राफेल सौदे में भ्रष्टाचार छुपाने के लिए कीमत नहीं बता रही सरकार : कांग्रेस

Rafale deal row : why modi government not telling the price Rafael says Congress
Rafale deal row : why modi government not telling the price Rafael says Congress

जालंधर। कांग्रेस ने बुधवार को आरोप लगाया कि राफेल डील में केन्द्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार ने देश को 42 हजार करोड़ रुपए का चूना लगाया है।

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल और पवन खेड़ा ने पत्रकारों से कहा कि राफेल सौदे में भाजपा-सरकार पारदर्शिता अपनाने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि 526 करोड़ के लड़ाकू जहाज को 1670 करोड़ में खरीद कर सरकारी खजाने को 41 हजार 205 करोड़ रूपए का चूना लगाया गया और अब भ्रष्टाचार को छुपाने के लिए गोपनीयता के नाम पर सरकार राफेल डील की कीमत को उजागर नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि राफेल सौदा सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचाने और अपने पूंजीपति मित्रों को लाभ पहुंचाने के गड़बड़झाले का जीता जागता उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस पूरे मामले में केंद्र सरकार की कंपनी हिन्दुस्तान एयरोनाटिकल लिमिटेड को दरकिनार कर रिलायंस डिफेंस लिमिटेड के साथ सौदा किया गया। उन्हाेंने कहा कि मोदी सरकार अब पूरे मामले पर पर्दा डालने की साजिश में जुटी हुई है।

शेरगिल ने कहा कि खरीद मूल्य बताने के लिए गोपनीयता की कोई शर्त नहीं है। उन्होंने कहा कि जहां प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री ने गोपनीयता की शर्त की दुहाई देकर 36 राफेल लड़ाकू जहाजों का खरीद मूल्य संसद में बताने से इंकार कर दिया, वहीं भारत और फ्रांस के बीच हुए समझौते में ऐसी कोई शर्त नहीं है।

उन्होंने कहा कि डसॉल्ट एविएशन और रिलायंस डिफेंस लिमिटेड ने इन जहाजों के खरीद मूल्य का खुलासा स्वयं ही कर दिया है। यही नहीं कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने अपने कार्यकाल में डसॉल्ट द्वारा बनाए गए मिराज लड़ाकू जहाज, सुखोई लड़ाकू जहाज एवं अन्य रक्षा खरीदियों का मूल्य संसद के पटल पर रखा था तो फिर प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री क्या छिपाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करते हुए मोदी ने भारतीय वायुसेना के लिए आवश्यक लड़ाकू जहाजों की संख्या 126 से घटाकर 36 क्यों कर दी जबकि पहला जहाज तो सितंबर 2019 में आएगा और अंतिम जहाज 2022 में भारत पहुंचेगा तो फिर इतनी जल्दवाजी क्यों की गई।

शेरगिल ने कहा कि भाजपा सरकार राष्ट्र सुरक्षा के लिए कितनी सजग है इस बात का पता इस बात से चल रहा है कि 1962 के बाद पहली बार देश के रक्षा बजट को इतना कम रखा गया है| उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आरोप लगने पर कांगेस के नेताओं को उद्योगपतियो से मानहानि के नोटिस दिलवा रही है।