गहलोत अपनी विफलता केन्द्र पर डालने की बजाय प्रदेश में लोगों की सुरक्षा करे सुनिश्चत : सतीश पूनियां

जयपुर। राजस्थान के भारतीय जनता पार्टी प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनियां ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर दिए बयान पर पलटवार करते हुए कहा है कि राज्य की कानून व्यवस्था संभालने में विफल अशोक गहलोत को अपनी सरकार की विफलताओं का ठीकरा केन्द्र पर डालने की बजाय राज्य की कानून व्यवस्था को मजबूत, कहीं भी दंगे और हिंसा ना भड़के और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहिए।

डा पूनियां ने आज अपने बयान में यह बात कही। उन्होंने कहा कि गहलोत को करौली हिंसा के दोषियों को सख्त सजा और पीड़ितों को न्याय एवं आर्थिक मुआवजा मिले, सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वह जिस चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना का बडा गुणगान कर रहे हैं उसका प्रदेश के लोगों को सही फायदा मिले।

उन्होंने कहा कि लेकिन राज्य की कांग्रेस सरकार की अनदेखी के चलते चिरंजीवी स्वास्थ्य योजना का हालात यह हैं कि आमजन को दवाइयां अस्पतालों के बाहर से खरीदकर लानी पड़ रही हैं, यह बात लोगों ने स्वयं मुख्यमंत्री से सवाई मान सिंह अस्पताल में कही कि सभी दवाइयां बाहर से लानी पड़ रही हैं।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद गहलोत अपनी सरकार की विफलताओं का ठीकरा केन्द्र सरकार पर डाल रहे है जो हास्यास्पद है, वह यह स्वीकार करने को तैयार क्यों नहीं है कि उनकी सरकार के संरक्षण में हिंसा और दंगे हो रहे हैं।

हाल में करौली हिंसा का पूरा प्रदेश और देश गवाह है कि कांग्रेस शासन में बहुसंख्यक हिंदुओं पर सुनियोजित साजिश के तहत हमला किया गया। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि देेश में जाति, पंथ, मज़हब और वोट बैंक की राजनीति की जनक कांग्रेस है, तुष्टिकरण की राजनीति शुरूआत से ही कांग्रेस ही करती है और करौली हिंसा की घटना भी कांग्रेस की तुष्टीकरण की राजनीति का ही नतीजा है।

डॉ. पूनियां ने कहा कि राजस्थान में अंतिम सांसें गिन रही कांग्रेस को बचाने और लचर शासन के कारण उत्पन्न जनाक्रोश से गहलोत की नींद उड़ गई हैं। उन्होंने कहा कि झूठी सहानुभूति बटोरने की कोशिश वाले इन बयानों से गहलोत को कुछ हासिल नहीं होगा, प्रदेश की जनता गहलोत और कांग्रेस की हक़ीक़त को जान चुके हैं। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी में नई पीढ़ी उनके समक्ष चुनौती बनकर खड़ी है और वे सच को स्वीकार नहीं करना चाह रहे और ना ही नए नेतृत्व को उभरने देना चाह रहे, जिसकी सबसे बडी वजह कांग्रेस का परिवारवाद है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की सरकार अपनी कमजोरी से गिर रही थी लेकिन गहलोत यह आरोप भाजपा पर लगा रहे हैं, भाजपा के केंद्रीय नेताओं पर सरकार गिराने के झूठे आरोप लगाना गहलोत की नैतिक पराजय है।

डॉ. पूनियां ने सवाल करते हुए कहा कि गहलोत बताएं कि भारत का विभाजन, कश्मीर, सिख नरसंहार इन सबका दोषी क्या कांग्रेस नहीं है। अपनी सरकार की नाकामियों से ध्यान भटकाने के लिए मुख्यमंत्री बार-बार केंद्र सरकार पर झूठे आरोप लगाते हैं, मुख्यमंत्री यह क्यों नहीं कहते कि प्रदेश की कानून व्यवस्था उनसे नहीं संभल रही। उन्होंने कहा कि नहीं संभल पा रहा है तो गहलोत को कुर्सी छोड़ देनी चाहिए।