राफेल सौदे ने युवाओं का रोजगार छीना : राहुल गांधी

rafale deal snatched jobs from indians : Rahul Gandhi attacks PM modi
rafale deal snatched jobs from indians : Rahul Gandhi attacks PM modi

जयपुर। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने राफेल सौदे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को घेरते हुए आरोप लगाया कि उनकी गलत नीतियों के कारण देश के लाखों युवा रोजगार से वंचित हो गए वहीं किसानों की अनदेखी, महिला और दलित उत्पीड़न पर चुप्पी साध कर देश के लोगों के साथ धोखा किया है।

राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पहली बार राजस्थान की यात्रा पर आए गांधी शनिवार को उत्साह से लबरेज दिखे और अपने पैतीस मिनट के भाषण में उन्होंने न केवल मोदी पर व्यक्तिगत आरोप लगाया बल्कि नोटबंदी, जीएसटी, दलित और महिला अत्याचारों के साथ ही किसानों की कर्ज माफी के मुद्दे को उठाया। उन्होंने नोटबंदी, जीएसटी पर भी केन्द्र सरकार को घेरते हुए कहा कि इसके कारण बड़े व्यापारियों को तो फायदा हुआ है लेकिन छोटे व्यापारियों की तो रोजी रोटी छिन गई है।

उन्होंने राफेल सौदे में प्रधानमंत्री की चुप्पी पर तंज कसते हुए कहा कि इस सौदे से देश में बहुत बड़ा घोटाला किया गया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार ने 126 राफेल विमान का सौदा किया था जिसकी प्रति विमान कीमत 540 करोड़ रूपए थी लेकिन प्रधानमंत्री द्वारा तीन गुना दर में इसका सौदा किया गया है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के समय यह विमान देश में ही बनने वाला था और इसको बेंगलुरु की सार्वजनिक कंपनी हिन्दुस्तान ऐयरोनोटिकल लिमिटेड (एचएएल) में तैयार किया जाता, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार मिलता लेकिन मोदी के इस सौदे से युवाओं का रोजगार छिन गया।

उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि देश के इतिहास में यह पहले प्रधानमंत्री है जिसने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के राफेल सौदे को रद्द कर अपनेे करीबी मित्र अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के लिये इसका ठेका उसे दिला दिया। उन्होंने कहा कि मोदी ने 45 हजार करोड़ रूपए के कर्ज से दबे अपने मित्र को लाभ पहुंचाने के प्रयास में इस सौदे के बारे में पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पार्रिकर से भी कोई बातचीत नहीं की।

उन्होंने प्रधानमंत्री पर देश के चंद बड़े उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने के लिये 2 लाख 30 हजार करोड रूपए का कर्जा माफ कर दिया लेकिन देश के किसानों के कर्जमाफी पर चुप्पी साधी रखी। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगपतियों के कर्जे को नॉन परफोर्मिंग एसेट्स मान कर उनके करोडों रूपए के ऋण माफ किए जा सकते है तो किसानों के कर्ज नहीं चुकाने पर उन्हें डिफाल्टर कैसे घोषित किया जा सकता है।

उन्होंने देश में किसानों और उद्योगपतियों के ऋण माफी को एक समान नीति बनाने की वकालात करते हुये कहा कि किसानों के भी कर्ज माफी को नॉन परफोमिंग एसेट्स माना जाना चाहिए।

राहुल ने चीन का उदाहरण देते हुए कहा कि चीन में प्रति दिन पचास हजार लोगों को रोजगार मुहैया कराया जा रहा है जबकि मोदी सरकार के शासन में प्रति दिन 450 लोगों को ही रोजगार मिल रहा हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार में आने से पहले प्रति वर्ष दो करोड़ लोगों को रोजगार देने का वादा किया था जो लोगों के साथ एक धोखा साबित हुआ।

उन्होंने कहा कि वह किसानों के मुद्दे को लेकर एक बार मोदी के कार्यालय गया और देश के विभिन्न राज्यों में किसानों की कर्जमाफी के संबंध में सवाल किया लेकिन प्रधानमंत्री ने इसका कोई जवाब नहीं दिया और केवल चुप्पी साधे रहे।

उन्होंने प्रधानमंत्री से आंखों में आखें डाल कर जवाब देने का जिक्र करते हुए चुटकी ली कि राफेल, किसान कर्ज माफी ऐसे मुद्दे है जिस पर छप्पन इंच का सीना रखने का दावा करने वाले उनसे आंख नहीं मिला सकते।

उन्होंने प्रधानमंत्री के बेटी पढाओ-बेटी बचाओ नारे का उल्लेख करते हुये कहा कि देश में भाजपा शासित राज्यों में लगातार हो रहे महिला यौन शोषण के मामलों के बावजूद उनकी चुप्पी देश की महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए घातक है।

उन्होंने प्रधानमंत्री के इस नारे पर कहा कि वह इसमें यह कहना भूल गए कि बेटी को भाजपा के नेताओं से बचाओ। इस संबंध में उन्होंने उत्तर प्रदेश और छतीसगढ में हुए महिला यौन शोषण और सामूहिक दुष्कर्म का हवाला देते हुए कहा कि इनमें भाजपा के विधायक का नाम उजागर हुआ है।

उन्होंने कहा कि यह किसी भी देश के प्रधानमंत्री के लिए शर्मनाक है कि विदेश यात्रा के दौरान किसी दूसरे देश के राष्ट्राध्यक्ष का यह कहना कि प्रधानमंत्री अपने देश में महिला की रक्षा नहीं कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सरकार का यह पहला कर्तव्य है कि वह महिला रक्षा, महिला सम्मान, किसान, दलित, पिछड़े एवं व्यापारियों के हितों की रक्षा में आगे आए ओर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वालों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करें।

उन्होंने उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की पीड़ा का जिक्र करते हुए कहा कि देश के इतिहास में यह पहली बार है कि उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों को मीडिया के सामने आकर न्याय की गुहार लगानी पड़ रही है और यह कहना पडा कि सरकार उन्हें काम नहीं करने दे रही है।