भारत का लक्ष्य ओलंपिक 2024, 2028 : मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली के इंदिरा गांधी स्टेडियम में रविवार को 44वें शतरंज ओलंपियाड के ऐतिहासिक मशाल रिले का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत के युवा हर खेल में शीर्ष प्रदर्शन कर रहे हैं, और भारत का अगला लक्ष्य पेरिस 2024 और लॉस एंजेलिस 2028 है।

मोदी ने कहा कि न्यू इंडिया के युवा हर खेल में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं। वे दुनिया भर में भारत का परचम लहरा रहे हैं। अब हम 2024 पेरिस ओलंपिक और 2028 लॉस एंजेलिस ओलंपिक को ध्यान में रखते हुए काम कर रहे हैं। इसके लिए टॉप्स (टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम) के माध्यम से भी खिलाड़ियों का समर्थन किया जा रहा है।

मोदी ने कहा कि पहले खिलाड़ियों को सही मंच के लिए इंतज़ार करना पड़ता था, लेकिन आज खेलो इंडिया उन्हें तलाश भी रहा है, तराश भी रहा है। उन्होंने कहा कि आज हज़ारों खिलाड़ियों को खेलो इंडिया अभियान के तहत चुना गया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति ने भी खेलों को अन्य विषयों जितना महत्व दिया है और देश में कई खेल विश्वविद्यालयों का निर्माण किया जा रहा है।

मोदी ने कहा कि खेलो इंडिया के तहत देश के दूर-दराज के क्षेत्रों से खेल प्रतिभाएं उभर रही हैं और देश के विभिन्न कस्बों और जिलों में आधुनिक खेल का बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।

नई शिक्षा नीति के तहत खेलों को अन्य शैक्षणिक विषयों के बराबर रखा गया है। फिजियो, खेल विज्ञान जैसे खेलों के कई नए आयाम सामने आ रहे हैं और देश में कई खेल विश्वविद्यालय खोले जा रहे हैं।

शतरंज के साथ भारत के पुराने रिश्ते की ओर इशारा करते हुए मोदी ने कहा कि हमारे पूर्वजों ने चतुरंगा उर्फ शतरंज का आविष्कार किया था। शतरंज भारत के रास्ते दुनिया के कई देशों में पहुंचा और बहुत लोकप्रिय हुआ।

शतरंज हिंदुस्तान से निकलकर पूरी दुनिया में पहुंचा, कई लोगों का ‘पैशन’ बन गया है। हमें खुशी है कि शतरंज इतने बड़े खेल के रूप में अपने जन्मस्थान में फिर एक बार ‘सेलिब्रेट’ किया जा रहा है।

मोदी ने ओलंपियाड में हिस्सा ले रहे खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए कहा कि साथियों, आप जब खेल के मैदान या किसी बोर्ड के सामने होते हैं तो सिर्फ अपनी जीत के लिए नहीं बल्कि देश के लिए खेलते हैं। जाहिर है हजारों लोगों की आकाक्षाओं का भार भी आप पर रहता है। आप अपना शत प्रतिशत दीजिए, लेकिन जीरो प्रतिशत तनाव के साथ।

उन्होंने कहा कि शतरंज के खेल में एक चूक से खेल पलटने की आशंका रहती है, लेकिन यह शतरंज ही है जहां हारी हुई बाज़ी को भी दिमाग से पलट सकते हैं, इसलिए खिलाड़ी जितना कम दबाव लेंगे, उतना बेहतर प्रदर्शन करेंगे।