ग्रह नक्षत्रों का भी था इशारा, मोदी फिर बनेंगे प्रधानमंत्री

गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कर्मक्षेत्र गोरखपुर में एक ज्योतिषाचार्य ने ग्रह नक्षत्रों का हवाला देकर पिछले साल ही दावा किया था कि 17वी लोकसभा चुनाव में न सिर्फ भाजपा का परचम लहरायेगा बल्कि नरेन्द्र मोदी एक बार फिर प्रधानमंत्री के पद पर आसीन होंगे।

अक्षय ज्योतिष संस्थान द्वारा प्रकाशित अक्षय पंचाग के सम्पादक ज्योतिषाचार्य पंडित रविशंकर पान्डेय ने पिछली 12 सितम्बर को कहा था कि जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ग्रह नक्षत्र बन रहे हैं वह इस बात की ओर इंगित कर रहे हैं कि विपक्षियों के भारी विरोध के बावजूद पुनः प्रधानमंत्री के पद पर मोदी ही विराजमान होंगे।

पान्डेय ने गुरूवार को अपने दावे की पुष्टि करते हुए कहा कि नरेन्द्र मोदी के ग्रह योग इस बात को सशक्त प्रमाण दे रहे हैं कि मोदी के नेतृत्व में उनकी सरकार विश्व में अपने कार्यों और नीतियों के माध्यम से भारत को उच्चतम स्थान पर पहुंचाने में सफलता प्राप्त करेंगे। उन्होंने कहा कि भारत और भारत की राजनीति मोदी के ग्रहों के अनुकूल है और राहू का इस निमित्त विशेष योगदान है जो नरेन्द्र मोदी को सत्ता के उच्च पद पर पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि यही नहीं शनि में शुक्र का भी योग है।

उन्होंने कहा कि मोदी के कुन्डली में राहू पंचम स्थान में हैं जो इनकी इस प्रगति में विशेष सहायक है और यही मुख्य कारण है कि श्री मोदी वर्ष 2019 के लोकसभा के चुनाव में भी दुबारा प्रधानमंत्री बन रहे हैं।

ज्योतिषाचार्य पान्डेय ने कहा कि उनकी भविष्यवाणी के अनुसार 25 फरवरी से 25 सितम्बर 2019 तक केतू की अन्तर दशा होगी जो मोदी को प्रधानमंत्री के पद पर विराजमान करा देगी।

उन्होंने यह भी घोषणा की थी कि महाराष्ट्र में शिवसेना और भारतीय जनता पार्टी के अंतरद्वंद के बावजूद राजनीति समझौता होगा और भाजपा को मजबूती मिलेगी उनकी यह बात भी सत्य साबित हुई है।

पान्डेय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की कुन्डली का ग्रह योग कुछ इस प्रकार उभर कर सामने आएगा कि भारत वैश्विक स्तर पर अपना परचम लहराएगा और सम्मान प्राप्त करेगा। एक प्रश्न के उत्तर में ज्योतिषाचार्य ने कहा कि ज्योतिष एक विज्ञान है और विज्ञान किसी परिकल्पना पर नहीं चलाया जा सकता है इसलिए ज्योतिष की गणना वैज्ञानिक है।

ज्योतिषाचार्य ने बताया कि सूर्य राजा और मंत्री शनि हैं तथा सस्येश मंगल, धान्येश सूर्य, दर्गेश शुक्र, मेघेश शुूक्र, रशेश गुरू, नीरसेश चन्द्रद्वय फलेश शुक्र, धनेश चन्द्र यह दशाधिकारी भूमन्डल पर शासन करेंगे। उन्होंने कहा कि विश्व में राष्ट्र की प्रतिष्ठा में तीव्र वृद्धि होगी। राष्ट्र में विदेशी निवेश एवं पर्यटन में अभूतपूर्व वृद्धि होगी, नये कारखानों की स्थापना होगी तथा वर्षा का उत्तम योग है, जिससे कृषि में अच्छे उत्पादन से राष्ट्र को काफी मजबूती प्राप्त होगी।