पंजाब में 424 वीआईपी की सुरक्षा पर फिर चली कैंची

चंडीगढ़। पंजाब की भगवंत मान सरकार ने सत्ता संभालने के बाद दूसरी बार वीवीआईपी सुरक्षा में कटौती की है। प्राप्त जानकारी के अनुसार पूर्व मंत्रियों, विधायकों, पुलिस अधिकारियों से लेकर धार्मिक नेताओं की सुरक्षा में कटौती की गई है। करीब 424 गणमान्यों की सुरक्षा में कटौती की गई है।

राज्य सरकार ने अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह डेरा मुखी, तीन एडीजीपी, पूर्व विधायकों और पूर्व मंत्रियों की सुरक्षा घटा दी है। पंजाब सशस्त्र पुलिस बल के कमांडो को जालंधर कैंट मुख्यालय पर रिपोर्ट करने के निर्देश दिए हैं।

पुलिस अधिकारी एडीजीपी एसके अस्थाना, एलके यादव, एमएफ फारुकी, प्रवीन कुमार सिन्हा, शशि प्रभा द्विवेदी, वी नीरजा, आईजी जतिंदर औलख, गौतम चीमा, गुरिंदर सिंह ढिल्लों, अनन्या गौतम, डीआईजी नीलांबरी जगदले, डीसीपी जतिंदर मंड की सुरक्षा कम की गई है।

पंजाब कांग्रेस के पूर्व प्रधान एवं सांसद शमशेर सिंह दूलो, पूर्व केन्द्रीय मंत्री राजीव शुक्ला, कांग्रेस के पूर्व विधायकों की सुरक्षा में कटौती की गई है। सिद्धू मूसेवाला, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन इकबाल सिंह लालपुरा, पूर्व सांसद सुखदेव सिंह ढींढसा की सुरक्षा में भी कटौती की गई है।

अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह की सुरक्षा का जिम्मेदारी अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी पर होगी। एसजीपीसी ने तलवंडी साबो स्थित उनके आवास पर चार सुरक्षा कर्मी तैनात किए हैं।

सरकार ने चारों ओर से हो रहे विरोध को देखते हुए जत्थेदार की सुरक्षा बहाल कर दी। जब सुरक्षाकर्मी उनकी सुरक्षा लौटे तो उन्होंने सुरक्षा लेने से साफ इंकार कर दिया।
भाजपा के नेता एवं पूर्व विधायक रहे फतेहजंग बाजवा ने तो मान सरकार के इस फैसले को न्यायालय में चुनौती देने की बात तक कह दी है।

सुरक्षा वापसी,कटौती पर पुनर्विचार करें भगवंत मान: शांडिल्य

एंटी टेररिस्ट फ्रंट इंडिया के राष्ट्रीय अध्यक्ष वीरेश शांडिल्य ने कहा है कि पंजाब में मुख्यमंत्री भगवंत मान अतिविशिष्ट (वीवीआईपी) व्यक्तियों की सुरक्षा में कटौती एवं सुरक्षा वापसी लेने के फैसले पर पुनर्विचार करें।

शांडिल्य ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा कि आम आदमी पार्टी सरकार को खालिस्तानी ताकतें, बब्बर खालसा आतंकी संगठन एवं पाकिस्तानी संगठन कमजोर करना चाहते हैं। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री भगवंत मान को यह नहीं भूलना चाहिए कि पंजाब आतंकवाद की आग के काले दौर को झेल चुका है और आज भी पंजाब में आतंकवादी संगठन सक्रिय हैं। इसका ताजा उदहारण मोहाली हवाई ब्लास्ट एवं इससे पहले पठानकोट हमला, लुधियाना ब्लास्ट और पंजाब में आतंकवादियों का मिलना है।

उन्होंने कहा कि लगातार पंजाब ने आतंकवादी गतिविधियां चल रही हैं और जिस पंजाब में सबसे सुरक्षित सिविल सचिवालय में पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह को मानव बम बनकर उड़ा दिया गया ऐसे में पंजाब जैसे राज्य में सुरक्षा हटाना या सुरक्षा में कटौती करने के एंटी टेररिस्ट फ्रंट इंडिया पक्ष में नहीं है।

शांडिल्य ने कहा पंजाब सरकार को यह भी नहीं भूलना चाहिए कि एक सिपाही से लेकर पंजाब के आईपीएस अधिकारियों तक ने पंजाब में आतंकवाद के खात्मे के लिए अपनी शहादत दी है। सरकार अगर यह मानती है तो पंजाब में अब आतंकवाद नहीं है, इस बारे श्वेत पत्र जारी इसको लेकर किया जाए फिर सुरक्षा वापसी का एंटी टेरोरिस्ट फ्रंट इंडिया स्वागत करेगी।