राजस्थान में टिकट वितरण के बाद जोर पकड़ेगा चुनावी दंगल

जयपुर। राजस्थान में आगामी सात दिसम्बर को होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी एवं प्रमुख विपक्ष कांग्रेस द्वारा अपने प्रत्याशियों के टिकट वितरण को लेकर मंथन जारी रहने से फिलहाल चुनाव दंगल जोर नहीं पकड़ पा रहा हैं।

चुनाव के लिए नामांकन भरने की प्रक्रिया 12 नवंबर से शुरु होने वाली हैं लेकिन अभी इन दोनों प्रमुख दलों के प्रत्याशियों के नामों की पहली सूची भी जारी नहीं हुई हैं। हालांकि आम आदमी पार्टी ने अब तक 82 तथा बहुजन समाज पार्टी 17 तथा कुछ अन्य दलों ने अपने कुछ प्रत्याशियों के नामों की घोषणाा कर चुके हैं लेकिन राज्य में चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा एवं कांग्रेस में ही होने की संभावना के कारण जब तक प्रमुख दोनों दलों के उम्मीदवारों के नाम सामने नहीं आ जाते तब तक चुनावी प्रचार जोर नहीं पकड़ पा रहा हैं।

भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट वितरण को लेकर कई दौर की माथामच्ची के बाद अब अंतिम दौर की बैठकें की जा रही हैं और अब कभी भी प्रत्याशियों की पहली सूची जारी होने की संभावना हैं। इसके बाद चुनाव को लेकर जनसभाओं तथा अन्य माध्यमों से चुनाव प्रचार परवान चढ़ने लगेगा।

चुनाव को लेकर भाजपा के पक्ष में प्रचार के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगले पखवाड़े में चुनावी सभाएं शुरु होने की संभावना हैं और इसमें 27 नवंबर को नागौर और कोटा आने का कार्यक्रम प्रस्तावित हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का भी राज्य में कई चुनावी सभाओं को संबोधित करने का कार्यक्रम बताया जा रहा हैं।

इसी तरह कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी राजस्थान का दौरा कर कई चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। इनमें मुख्यमंत्री वसुुंधरा राजे के निर्वाचन जिला झालावाड़, शेखावाटी क्षेत्र, जोधपुर तथा सीमांत बाड़मेर जिले में कई जनसभाएं करने की संभावना हैं।

राज्य में इस बार चुनाव में अब तक भाजपा और कांग्रेस में एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का दौर ज्यादा चला हैं। इस दौरान भाजपा ने गौरव यात्रा निकालकर राज्य सरकार की उपलब्धियां तथा विकास कार्यों को जनता के सामने रखे तथा पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यों से अपने कार्यों की तुलना की वहीं कांग्रेस ने संकल्प रैली निकालकर अपने कार्यों के बखान के साथ भाजपा को किसान एवं युवा विरोधी बताते हुए उस पर राज्य में भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी बढ़ाने तथा कानून व्यवस्था चौपट कर देने का आरोप लगाया हैं। अन्य दल इन दोनों दलों को नकारा बताते हुए इनके खिलाफ प्रचार कर रहे हैं।

इस बार चुनाव में राष्ट्रीय मुद्दे में कांग्रेस लड़ाकू विमान राफेल सौदे के मामले को खूब उछाल रही हैं और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाते हुए इस बारे में जवाब देने की मांग कर रही हैं। इसी तरह नोटबंदी एवं वस्तु सेवा कर के मुद्दों का सहारा भी लिया जा रहा हैं।

नोटबंदी की दूसरी सालगिरह पर शुक्रवार को कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन भी किया। इस बार राममंदिर का मुद्दा इतना जोरशोर से तो नहीं उठ रहा हैं लेकिन इसे लेकर एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप लगाये जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया 12 नवंबर से शुरु हो जाएगी और सात दिसम्बर को मतदान होगा जबकि ग्यारह दिसम्बर को मतगणना होगी।