पटना के गांधी मैदान बम विस्फोट मामले में नौ दोषी, एक बरी

पटना। भारतीय जनता पार्टी की हुंकार रैली के दौरान बिहार में पटना जंक्शन और ऐतिहासिक गांधी मैदान में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी की विशेष अदालत ने आज नौ आरोपियों को दोषी करार दिया जबकि एक को बरी कर दिया।

विशेष न्यायाधीश गुरविंदर सिंह मल्होत्रा ने मामले में सुनवाई के बाद अपना निर्णय आज तक के लिए सुरक्षित रख लिया था। संयोग यह है कि वर्ष 2013 में आज ही के दिन पटना में ये धमाके हुए थे।

अदालत ने इस मामले में हैदर अली, मुजीब उल्लाह, नुमान अंसारी, उमर सिद्दीकी अंसारी, अजहरुद्दीन कुरैशी, अहमद हुसैन, इम्तियाज अंसारी, इफ्तेखार आलम और फिरोज असलम को दोषी करार दिया है जबकि एक अन्य आरोपी फखरुद्दीन को बरी कर दिया है। अदालत ने सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए 1 नवंबर 2021 की तिथि निश्चित की है।

गौरतलब है कि 27 अक्टूबर 2013 को भाजपा की हुंकार रैली के दौरान पटना जंक्शन रेलवे स्टेशन के करबिगहिया स्थित प्लेटफार्म संख्या 10 के सुलभ शौचालय और ऐतिहासिक गांधी मैदान में सिलसिलेवार बम विस्फोट हुए थे, जिसमें छह लोग मारे गए थे और 89 लोग घायल हुए थे। मामले की सुनवाई पूरे आठ वर्ष तक चली। मामले में अंतिम बहस की सुनवाई पूरी करने के बाद विशेष न्यायाधीश ने निर्णय सुनाने के लिए आज की तिथि निश्चित की थी।

इस मामले में कुल 11 लोगों के खिलाफ आरोप-पत्र दाखिल किया गया था। इनमें से एक किशोर का ट्रायल किशोर न्यायालय पटना के द्वारा किया गया था जबकि 10 लोगों की सुनवाई पटना व्यवहार न्यायालय स्थित एनआईए की विशेष अदालत में की गई है।

इस मामले में हैदर अली, मुजीब उल्लाह, नुमान अंसारी, उमर सिद्दीकी अंसारी, अजहरुद्दीन कुरैशी, अहमद हुसैन, फखरुद्दीन, इम्तियाज अंसारी, इफ्तेखार आलम और फिरोज असलम के खिलाफ एनआईए ने वर्ष 2014 में आरोप पत्र समर्पित किया था। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन ने अपना मुकदमा साबित करने के लिए कुल 187 गवाह पेश किये थे।

फैसला सत्य की जीत : जायसवाल

बिहार भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष एवं सांसद डॉ. संजय जायसवाल ने वर्ष 2013 में गांधी मैदान बम विस्फोट मामले में आये फैसले को सत्य की जीत बताया और कहा कि इस फैसले से जिहादी और अराजक तत्वों के बीच यह स्पष्ट संदेश गया है कि इस देश में गुनाह करने वालों को कोई नहीं बचा सकता

जायसवाल ने इस निर्णय के लिए गुरुवार को न्यायालय का आभार जताते हुए कहा कि हुंकार रैली के दौरान सिलसिलेवार बम विस्फोट मामले में न्यायालय के आये फैसले ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि झूठ और दुष्प्रचार के सहारे कभी भी सत्य को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि इस फैसले से जिहादी और अराजक तत्वों के बीच यह स्पष्ट संदेश गया है कि इस देश में गुनाह करने वालों को कोई नहीं बचा सकता।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि 27 अक्टूबर 2013 को गांधी मैदान में हुए सिलसिलेवार विस्फोट की यादें अभी बिहारवासियों के जेहन में ताजा है। कांग्रेस की सरकार में आतंकियों का मनोबल कितना बढ़ा हुआ था, यह कांड उसका जीवंत प्रमाण है। आतंकियों के प्रति कांग्रेस सरकार के लुंज-पुंज रवैये ने उनकी हिम्मत को इतना बढ़ाया हुआ था कि उन्होंने विश्व की सबसे बड़ी पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लाखों लोगों के बीच खुलेआम मारने की साजिश को अंजाम देने तक का प्रयास कर दिया था।

जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा नेताओं की प्रशंसा करते हुए कहा कि यदि यह रैली भाजपा की बजाए कांग्रेस या किसी अन्य पार्टी की होती तो उस दिन बिहार में कैसा कोहराम मचता इसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती।

गौरतलब हो कि उस दिन गांधी मैदान के भीतर और बाहर लाखों लोग जुटे हुए थे और ब्लास्ट के बाद भयानक भगदड़ मचने की आशंका उत्पन्न हो चुकी थी लेकिन मोदी ने पूरे धैर्य के साथ अपना भाषण दिया और कार्यक्रम के बाद भाजपा कार्यकर्ताओं से शांति से निकलने की अपील की, जिसे सर माथे पर लेते हुए भाजपा के सभी अनुशासित कार्यकर्ता धीरे-धीरे अपने घरों की तरफ निकल गए।

भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष ने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि न्यायालय के इस निर्णय ने उन सभी विपक्षी दलों को कटघरे में खड़ा कर दिया है जिन्होंने इन दुर्दांत आतंकियों को बचाने के लिए इस कांड को भाजपा की साजिश बताने का दुष्प्रचार आरंभ कर दिया था।

यह दिखाता है कि इन सत्तालोलुप दलों को वोटों के लिए आतंकियों के साथ खड़े रहने से भी परहेज नहीं है। कांग्रेस की यह मानसिकता तो आज और खुल कर दिखाई देती है। यह दल जान लें कि उनकी तुष्टीकरण की घृणित राजनीति की पोल एक बार फिर जनता के सामने खुल गई है, जिसका मजा जनता उन्हें जरूर चखाएगी।