मुंबई। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विपक्षी INDIA गठबंधन की ओर से आयोजित प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ कार्यक्रम को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब जनता ने विपक्षी नेताओं को संसद में बैठकर देश के मुद्दों पर चर्चा करने और कानून बनाने के लिए चुना है, तो उन्हें अलग से ‘नकली संसद’ आयोजित करने की क्या जरूरत पड़ गई?
सीतारमण ने विपक्ष की इस पहल को राजनीतिक दिखावा बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों को संसद में भेजती है, ताकि वे संवैधानिक संस्थाओं और जनहित से जुड़े मुद्दों पर निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के तहत अपनी बात रख सकें। इसके बजाय प्रतीकात्मक संसद आयोजित करना विपक्ष की राजनीतिक रणनीति पर सवाल खड़े करता है।
मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष का जन महाभियोग
दरअसल, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के दिल्ली स्थित आवास पर 31 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के 19 विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक ‘जन महाभियोग’ आयोजित किया था। पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने इस कार्यक्रम की अध्यक्षता की थी। इसमें राहुल गांधी, सोनिया गांधी, प्रियंका गांधी सहित विपक्ष के कई वरिष्ठ नेता और सांसद शामिल हुए।
कार्यक्रम में विपक्ष ने एक प्रस्ताव पारित कर मुख्य चुनाव आयुक्त पर चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने के आरोप लगाए। विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई।
SIR और मतदाता सूची को लेकर आमने-सामने सत्ता पक्ष-विपक्ष
विपक्षी दलों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के नाम पर पात्र मतदाताओं के नाम भी मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों तथा मतदान की स्वतंत्रता से जुड़ा गंभीर मामला बताया है।
वहीं भाजपा का कहना है कि मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जरूरी है। इसके तहत मृत, स्थानांतरित, दोहरे और अपात्र मतदाताओं के नामों की जांच की जाती है। भाजपा नेताओं ने विपक्ष के कार्यक्रम को संवैधानिक प्रक्रिया के बजाय राजनीतिक प्रदर्शन करार दिया है।
संसदीय प्रक्रिया के बजाय प्रतीकात्मक विरोध पर उठाए सवाल
सीतारमण की आपत्ति का केंद्र यही है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने जैसी संवैधानिक मांग के लिए संसद में निर्धारित प्रक्रिया मौजूद है। किसी राजनीतिक मंच पर प्रस्ताव पारित करने से संवैधानिक पदाधिकारी को पद से नहीं हटाया जा सकता। मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के समान विशेष संसदीय प्रक्रिया अपनानी होती है।
विपक्ष का कहना है कि संसद में अपनी बात रखने के प्रयासों के बावजूद उसकी मांगों पर पर्याप्त सुनवाई नहीं हुई, इसलिए जनता के सामने प्रतीकात्मक जन महाभियोग आयोजित किया गया। इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है।



