राजस्थान बोर्ड के दीक्षांत समारोह में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को मिले मैडल

rajasthan board of secondary education convocation ceremony 2018

अजमेर। जीवन की शिक्षा कभी समाप्त नहीं होती, हर बार एक पडाव पूरा होता है। शैक्षणिक रूप से बढना भी एक पडाव की तरह है। जीवन की सफलता की सार्थकता न हो जाए तब तक आगे बढते जाने की आदत डालें। ये बात रूक्टा के महासचिव डॉ नारायण लाल गुप्ता ने मेघावी छात्र छात्राओं और सर्वश्रेष्ठ शिक्षकों को संबोधित करते हुए कही।

गुप्ता गुरुवार को माध्यमिक शिक्षा बोर्ड अजमेर में परीक्षाओं में स्वर्ण एवं रजत पदक प्राप्त विद्यार्थियों के सम्मानार्थ आयोजित दीक्षांत समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि लक्ष्य तो हमें कोई बता देगा लेकिन उसे पाने के लिए दूरी खुद तय करनी होती है। उन्होंने श्रेष्ठ विद्यार्थियों से कहा कि इस सफलता के बाद भी बहुत आगे बढना है। लेकिन साथ ही यह भी सदैव याद रखें कि हमारी सफलता सिर्फ हमारी नहीं बल्कि इसमें माता पिता, गुरुजनों, मित्रों समेेत बहुतेरे लोगों की भी भूमिका होती है।

सफलता का मार्ग परस्पर निर्भरता से होकर गुजरता है। इसलिए जब भी लगे की लक्ष्य तय हो गया तो उसे व्यापक सोच वाला बनाएं। उसमें सर्वहित का समावेश हो। पद प्रतिष्ठा तो उपाधि मूल्य की तरह हैं जो पद से मुक्त हो जाने के बाद समाप्त हो जाते हैं क्योंकि इस देश में पद को नहीं बल्कि शास्वत गुणों को पूजा जाता है। इसलिए आंतरिक मूल्यों को जीवन में अपनाएं, ये कभी न समाप्त होने वाली वस्तु है।

उन्होंने विद्यार्थियों को आहवान किया कि जीवन में संकल्प और इरादे मजबूत रखेंगे तो कुछ भी असंभव नहीं लगेगा। सफलता पाने के लिए शॉर्ट कट से बचें। एकाग्रता और धैर्य के साथ लक्ष्य को केन्द्रीत कर बढते जाने का भाव अपने भीतर रखने से कुछ भी कठिन प्रतीत नहीं होगा।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने बोर्ड प्रशासन का प्रशंसा करते हुए कि यहां के कर्मचारी और अधिकारी बधाई के पात्र हैं जिनके परिश्रम और मेहनत का परिणाम है कि एक भी पर्चा आउट नहीं हुआ। समय पर परीक्षा परिणाम जैसी चुनौती भी सहज लेते हैं और अन्य राज्यों के शिक्षा बोर्डों से कहीं अधिक समयबद्ध तरीके से काम हो जाता है।

कटारिया ने बोर्ड से गुजारिश की कि सरकारी स्कूलों में गरीब परिवारों के बच्चे शिक्षा के लिए आते हैं, उनमें भी 60 प्रतिशत से अधिक बालिकाओं का शैक्षिक प्रदर्शन बालकों से कहीं बेहतर होता है। ऐसी बालिकाओं केे लिए बोर्ड की तरफ से छह माह की कोचिंग व्यवस्था हो जाए तो उनके टेलेंट को और निखारा जा सकता है। हमारा लक्ष्य हर प्रतिभाशाली को तराशे जाना होना चाहिए। उन्होंने अच्छे का सम्मान होना ही चाहिए, खूब मन लगाकर पढाई कर मैडल हासिल करने वाले विद्यार्थियों को उन्होंने बधाई दी।

हर गांव के स्कूल में पर्याप्त अध्यापक हों, अच्छा स्कूल भवन हो इसके लिए शिक्षा विभाग पूरी कवायद में जुटा है। विवेकानंद और आदर्श स्कूल के रूप में सरकार के नवाचारों का परिणाम है कि सरकारी स्कूल अब निजी स्कूलों को पछाड रहे हैं।

समारोह की अध्यक्षता कर रहे शिक्षा राज्यमंत्री वासुदेव देवनानी ने विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा पूरी कर सिर्फ पैकेज के आंकडों में उलझ जाना शिक्षा का अंतिम लक्ष्य नहीं है। देश और समाज के लिए अपनी प्रतिभा का उपयोग करना भी दायित्व है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई कि शिक्षा के क्षेत्र में राजस्थान प्रदेश अब 26वे स्थान से दूसरे स्थान पर आ गया है। उन्होंने कहा शिक्षा के क्षेत्र में नवाचारों का सिलसिला द्रुत गति से चल रहा है। राजस्थान के 7 हजार स्कूलों में कंप्यूटर लैब स्थापित की गई है। हर बच्चे को अच्छी शिक्षा मिले इसके लिए प्रयासों में कोई कोर कसर नहीं छोडी जा रही।

प्रदेश में शिक्षा का स्तर बढने का ही परिणाम है कि इस बार एक लाख 86 हजार बच्चियों ने गार्गी पुरूस्कार जीता, सरकार ने स्कूटी योजना की शुरुआत की है। विद्यार्थियों के विदेश पढने भेजने के लिए भी सरकार योजना बना रही है। उन्होंने भरोसा दिलाया की शिक्षक भर्ती पूर्ण हो जाने पर प्रदेश के किसी भी स्कूल में शिक्षक का एक भी पद​ रिक्त नहीं रहेगा।

बोर्ड अध्यक्ष बीएल चौधरी, बोर्ड सचिव मेघना ने भी आगंतुक विद्यार्थियों, अध्यापकों तथा अभिभावकों का बोर्ड की ओर से स्वागत किया।

250 विद्यार्थियों को पदक, माधवी को शिक्षा रत्न सम्मान

समारोह के दौरान कुल 250 छात्र छात्राओं को पदक प्रदान किए गए। वर्ष 2016 में चुनाव के कारण बोर्ड दीक्षांत समारोह का आयोजन नहीं कर सका ऐसे में वंचित रहे विद्यार्थियों को भी 2017 के विद्यार्थियों के साथ स्वर्ण और रजत पदक प्रदान​ किए गए।

इस मौके पर बोर्ड की ओर से शिक्षा रत्न सम्मान डॉ माधवी त्रिपाठी को प्रदान किया गया। सम्मान के साथ एक लाख रुपए राशि का चैक भी सौंपा गया। इसी तरह विद्यार्थी खेल रत्न एथलीट सोनल सुखवाल को 50 हजार रुपए की राशि के चैक के साथ प्रदान किया गया।

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