मोस्टवांटेड विकास दुबे की गिरफ्तारी या आत्मसमर्पण? उठने लगे सवाल

लखनऊ। उत्तर प्रदेश पुलिस का मोस्टवांटेड अपराधी विकास दुबे आखिरकार पुुलिस के शिकंजे में आ गया। यूपी से भागकर उसका मध्यप्रदेश के उज्जैन पहुंचने की कहानी अब भी अनसुलझी पहेली की तरह है। पांच लाख के इमानी हिस्ट्रीशीटर को पुलिस ने उज्जैन के महाकाल क्षेत्र से गुरूवार सुबह गिरफ्तार किया है।

इस बीच दुबे की गिरफ्तारी पर तंज कसते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि अलर्ट के बावजूद हिस्ट्रीशीटर का उज्जैन पहुंचना योगी सरकार के सुरक्षा दावों की पोल खोलता है और अब सरकार को सीबीआई जांच करा कर इस घटनाक्रम से जुड़े सभी तथ्यों को जगजाहिर करना चाहिए।

वाड्रा ने गुरूवार को ट्वीट किया कि कानपुर के जघन्य हत्याकांड में यूपी सरकार को जिस मुस्तैदी से काम करना चाहिए था, वह पूरी तरह फेल साबित हुई। अलर्ट के बावजूद आरोपी का उज्जैन तक पहुंचना, न सिर्फ सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है बल्कि मिलीभगत की ओर इशारा करता है।

दिवंगत पुलिस क्षेत्राधिकारी देवेन्द्र मिश्रा के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनंद देव को लिखे गये पत्र को लेकर उन्होंने कहा कि तीन महीने पुराने पत्र पर ‘नो एक्शन’ और कुख्यात अपराधियों की सूची में ‘विकास’ का नाम न होना बताता है कि इस मामले के तार दूर तक जुड़े हैं। यूपी सरकार को मामले की सीबीआई जांच करा सभी तथ्यों और प्रोटेक्शन के ताल्लुकातों को जगज़ाहिर करना चाहिए।

गौरतलब है कि दो तीन जुलाई की रात कानपुर में चौबेपुर के बिकरू गांव में दबिश देने गई पुलिस टीम पर विकास दुबे और उसके गैंग ने गोलियां बरसाई थीं जिसमें पुलिस क्षेत्राधिकारी देवेन्द्र मिश्रा समेत आठ जाबांज पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे जबकि सात अन्य अस्पताल में भर्ती है। विकास को आज मध्यप्रदेश के उज्जैन में गिरफ्तार किया गया है।

कानपुर काण्ड का मुख्य आरोपी गिरफ्तार या आत्मसमर्पण

समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आठ पुलिसकर्मियों का हत्यारोपी हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे को मध्य प्रदेश के उज्जैन से गिरफ्तार किए जाने पर तंज कसते हुए कहा कि सरकार को साफ करना चाहिए कि यह आत्मसमर्पण है या गिरफ्तारी। उन्होंने कहा कि सरकार को उसके मोबाइल की सीडीआर सार्वजनिक करना चाहिए जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके।

यादव ने गुरूवार को ट्वीटकर कहा कि ख़बर आ रही है कि ‘कानपुर-काण्ड’ का मुख्य अपराधी पुलिस की हिरासत में है। अगर ये सच है तो सरकार साफ़ करे कि ये आत्मसमर्पण है या गिरफ़्तारी। साथ ही उसके मोबाइल की सीडीआर सार्वजनिक करे जिससे सच्ची मिलीभगत का भंडाफोड़ हो सके।

दिग्विजय ने विकास दुबे की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने उत्तरप्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे की उज्जैन में ‘गिरफ्तारी’ पर सवाल उठाते हुए ट्वीट किया है। सिंह ने ट्वीट में लिखा है कि यह तो उत्तरप्रदेश पुलिस के एनकाउंटर से बचने के लिए एक प्रायोजित सरेंडर लग रहा है। मेरी सूचना है कि मध्यप्रदेश भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के सौजन्य से यह संभव हुआ है। जय महाकाल।’

सिंह ने इसी से जुड़े एक अन्य ट्वीट में लिखा है कि शिवराज जी आप बिना किसी कारण श्रेय ले रहे हैं। इसका श्रेय तो आपके गृह मंत्री जी को देना चाहिए। इसके पहले मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विकास दुबे की गिरफ्तारी पर एक ट्वीट में लिखा है ‘जिनको लगता है महाकाल की शरण में पाप धुल जाएंगे, उन्होंने महाकाल को जाना ही नहीं।’ इसी ट्वीट के संदर्भ में दिग्विजय सिंह ने श्रेय संबंधी ट्वीट किया है।

विकास दुबे के मामले में कमलनाथ ने उठाए सवाल

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने उत्तरप्रदेश के कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे की उज्जैन में गिरफ्तारी पर सवाल उठाते हुए आज कहा कि इस मामले की उच्च स्तरीय जांच होना चाहिए।

कमलनाथ ने ट्वीट के जरिए कहा कि यूपी के कानपुर के कुख्यात गैंगस्टर, 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के आरोपी विकास दुबे के उज्जैन में महाकाल मंदिर में ख़ुद ‘सरेंडर’ करने की घटना की उच्चस्तरीय जांच होनी चाहिए। इसमें किसी बड़ी सियाशी साज़िश की बू आ रही है। इतने बड़े इनामी अपराधी के, जिसको पुलिस रात- दिन खोज रही है, उसका कानपुर से सुरक्षित मध्यप्रदेश के उज्जैन तक आना और महाकाल मंदिर में प्रवेश करना और ख़ुद चिल्ला- चिल्लाकर ख़ुद को गिरफ़्तार करवाना, कई संदेह को जन्म दे रहा है। किसी संरक्षण की ओर इशारा कर रहा है। इसकी जांच होना चाहिए।

कमलनाथ ने लिखा है कि हमने हमारी सरकार में माफ़ियाओं के ख़िलाफ़ सतत बड़ा अभियान चलाया, जिसके कारण माफिया प्रदेश छोड़कर चले गए और अब भाजपा सरकार आते ही माफिया वापस प्रदेश लौटने लगे हैं। प्रदेश माफियाओं की सुरक्षित शरणस्थली बनता जा रहा है।