चीन का ‘नए युग’ और भारत का ‘नए भारत’ का सपना विश्व के लाभ के लिए : पीएम मोदी

pm modi with china president xi jinping in wuhan
pm modi with china president xi jinping in wuhan

वुहान। भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चीन के साथ वैचारिक साम्यता को स्थापित करते हुए कहा कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ‘नए युग’ सपने और उनके ‘नए भारत’ के प्रयास विश्व के लाभ के लिए सही दिशा में कदम हैं।

भारत और चीन के बीच 1962 के बाद पहली बार आपसी रिश्तों की नई इबारत लिखे जाने के ऐतिहासिक प्रयास के रूप में देखी जा रही इस अनौपचारिक शिखर बैठक को ‘दिल से दिल तक’ कहा जा रहा है। चीन के हुबेई प्रांत के प्रमुख औद्योगिक शहर वुहान के हुबेई प्रांतीय संग्रहालय परिसर में ईस्ट लेक गेस्ट हाउस में दोपहर बाद दोनों नेताओं के बीच सदभाव पूर्ण माहौल में बैठक शुरू हुई।

चीन के राष्ट्रपति ने मोदी का गर्मजोशी से स्वागत किया। इस मौके पर दोनों नेताओं ने भारत एवं चीन के द्विपक्षीय संबंधों की सुदृढ़ करने के बारे में विचारों का आदान-प्रदान किया। इस मुलाकात में दोनों ओर से दुभाषिये मौजूद थे।

मोदी ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि भारत एवं चीन दोनों की विशेषता रही है कि दोनों संस्कृतियों का विकास नदियों के किनारे हुआ है। इसका पांच हजार साल का इतिहास है। उन्होंने कहा कि वुहान शहर में उन्हें गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अध्ययन दौरे पर आने का अवसर मिला था।

थ्री गोर्जेस बांध के निर्माण को जिस तेजी से और जिस पैमाने पर बनाया गया था, उससे वह बहुत प्रभावित हुए थे। उन्होंने हर बात को बहुत बारीकी से देखा था। उन्होंने चीन द्वारा जलीय मार्गों के विकास की भी सराहना की।

जिनपिंग के साथ प्रधानमंत्री ने संग्रहालय में मार्कीज़ यी की झेंग सांस्कृतिक अवशेष एवं विरासत पर एक प्रदर्शनी का अवलोकन किया। जिनपिंग ने मोदी को झेंग संस्कृति के पुरा अवशेषों को रुचिपूर्वक दिखाया।

दोनों नेताओं के बीच एकांत में हुई बातचीत के बाद शाम को हुई बैठक में दोनों ओर से प्रतिनिधि भी शामिल हुए जिनमें राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री एवं स्टेट काउंसलर वांग यी भी मौजूद थे।

बैठक में मोदी ने चीनी राष्ट्रपति की सदभावना की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत के लोगों ने इस बात का गर्व से देखा है कि उन्होंने (जिनपिंग ने) राजधानी बीजिंग के बाहर दो बार उनका स्वागत एवं सम्मान किया।

यह चीनी राष्ट्रपति के मन में भारत के प्रति स्नेह एवं प्रेम का प्रतीक है तथा भारतीय प्रधानमंत्री का स्वागत एवं सम्मान भारत का स्वागत एवं सम्मान है जिसके लिए वह जिनपिंग का हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कम्युनिस्ट पार्टी के अधिवेशन में जिनपिंग के वक्तव्य में जो नए युग की बात कही गई है और वह भारत में जो नए भारत के निर्माण का प्रयास कर रहा है, यह दर्शाता है कि दोनों की सोच में समानता है। उन्होंने कहा कि आपका नए युग का सपना और हमारा नए भारत का प्रयास विश्व के लाभ के लिए सही दिशा में कदम है।

शाम की बैठक के बाद चीनी राष्ट्रपति मोदी के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। मोदी वुहान में तड़के पहुंचे। हवाई अड्डे पर उनकी अगवानी के लिए हुबेई प्रांत के प्रशासक और चीन में भारत के राजदूत गौतम बंबावाले मौजूद थे। कल दोनों नेता ईस्ट लेक के किनारे टहलते हुए बातचीत करेंगे और नौका विहार भी करेंगे।

जिनपिंग कल दोपहर के भोज का भी आयोजन करेंगे। मोदी ने चीन रवाना होने से पहले अपने वक्तव्य में कहा था कि राष्‍ट्रपति शी और वह द्विपक्षीय और वैश्विक महत्‍व के अनेक मुद्दों पर विचारों का आदान-प्रदान करेंगे। हम राष्‍ट्रीय विकास के लिए हमारी दूरदर्शिता और प्राथमिकताओं, खासतौर से वर्तमान और भविष्‍य की अंतरराष्‍ट्रीय स्थिति के बारे में बातचीत करेंगे और रणनीतिक और दीर्घकालिक संदर्भ में भारत-चीन के संबंधों की प्रगति की भी समीक्षा करेंगे।

अधिकारियों के अनुसार इस बैठक का अधिकारियों द्वारा परस्पर तय कोई औपचारिक एजेंडा नहीं है और यह बातचीत प्रोटोकॅल के बंधन से मुक्त है। न तो इसको लेकर दोनों पक्षाें की ओर से काेई संयुक्त दस्तावेज या बयान जारी किया जाएगा और न ही किसी समझौते पर हस्ताक्षर किए जाएंगे।

बैठक में दोनों नेताओं के बीच खुलकर बात हो रही है। बातचीत का क्या नतीजा निकलेगा, यह बातचीत खत्म होने के बाद ही पता चलेगा। इस बारे में दोनों पक्ष उस समय की परिस्थिति के अनुसार अपने-अपने मीडिया को जानकारी दे सकते हैं।

अधिकारियों ने बताया कि इस शिखर सम्मेलन के लिए मोदी की यात्रा को देखते हुए संग्रहालय को बंद कर दिया गया है। संग्रहालय के प्रवेश द्वार पर एक संदेश में लोगों को सूचित किया गया है कि उपकरणों के रखरखाव के कारण संग्रहालय को चार दिनों के लिए बंद किया गया है। संग्रहालय की सीढ़ियों पर लाल कालीन बिछाए गए हैं।

चीन की सत्तारूढ़ कम्युनिस्ट पार्टी के आधिकारिक अखबार पीपुल्स डेली ने आज अपनी रिपोर्ट में बताया है कि चीन और भारत दोनों देशों की संस्कृतियों में सदभाव की अवधारणा के समृद्ध विचार हैं। जिस स्थान पर दोनों देशों के नेताओं की मुलाकात हो रही है, वर्ष 2014 में उसी संग्रहालय में भारत पर एक विशेष प्रदर्शनी आयोजित की गई थी।

अखबार ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि चीन और भारत के बीच मैत्रीपूर्ण आदान-प्रदान ने ऐसे जीवंत उदाहरण प्रस्तुत किए हैं जिन्होंने विश्वभर में अंतर-सांस्कृतिक वार्ता का एक मॉडल स्थापित किया है।