अंतर्निर्भर हो गया विश्व, किसी एक देश के मुताबिक नहीं चल सकता : मोदी

PM Modi, at singapore Shangri-La Dialogue, speaks against protectionism

सिंगापुर। वैश्विक नेताओं एवं समुदायों से मतभेदों से ऊपर उठ कर सुरक्षित विश्व बनाने का आह्वान करते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि कोई देश विश्व को अपने मुताबिक ना तो ढाल सकता है और ना ही अपने बल पर उसे सुरक्षित बना सकता है।

मोदी ने यहां के अत्यंत प्रतिष्ठित शांगरीला डॉयलॉग में अपने मुख्य वक्तव्य में कहा कि आज की दुनिया अंतर निर्भरता की सफलताओं एवं विफलताओं की दुनिया है और कोई भी देश इसे अपने मुताबिक ना जो ढाल सकता है और ना ही अपने बल पर उसे सुरक्षित बना सकता है।

यह एक ऐसा विश्व है जो हमें अपने मतभेदों और प्रतिस्पर्द्धा से ऊपर उठ कर मिल कर काम करने को कहता है। उन्होंने कहा कि क्या यह संभव है? हां, यह संभव है। मैं आसियान को एक उदाहरण एवं प्रेरणा के रूप में देखता हूं। आसियान विश्व के किसी भी समूह की तुलना में संस्कृति, धर्म, भाषा, सुशासन एवं समृद्धि में सर्वोच्च स्तर की विविधता दिखायी देती है।

प्रधानमंत्री ने हिन्द प्रशांत क्षेत्र को लेकर भारत के दृष्टिकोण को पेश करते हुए कहा कि आसियान के दस देश हिन्द महासागर एवं प्रशांत महासागर को भौगोलिक एवं सांस्कृतिक रूप से जोड़ते हैं। समावेशन, खुलापन एवं आसियान केन्द्रीयता और एकता इस नये हिन्द प्रशांत क्षेत्र का केन्द्रीय बिन्दु है।

उन्होंने कहा कि भारत हिन्द प्रशांत क्षेत्र को एक रणनीति के रूप में या सीमित सदस्यों के क्लब के रूप में नहीं देखता है। ना ही कोई एेसा समूह मानता है जो किसी पर प्रभुत्व जमाने का इच्छुक है। इसलिए हिन्द प्रशांत क्षेत्र के लिए भारत का विज़न सकारात्मक है जिसके कई तत्व है।

मोदी ने भारत में अपने लक्ष्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी सरकार का लक्ष्य भारत को आज़ादी के 75 साल पूरे होने के मौके पर न्यू इंडिया में बदलने का है।

उन्होंने भारत की सुरक्षा एवं विदेश नीति के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि तीन साल पहले उन्होंने मॉरीशस में भारत के विज़न की ‘सागर’ के रूप में व्याख्या की थी। सागर का मतलब हिन्दी में समुद्र होता है तो अंग्रेजी में सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर आल दि रीज़न है।

उन्होंने कहा कि वैदिक काल के पूर्व से ही भारतीय चेतना में समुद्रों का महत्वपूर्ण स्थान रहा है। हजारों साल पहले सिंधु घाटी सभ्यता के युग से भारतीय प्रायद्वीप में समुद्री व्यापार हुआ करता था। सिंगापुर सुदूर पूर्व के लिए भारत के लिए द्वार के समान था।

प्रधानमंत्री आसियान के साथ भारत की साझेदारी के साथ रूस और अमेरिका के साथ विशेष साझेदारी का उल्लेख किया और कहा कि चीन के साथ भारत का सहयोग बढ़ रहा है और दोनों देशों ने शांतिपूर्ण सीमा सुनिश्चित करने तथा मुद्दों के समाधान के लिए परिपक्वता एवं बुद्धिमत्ता का परिचय दिया है।