‘खेलो इंडिया’ की तर्ज पर ‘खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स’ : मोदी

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि ‘खेलो इंडिया’ के माध्यम से देश में तीन साल के दौरान हजारों खेल प्रतिभाएं सामने आई हैं और इससे उत्साहित होकर सरकार ने अब इसी तर्ज पर ‘खेलाे इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स’ का आयोजन करने का निर्णय लिया है।

मोदी ने रेडियाे पर हर महीने प्रसारित होने वाले अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ की इस साल प्रसारित होने वाली पहली कड़ी में कहा कि ‘खेलाे इंडिया’ बहुत सफल है और इसके कारण देश को खेल प्रतिभाएं मिली हैं। इसकी सफलता उत्साहित करने वाली है और इसलिए ‘खेलाे इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स’ शुरू किए जा रहे हैं और 22 फरवरी से एक मार्च तक उड़ीशा के भुवनेश्वर तथा कटक में इन खेलाें का आयोजिन किया जा रहा है।। इन खेलों में तीन हजार से अधिक प्रतिभागी शामिल होंगे।

हाल में असम के गुवाहाटी में संपन हुए तीसरे ‘खेलो इंडिया’ के सफल आयोजन के लिए असम के लोगों को बधाई देते हुए श्री मोदी ने कहा कि मैं असम की सरकार और असम के लोगों को ‘खेलो इण्डिया’ की शानदार मेज़बानी के लिए बहुत-बहुत बधाई देता हूं। गुवाहाटी में 22 जनवरी को संपन्न हुए इन खेलों में विभिन्न राज्यों के करीब छह हज़ार खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। खेलों के इस महोत्सव में 80 रिकार्ड टूटे और मुझे गर्व है कि इसमें 56 रिकार्ड तोड़ने का काम हमारी बेटियों ने किया है। ये सिद्धि, बेटियों के नाम हुई है। मैं सभी विजेताओं के साथ ही इसमें हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों को बधाई देता हूं।

उन्होंने कहा कि साल-दर-साल ‘खेलो इंडिया गेम्स’ में खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ रही है। उन्होंने खेलों के प्रति बच्चों के बढते झुकाव का जिक्र करते हुए कहा कि मैं आपको बताना चाहता हूं, कि 2018 में, जब ‘खेलो इंडिया गेम्स’ की शुरुआत हुई थी, तब इसमें 3500 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, लेकिन महज़ तीन वर्षों में खिलाड़ियों की संख्या करीब दोगुना बढकर छह हज़ार से अधिक हो गई है।

प्रधानमंत्री ने कहा “इन खेलों के माध्यम से 3200 प्रतिभाशाली बच्चे उभर कर सामने आए हैं। इनमें कई बच्चे ऐसे हैं जो अभाव और ग़रीबी के बीच पले-बढ़े हैं। इन खेलो में शामिल होने वाले बच्चों और उनके माता-पिता के धैर्य और दृढ़ संकल्प की कहानियां ऐसी हैं जो हर हिन्दुस्तानी को प्रेरणा देगी। गुवाहाटी की पूर्णिमा मंडल को ही लीजिये। वह गुवाहाटी नगर निगम में एक सफाई कर्मचारी हैं, लेकिन उनकी बेटी मालविका ने जहां फुटबाल में दम दिखाया, वहीं उनके एक बेटे सुजीत ने खो-खो में, तो दूसरे बेटे प्रदीप ने, हॉकी में असम का प्रतिनिधित्व किया।

उन्होंने कहा कि कुछ ऐसी ही गर्व से भरने वाली कहानी तमिलनाडु के योगानंथन की है। वह खुद तो बीड़ी बनाने का कार्य करते है, लेकिन उनकी बेटी पुर्णाश्री ने भारत्तोलन का स्वर्ण पदक जीता है। उन्होंने कहा कि जब मैं डेविड बैखम का नाम लूंगा तो आप कहेंगे मशहूर अंतरराष्ट्रीय फुटबाल खिलाड़ी हैं। लेकिन अब अपने पास भी एक डेविड बैखम है, और उसने गुवाहाटी के युवा खेलों में स्वर्ण पदक जीता है। वह भी साइक्लिंग स्पर्धा के 200 मीटर के स्प्रिट ईवेंट में, और मेरे लिए तो दोहरी खुशी यह है कि कुछ समय, मैं जब अंडमान-निकोबार गया था, कार -निकोबार द्वीप के रहने वाले डेविड के सिर से बचपन में ही माता-पिता का साया उठ गया था।

चाचा उन्हें फुटबॉलर बनाना चाहते थे, तो मशहूर फुटबॉलर के नाम पर उनका नाम रख दिया।
मोदी ने पोलो वोल्ट में अपना ही रिकार्ड तोडने वाले प्रशांत सिंह कन्हैया का जिक्र किया और कहा कि भिवानी के 19 साल प्रशांत ने पोलो वोल्ट इवेंट में खुद अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा है। प्रशांत एक किसान परिवार से हैं।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि प्रशांत मिट्टी में पोलो वोल्ट की प्रेक्टिस करते थे। यह जानने के बाद खेल विभाग ने उनके कोच को दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु स्टेडियम में अकादमी चलाने में मदद की और आज प्रशांत वहां पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसी तरह से मुंबई की करीना शान्क्ता ने विपरीत परिस्थिति में हार नहीं मानी और तैराकी में सौ मीटर ब्रेस्ट-स्ट्रोक स्पर्धा की, अंडर 17 श्रेणी में गोल्ड मेडल जीता और नया नेशनल रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने कहा कि मैं सभी खिलाड़ियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूं।