राजस्थान में तीसरा माेर्चा नहीं, लेकिन कई सीटों पर बड़े दलों को मुश्किल

जयपुर। राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और भाजपा के सामने तीसरा मोर्चा नहीं बन पाया लेकिन कई सीटों पर छोटे मोटे दलों ने मुकाबले को त्रिकोणात्मक बना दिया है।

प्रदेश में राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी, भारत वाहिनी एवं आम आदमी पार्टी ,बहुजन समाज पार्टी और कम्युनिस्ट दल एक होकर तीसरे मोर्चे की शक्ल नहीं दे पाए लेकिन उनके कई उम्मीदवार कांग्रेस और भाजपा को कड़ी टक्कर दे सकते हैं। भारत वाहिनी ने 75 बसपा ने 198 और राष्ट्रवादी पार्टी ने 68 प्रत्याशी चुनाव मैदान में उतारे है।

नामांकन वापस लेने की तारीख आज है तथा दोपहर तीन बजे बाद ही सही तस्वीर आएगी लेकिन मौजूदा हालात में मुकाबला त्रिकोणात्मक के साथ चतुष्काेणीय दिखाई दे रहा है। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने जाट बाहुल्य स्थानों पर कांग्रेस और भाजपा को पसीनें लाने की स्थिति में खड़ा कर दिया है।

किसान आंदोलन के जरिए नागौर,सीकर, बाड़मेर, जोधपुर जिलों में पहले से ही जमीन मजबूत कर इस दल ने दोनों प्रमुख दलों के टिकट से वंचित रहे नेताओं को भी उम्मीदवार बनाकर स्थिति मजबूत की है।

इस पार्टी के नेता हनुमान बेनीवाल ने एक बार कांग्रेस और एक बार भाजपा को सत्ता देने की परम्परा पर भी जोरदार चोट करते हुए कहा है कि इससे भ्रष्टाचार पनप रहा है तथा दोनों एक दूसरे को बचा लेते है। बेनीवाल ने पार्टी का प्रचार प्रसार करने के लिए खेल तथा फिल्मों में जाट समुदाय की बड़ी हस्तियों को बुलाकर अपनी स्थिति और मजबूत करने का प्रयास कर रहे है।

इसी पार्टी की टिकट पर कांग्रेस के पूर्व विधायक रमेश खंडेलवाल, कांग्रेस की नेता प्रतिभा सिंह सहित कई उम्मीदवार मैदान में है। भारत वाहिनी पार्टी ने भी भाजपा से नाराज नेताओं को जोड़ने का प्रयास किया है। इस पार्टी के कर्ताधर्ता घनश्याम तिवाड़ी ने राष्ट्रवादी पार्टी से समझौता कर चुनाव में ताकत दिखाने का प्रयास किया है।

तिवाड़ी स्वयं सांगानेर से चुनाव लड़ रहे हैं तथा भाजपा की टिकट से वंचित रहे विधायक किसनाराम नाइक तथा सिकराय से विधायक गीता वर्मा सहित कई नेताओं को चुनाव मैदान में उतारकर प्रमुख दलों को शिकस्त देने का प्रयास किया है। बहुजन समाज पार्टी ने राष्ट्रवादी पार्टी के विधायक नवीन पिलानिया को आमेर से खड़ा किया है।

इसके अलावा सूरतगढ़ में पिछले चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे डूंगरराम गेदर तथा किशनगढ़बास से दीपचंद खेरिया को उम्मीदवार बनाया है। इसी तरह बसपा ने सूरजगढ़ से कर्मवीर यादव, पिलानी से जया कटारिया तथा खेतड़ी से पूरणमल सैनी को उम्मीदवार बनाया है। सैनी ने पिछला चुनाव बसपा के टिकट पर ही जीता था।

सादुलपुर से बसपा विधायक मनोज न्यागली फिर अपना भाग्य आजमा रहे हैं। कम्युनिस्ट पार्टी आफॅ इंडिया तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने छोटे मोटे दलों के साथ मोर्चा बनाया है, लेकिन गंगानगर, सीकर, झुंझुनूं तथा आदिवासी क्षेत्रों में ही कुछ सीटों पर इनका प्रभाव माना जा रहा है।

मार्क्सवादी पार्टी के नेता अमराराम दातारामगढ़ से चुनाव मैदान में है। पिछली बार वह तीसरे स्थान पर रहे थे। माकपा के पूर्व विधायक पेमाराम भी धोद विधानसभा से चुनाव मैदान में है। कई दिग्गज नेताओं ने पार्टी का टिकट कटने के बाद दूसरे दल का सहारा नहीं लिया तथा निर्दलीय चुनाव मैदान में है।

इनमें वसुंधरा सरकार में मंत्री राजकुमार रिणवा रतनगढ़ से हेम सिंह भडाना, थानागाजी से धनसिंह रावत बांसवाड़ा से विधायक अनिता कटारा सागवाड़ा से नवनीत लाल निनामा घाटोल से तथा कांग्रेस के पूर्व विधायक महादेव सिंह खंडेला के साथ वसुंधरा सरकार में मंत्री सुरेन्द्र गोयल जैतारण से शामिल है।