कश्मीर में प्रतिबंध और हड़ताल से जनजीवन प्रभावित

श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 और 35ए को पांच अगस्त से निष्प्रभावी किए जाने के बाद से कश्मीर घाटी मेें प्रतिबंध और हड़ताल के कारण गुरुवार को लगातार 18वें दिन जनजीवन प्रभावित रहा।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार घाटी में बीती रात में किसी बड़ी अप्रिय घटना की कोई रिपोर्ट नहीं है, श्रीनगर सहित घाटी के अधिकतर इलाकों से प्रतिबंध से हटा लिया गया है। इसके अलावा शहर-ए-खास और पुराने शहर के कुछ और इलाकों से भी प्रतिबंध हटा लिया गया है, हालांकि व्यावसायिक और अन्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं।

उदारवादी हुर्रियत कांफ्रेंस के अध्यक्ष मीरवाइज मौलवी उमर फारुक के गढ़ ऐतिहासिक जामिया मस्जिद के सभी द्वारों को फिर से बंद किया गया है और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों एवं राज्य पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है।

पुराने शहर और शहर-ए-खास तथा बाहरी इलाकों में व्यावसायिक एवं अन्य गतिविधियां प्रभावित रहीं। केन्द्रीय अर्द्ध सैनिक बलों और राज्य पुलिस कर्मियों के प्रदर्शन को विफल करने के लिए लगाया गया।

स्थानीय निवासियों ने आरोप लगाया कि उन्हें आवश्यक वस्तुओं जैसे दूध, बच्चों का भोजन, सब्जियों और दवाइयों की कमी का सामना करना पड़ रहा है। पाबंदी और हड़ताल के कारण शहर के बाहर से दूधिये और सब्जी विक्रेता इन स्थानों पर नहीं आ रहे हैं। मुख्य सड़कों पर स्थानीय ब्रेड बनाने वाले दुकानदारों की दुकानें भी बंद हैं।

सुदूरवर्ती इलाकों में सुबह छह बजे से नौ बजे तक जरूरी सामान बेचने वाले दुकानदारों की दुकान, ब्रेड और दुध की दुकानों को खोला गया है। जब सुरक्षा बलों को रात में वहां से हटा लिया जाता है तो शाम को सात बजे से 10 बजे तक दुकानें खुली रहती हैं।

श्रीनगर और उसके बाहरी इलाकों में आज लगातार 18वें दिन दुकानें और व्यवसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों से वाहन नदारद रहे। सिविल लाइंस, नये शहर और बाहरी इलाकों में दुपहिया वाहनों सहित निजी वाहनों का आवागमन रहा।

सिविल लाइंस और नए शहर में सड़कें बंद नहीं रही हालांकि यहां शांति बनाये रखने के लिए सैंकड़ों सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है। ऐतिहासिक लाल चौक नागरिकाें की आवाजाही के लिए खुला रहा। यहां दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़क से वाहन नदारद रहे।

सरकारी कार्यालयों और बैंकों में भी इसका असर देखा गया, हालांकि अधिकतर कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति देखी गई। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सिविल सचिवालय, राज्यपाल कार्यालय और उनके सलाहकारों के कार्यालय सहित 60 से 90 प्रतिशत कार्यालयों में कर्मचारी ड्यूटी पर देखे गए।

कश्मीर घाटी, अन्य जिलों तथा तहसील मुख्यालयों से हालांकि बंद की रिपोर्ट मिल रही हैं। राज्य के अन्य जिलों और घाटी में तहसील मुख्यालयों में बंद की रिपोर्ट आ रही हैं। संचार व्यवस्था बंद होने के कारण इन जिलों में वास्तविक स्थिति के बारे में कोई पुष्टि नहीं हुई है।

बारामूला से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार उत्तर कश्मीर के अन्य जिलों और तहसील मुख्यालयों में भी जनजीवन प्रभावित रहा है। कुपवाडा शहर में बुधवार को फिर से प्रतिबंध लगाया गया और मुख्य शहर में किसी को आने की अनुमति नहीं दी गई।

बारामूला में बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है जहां बुधवार को पुराने शहर में आतंकवादी और सुरक्षा बलों के बीच हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा एक आतंकवादी मारा गया और जम्मू-कश्मीर की विशेष अभियान समूह का एक अधिकारी शहीद हो गया था।

उत्तर कश्मीर में सेब के शहर सोपोर, पाट्टन, पलहलांन, बांदीपुरा, अजस और अन्य इलाकों में भी सुरक्षा बलों और राज्य पुलिस कर्मियों को फिर से तैनात किया गया है। मध्य कश्मीर के गंदेरबल और बडगाम से भी हड़ताल की रिपोर्ट मिल रही हैं, जहां दुकानें एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे और सड़कों से वाहन नदारद रहे। कुछ मार्गों पर निजी वाहनों को चलते हुए देखा गया।