नवजोत सिद्धू के सलाहकार मलिवंदर सिंह माली का इस्तीफा

चंडीगढ़। कश्मीर, पाकिस्तान, अफगानिस्तान और तालिबान को लेकर अपनी विवादित टिप्पणियों और ट्वीट को लेकर चर्चाओं में आए मलविंदर सिंह माली ने पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के सलाहकार ने आज पद छोड़ दिया।

माली को गत 11 अगस्त को सिद्धू ने अपना सलाहकार नियुक्त किया था लेकिन 17 दिन के अपने संक्षिप्त कार्यकाल में वह सलाहकार पद की जिम्मेदारियों को भूल कर अंतरराष्ट्रीय और कूटनीतिक मुद्दों पर टिप्पणियां करने लगे।

उन्होंने जहां जम्मू-कश्मीर को जहां आजाद देश बताते हुए भारत का इस पर कब्जा बताया तो अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे का भी स्वागत किया। उनका वर्ष 1989 में एक पंजाबी पत्रिका में प्रकाशित पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लेकर एक कार्टून भी विवादों में रहा जिसमें इंदिरा गांधी के हाथ में एक बंदूक की नोक पर एक खोपड़ी टंगी है और वह खोपड़ियों के ढेर पर खड़ी हैं।

यही नहीं सिद्धू के दूसरे सलाहकार डा. प्यारे लाल गर्ग भी माली की लाईन पर चल रहे थे जिससे मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह, पार्टी के प्रदेश मामलों के प्रभारी हरीश रावत और स्वयं पार्टी हाईकमान खासा खफा था और उन्हें अपनी सफाई में दोनों सलाहकारों की टिप्पणियों से किनारा करना पड़ा।

दोनों सलाहकारों की इन हरकतों के कारण पार्टी की जहां मीडिया में खासी किरकिरी हुई वहीं उसे विपक्ष के हमलों का भी शिकार होना पड़ा। सिद्धू की अपने इन सलाहकारों के बयानों पर चुप्पी भी पार्टी को अखर रही थी। मुख्यमंत्री ने तो यहां तक कि सिद्धू को अपने इन सलाहकारों की बयानबाजी पर लगाने की चेतावनी दे डाली थी।

वहीं रावत ने हाईकमान के निर्देशों का हवाला देते हुए सिद्धू को अपने इस सलाहकारों को तुरंत हटाने को कहा था। रावत ने तो यहां तक कहा कि प्रभारी होने के नाते वह स्वयं ही यह कार्रवाई करने में सक्षम हैं। रावत शुक्रवार को ही हाईकमान से मिलने वाले भी थे। बढ़ते दबाव के बीच माली ने पार्टी उन्हें हटाने का कोई कदम उठाए जाने से पहले ही सलाहकार की जिम्मेदारी से अलग हो गए।

माली का इस्तीफा सिद्धू खेमे की ओर छेड़ी गई कैप्टन विरोधी मुहिम के लिए झटका माना जा रहा है ऐसे में जब मुख्यमंत्री को पद से हटाने की मांग को लेकर कुछ कैबिनेट मंत्री, विधायक और अन्य नेता बागी नेता सिद्धू की शरण में जाकर अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। हालांकि रावत ने भी गत शुक्रवार को स्पष्ट कर दिया था कि पंजाब में कैप्टन ही सुप्रीम हैं और सिद्धू समेत उनके विरोधियों के खिलाफ कार्रवाई तक की चेतावनी दे डाली थी।

वहीं सलाहकार का पद छोड़ने पर माली ने अपने फेसबुक पोस्ट पर लिखा है कि उनकी इस पद कोई औपचारिक नियुक्त नहीं हुई थी इसलिए इस्तीफे का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि सिद्धू को सलाह देने को लेकर एक सहमति बनी थी जिसे वह वापिस लेते हैं।