कांग्रेस के सत्ता में आने पर जीएसटी वापस लिया जाएगा : राहुल गांधी

Rahul promises uniform GST if UPA wins polls
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मैसुरु। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को कहा कि वर्ष 2019 के आम चुनाव में केंद्र में कांग्रेस नीत संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के सत्ता में आने पर वस्तु एवं सेवा कर के बहु स्तरीय कर ढांचे को वापस लेकर पूरे देश में एकसमान कर प्रणाली लागू की जाएगी।

गांधी ने यहां महारानी कला, विज्ञान एवं वाणिज्य महिला कॉलेज की छात्राओं के साथ बातचीत में कहा कि यदि हम सत्ता में आए तो 28 प्रतिशत के जीएसटी ढांचे को हटा देंगे। जीएसटी के तहत बहु स्तरीय ढांचे से भ्रष्टाचार की आशंका बलवती होती है और इसीलिए हम इसे ‘गब्बर सिंह टैक्स’ कहते हैं।

मेरा मानना है कि जीएसटी के तहत पांच प्रतिशत की कर प्रणाली अच्छा विचार है लेकिन इसके तहत 28 प्रतिशत कर व्यवस्था खराब विचार है। हम एकसमान कर चाहते हैं लेकिन भारतीय जनता पार्टी की सरकार ने बहु स्तरीय कर प्रणाली लागू कर दी जिसका हमने विरोध किया।

गांधी मैसुरु, मांड्या और चामराजनगर जिलों के दो दिवसीय दौरे पर हैं। उन्होंने कॉलेज परिसर में एक घंटे व्यतीत किए तथा छात्रों के सवालों के जवाब दिए। बातचीत खत्म होने के बाद श्री गांधी के साथ सेल्फी लेने के लिए छात्राआें का हुजूम एकत्र हो गया।

गांधी के साथ इस अवसर पर कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारामैया, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जी परमेश्वरा, लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे तथा पार्टी महासचिव और कर्नाटक मामलों के प्रभारी के सी वेणुगोपाल भी थे।

जब एक छात्र ने पूछा कि यदि कांग्रेस केंद्र में सत्ता में आयेगी तो क्या मौजूदा कर ढांचे को वापस लेगी तो गांधी ने कहा कि जीएसटी के तहत 28 प्रतिशत कर नहीं होगा।

नोटबंदी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में गांधी ने कहा कि इसने देश की अर्थव्यवस्था तथा राेजगार सृजन को भारी झटका दिया है। इस निर्णय से छोटे व्यवसाय बुरी तरह प्रभावित हुए। उन्होंने कहा कि इस बारे में वित्त मंत्री, प्रधानमंत्री के मुख्य आर्थिक सलाहकार तथा भारतीय रिजर्व बैंक के गर्वनर को अंधेरे में रखा गया। उन्होंने कहा कि मैं नोटबंदी के कदम से पूरी तरह असहमत हूं।

गांधी ने कहा कि जब पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को नोटबंदी के बारे में उनकी राय जानने के लिए बुलाया तो वह हंसने लगे। उन्होंने कहा कि जब मैंने इसके बारे में पूर्व प्रधानमंत्री और अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह से इसके बारे में उनके विचार जानने की कोशिश की तो वह स्तब्ध रह गए। यह खराब निर्णय था जिसको लेकर भारत ही नहीं बल्कि विदेशों के कई अर्थशास्त्रियों ने नकारात्मक राय दी। इससे देश की अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कालेधन से निपटने के लिए ‘विकेन्द्रीकृत’ उपाय अपनाने पर बल देते हुए कहा कि सरकार को इस संबंध में एकतरफा निर्णय लेने की बजाए देश के लोगों को एकसाथ विश्वास में लेना होगा। उन्होंने कहा कि इस लड़ाई में लोगों को शामिल करें। लोगों के कारण ही नीरव मोदी जैसे मामले सामने आ रहे हैं।