अजमेर उत्तर में निर्दलीय प्रत्याशी संदीप तंवर बिगाड सकते हैं समीकरण

अजमेर। राजस्थान चुनाव में अजमेर उत्तर से शिक्षा मंत्री वासुदेव देवनानी एवं दक्षिण से महिला एवं बाल विकास मंत्री अनिता भदेल का कांग्रेस प्रत्याशियों से सीधा मुकाबला होने के आसार है। निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं लेकिन वे फिलहाल टक्कर देने की स्थिति में नजर नहीं आ रहे।

अजमेर उत्तर से देवनानी एवं अजमेर दक्षिण से अनिता भदेल के सामने कांग्रेस के क्रमशः नए चेहरे महेंद्र सिंह रलावता एवं हेमंत भाटी चुनाव मैदान में है। हालांकि दोनों ही सीटों पर उम्मीदवारों को भीतरघात का सामना करना पड़ रहा हैं।

अजमेर उत्तर क्षेत्र में इस बार 2 लाख 6 हजार 313 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकेंगे। देवनानी पिछले तीन चुनाव जीतते आए है लेकिन इस बार उन्हें गैर सिंधी चेहरे के सामने कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है।

यहां पर पीने के पानी की बड़ी समस्या से जनता आहत है जहां तक विकास कार्यों का सवाल है, अजमेर उत्तर क्षेत्र में स्मार्ट सिटी योजना के साथ ह्रदय, अमृत, प्रसाद योजना के तहत काम हुए है जिसे देवनानी अपने खाते में भुनाने की कोशिश में लगे है।

देवनानी को ब्राह्मण समाज से भी नाराजगी का नुकसान होने की संभावना है। जिसे कांग्रेस प्रत्याशी महेंद्र सिंह रलावता पूरी तरह भुनाने में लगे है। बदमाश आनंदपाल एनकाउंटर के बाद उनकी मां ने सभी राजपूतों से अपील कर रलावता को समर्थन देने की अपील की है।

इस बार बीजेपी का परंपरागत वोट बैंक माना जाने वाला माली समाज चुप्पी साधे हैं। जिले में एक मात्र माली समाज से निर्दलीय प्रत्याशी संदीप तंवर ने ताल ठोंक दी है। वे माली समाज के वोट बैंक सेंध लगाने में सफल रहे तो बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशी को नुकसान उठाना पड सकता है।

अजमेर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में इस बार 2 लाख 2 हजार 276 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे। भदेल को कांग्रेस के हेमंत भाटी के साथ एकबार फिर मुकाबला करना पड़ रहा है। कोली, माली एवं रैगर बहुल इस क्षेत्र में दोनों के बीच कड़ा मुकाबला होने के आसार है। हालांकि यहां कांग्रेस के बागी निर्दलीय डॉ. राकेश सिवासिया कांग्रेस प्रत्याशी को कुछ नुकसान पहुंचा सकते हैं।

कांग्रेस के दोनों उम्मीदवार युवा चेहरों के रूप में सामने है। अजमेर उत्तर से रलावता पहली बार नए चेहरे के रूप में मौजूद है तो अजमेर दक्षिण में हेमंत भाटी पुराना चेहरा है जो भदेल के विरुद्ध 2013 में पराजित हो चुके है। लेकिन बीढ़ी उद्योगपति होने के कारण विभिन्न समाजों में उनका चेहरा जाना पहचाना है।