वसुंधरा राजे से लोगों की नाराजगी पड़ सकती है भाजपा पर भारी

rajasthan assembly elections 2018 :  Vasundhara raje govt facing anger of people
rajasthan assembly elections 2018 : Vasundhara raje govt facing anger of people

जयपुर। राजस्थान में सत्ता विरोधी लहर का सामना कर रही भारतीय जनता पार्टी के लिए ज्वलंत मुद्दों पर सरकार की कथित विफलता और मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से लोगों की नाराजगी के बीच अपना गढ़ बचाना बड़ी चुनौती है।

राज्य के स्तर पर लोगों की नाराजगी किसानों की समस्या, सरकारी कर्मचारियों की अनदेखी, सरकार की वादा खिलाफी, महंगाई, बेरोजगारी, बजरी की किल्लत, सरकारी कामों के लिए रिश्वत देने, निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी और मुख्यमंत्री के रवैये को लेकर है।

साथ ही वे अनुसूचित जाति और जनजाति अधिनियम पर मोदी सरकार के रुख से खासे खफा हैं। काम धंधे वाले लोग नोटबन्दी और जीएसटी जैसे मुद्दों को लेकर भी नाराज हैं।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से लोगों की नाराजगी केवल शहरों तक ही सीमित नहीं है, गांव के लोग भी उनके खिलाफ लामबंद हैं और आलम यह है कि जहां शहर के लोग कह रहे हैं, मोदी से बैर नहीं, वसुंधरा की खैर नहीं, वहीं गांव के लोग कह रहे हैं, इस परमेसरी (वसुंधरा राजे) को तो हराना से।

राजधानी जयपुर में सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी बीएस शर्मा का कहना है कि पार्टी सत्ता में आने से पहले के वादों को निभाने में तो विफल रही है, उस पर मुख्यमंत्री का रवैया एक तो करेला दूजा नीम चढ़ा जैसा है। उन्होंने कहा कि एक तो मुख्यमंत्री तक लोगों की पहुंच नहीं है, दूसरे वह समस्याओं का समाधान कागजों पर करने में ज्यादा विश्वास रखती हैं।

अजमेर जिले की जसाखेडी ढाणी से अपनी समस्या लेकर आए किसान प्रताप सिंह का कहना है कि मुख्यमंत्री ने किसानों की समस्याओं से आंख मूंद रखी हैं। किसानों को अपनी जरूरतें पूरी करने के लिए रोज लड़ाई लड़नी पड़ रही है। उनके शब्दों में खेती अब गुजारे का धंधा नहीं रहा। पानी और बिजली की किल्लत बड़ी समस्या है और मेहनत के बावजूद फसलों का मुनासिब दाम नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि गांवों के लोगों ने ठान लिया है कि इस परमेसरी (वसुंधरा राजे) को तो हराना से।

प्रॉपर्टी और आभूषण के काम से जुड़े लोग भी सरकार की नोटबंदी के निर्णय से लगे झटके से अब तक नहीं उबर पाए हैं। उनका कहना है कि नकदी का प्रवाह नहीं होने से उनका धंधा बैठ गया है।

ग्रेजुएशन के बाद नौकरी के लिए कोचिंग संस्थान में परीक्षाओं की तैयारी कर रहे तुलसीराम नायक का कहना है कि राज्य सरकार में नौकरी की बात करना बेमानी है। केन्द्र में भी पेपर पास करने और नियुक्ति पत्र मिलने के बाद भी ज्वाइनिंग के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। उन्होंने निजी शिक्षण संस्थानों की मनमानी पर नकेल नहीं लगाने पर भी सरकार की आलोचना की।

टेम्पो चालक लतीफ खान ने कहा कि भाजपा सरकार ने निचले तबकों की कमर तोड़ दी है। केवल एक योजना भामाशाह स्वास्थ्य योजना से ही उन लोगों को थोड़ी राहत मिली है। जयपुर में कभी लाखा की ढाणी के नाम से मशहूर रही जगह लाल कोठी और आस पास के अरविंद पार्क जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों ने साफ सफाई की कमी और चुनाव के समय के वादे पूरे नहीं करने पर सरकार को कठघरे में खडा किया।

कुछ लोगों ने स्थानीय नेताओं पर आरोप लगाया कि वह उनके मकानों को नियमित करने का वादा तो हर बार करते हैं लेकिन पिछले 12 वर्षोंं से उन्हें झूठे वादे ही मिले हैं। इन लोगाें का कहना है कि मुख्यमंत्री से मिलना ही मुश्किल है और यदि मुलाकात हो जाये तो वह बातों पर गौर नहीं करतीं।

राज्य परिवहन निगम से सेवानिवृत्त रामपाल ने कहा कि कर्मचारी वर्ग सरकार के पूरी तरह खिलाफ है। उन्हें अवकाश ग्रहण किए हुए तीन साल हो गए लेकिन अब तक ग्रेच्युटी नहीं मिली है। परिवहन निगम सहित राज्य सरकार के 108 विभागों के कर्मचारी एक महीने से हड़ताल पर थे और अादर्श आचार संहिता लागू होने के बाद ही उन्होंने हड़ताल खत्म की है।

जोधपुर जिले से राजधानी आए रामपफल का कहना है कि भाजपा वोट सवर्णों से मांगती है और उन पर ही मुकदमे भी दर्ज करा रही है। उन्होंने एससी एसटी एक्ट पर मोदी सरकार के रुख की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि भाजपा को इसका नुकसान झेलना पड़ेगा।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने राज्य में प्रचार अभियान के लिए रथ रवाना करते हुए दावा किया कि है कि राज्य में पार्टी की स्थिति अच्छी है और अब उनकी पार्टी राज्य में 50 साल राज करेगी। पार्टी अघ्यक्ष अमित शाह ने भी कहा है कि राज्य में सत्ता विरोधी लहर नहीं है और उनकी पार्टी राज्य में हर चुनाव में सरकार बदलने की परंपरा तोड़ेगी लेकिन सारा दारोमदार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की रैलियों पर होगा।

यह देखने की बात होगी कि अपनी भाषण शैली से वह लोगों की नाराजगी को कितना दूर कर पाते हैं और यदि वह सफल नहीं रहते हैं तो मुख्यमंत्री के प्रति लोगों की नाराजगी इन चुनावों में भाजपा पर भारी पड़ सकती है।