कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से गवाह को बयान दर्ज करने की मिली सुविधा

जयपुर। राजस्थान में न्यायालयों में अब गवाह अपना बयान वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से भी दर्ज करा सकेगा। जयपुर के बनीपार्क कोर्ट एवं गंगानगर कोर्ट के न्यायाधीशों ने आज इस कार्य को प्रारंभ कर आज एक नए अध्याय की शुरूआत की है।

दोनों न्यायाधीशों की मदद एवं पहल से यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा हुआ। उच्च न्यायालय में वीसी के जरिए दिए जाने वाले बयान को लेकर गत दो अगस्त को रूल्स नोटिफाई कर दिया है। राज्य सरकार ने इसके लिए सीआरपीसी में संशोधन किया है।

गृह विभाग के विशिष्ट शासन सचिव वी.सरवन कुमार ने बताया कि गवाह को कई किलोमीटर की यात्रा के बाद अदालत में उपस्थित होकर बयान दर्ज कराने से निजात मिलेगी। गवाह जिला न्यायालय के परिसर में वीसी रिमोट पाइंट के स्टूडियो में जाकर वीसी के माध्यम से अपना बयान दर्ज करा सकेगा।

उन्होंने बताया कि प्रथम फेज के रूप में सभी जिला न्यायालयों को वीसी रिमोट पाइंट से जोड़कर स्टूडियो बनाया गया है। इन स्टूडियो पर कॉडिनेटर नियुक्त किया गया है, जो कोर्ट का कर्मचारी है।

कुमार ने बताया कि प्रदेश की 1242 कोर्ट के लिए वीसी का हार्डवेयर इन्स्टॉल किया गया है। माइक्रोसाफ्ट टीम का लाईसेंस एवं फाइबर इंटरनेट कनेक्टिविटी दी गई है। द्वितीय फेज में तालुका कोर्ट में वीसी रिमोट पाइंट बनाया जाएगा। सरकारी ऑफिस एवं अस्पताल को भी इससे जोड़ा जाएगा।

उन्होंने बताया कि उच्च न्यायालय द्वारा वीसी के रूल्स नोटिफाई करने के बाद समय पर गवाह का बयान हो सकेगा। सरकारी खर्चे एवं समय की बचत होगी तथा ट्रायल भी जल्द ही संभव होगा। पारदर्शिता के साथ पूरी प्रक्रिया संम्पन्न होने से लंबित मामलों में कमी आएगी।

पुलिस के विशेष अभियान दल (एसओजी) में डीआईजी ने कविराज पहले आईपीएस अधिकारी है जिन्होंने इस सुविधा का उपयोग कर अपना बयान दर्ज कराया। श्री कविराज एसीबी मामले में अभियोजन स्वीकृति देने के मामले में अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में जयपुर मेट्रोपोलिटन कोर्ट के वीसी रूम में उपस्थित होकर गंगानगर कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया। इस मामले का ट्रायल गंगानगर कोर्ट में चल रहा है।

शरत कविराज का कहना है कि मुझे गंगानगर कोर्ट में गवाह के रूप में बयान देने के लिए करीब एक हजार किलोमीटर की यात्रा करनी पड़ती तथा तीन दिन सरकारी कार्यालयों में अनुपस्थित रहना पड़ता। अब राज्य सरकार एवं उच्च न्यायालय की इस पहल से समय की बचत होगी एवं सुनवाई भी तेज होगी।