कविता – भारत की संस्कृति निराली सबको देती मान सम्मान।

poem-on-indian-culture-and-quality of india
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भारतीय संस्कृति
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भारत की संस्कृति निराली
सबको देती मान सम्मान
बड़ों की सेवा सब करते हैं
छोटों से करते हैं प्यार,
संस्कारों की भूमि यह है
सबको देती मान सम्मान।

सुबह सबेरे मात पिता की
करते हैं चरण वंदना यहां
आशीष पाते हैं ये बच्चे
जीवन में सफल हो जाते हैं
संस्कारों की भूमि यह है
सबको देती मान सम्मान।
रथ
सद् गुण हर बाला में हो
सदाचारी हर बालक हो
मर्यादित हर नारी हो
पुरुष आदर्शो की खान हो,
संस्कारो की भूमि यह है
सबको देती मान सम्मान।

वेद पुराणो ने जो बतलाया
करते आचरण यहां सभी
प्रेम,स्नेह,मान मर्यादा को
जीवन में अपनाते सभी
संस्कारो की भूमि यह है
सबको देती मान सम्मान।

मां है ईश्वर, गुरु भगवान
करते है सभी इनका गुण गान
त्यौहारों को मनाते मिलजुल कर
भारत की संस्कृति महान
संस्कारो की भूमि यह है
सबको देती मान सम्मान।
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नाम कालिका प्रसाद सेमवाल