने सरकार सेे अपील की है कि जिन लोगों ने पैगम्बर का अपमान किया है, उनको फ़ौरन गिरफ़्तार कर क़ानून के अनुसार कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाए ताकि, भविष्य में फिर कोई ऐसा करने का साहस न कर सके, और पूरी दुनिया के मुसलमानों को संतुष्टि भी प्राप्त हो सके।

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