नए महाविद्यालयों में अन्ततः पद स्वीकृत, सोसाइटी के अंतर्गत संचालन का विरोध

अजमेर। मुख्यमंत्री द्वारा वर्ष 2020-21 की बजट घोषणा की अनुपालना में खोले गए 37 नवीन महाविद्यालयों, इसी सत्र में स्नातक से स्नातकोत्तर में क्रमोन्नत महाविद्यालयों तथा नवीन विषय और संकाय खोलने के एवज में राज्य सरकार द्वारा अंततः शैक्षणिक एवं अशैक्षणिक कैडर के 985 पद सृजित कर दिए गए हैं। किन्तु इन पदों को राजमेस सोसाइटी की तर्ज पर प्रस्तावित सोसाइटी के अधीन करने का रुक्टा (राष्ट्रीय) ने विरोध किया है।

इस विषय में जानकारी देते हुए संगठन के महामंत्री डॉ सुशील कुमार बिस्सू ने बताया कि राजस्थान सरकार ने 2020-21 की बजट घोषणा की अनुपालना में 5 अगस्त, 2020 को 37 नए महाविद्यालय खोलने तथा 6 अगस्त, 2020 को कुछ महाविद्यालयों में स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर पर नए विषय खोलने तथा स्नातक महाविद्यालयों को स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में क्रमोन्नत करने संबंधी आदेश जारी किए थे।

इन आदेशों में साफ लिखा गया कि इन नए महाविद्यालयों के लिए किसी तरह के शैक्षणिक अथवा अशैक्षणिक पद की स्वीकृति इस वित्तीय वर्ष में या भविष्य में नहीं दी जाएगी, न ही भवन निर्माण या रिपेयर, फर्नीचर, बिजली पानी, ऑफिस व्यय आदि के लिए कोई राशि दी जाएगी।

इन प्रावधानों को राज्य की उच्च शिक्षा के व्यापक हितों की घोर उपेक्षा तथा न केवल वर्तमान अपितु भविष्य के लिए भी उच्च शिक्षा के पूरे ढांचे को ध्वस्त करने वाले मानते हुए शिक्षक संगठन रुक्टा (राष्ट्रीय) ने इन प्रावधानों और शर्तों का विभिन्न प्रिन्ट व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया माध्यमों से विरोध किया तथा जनप्रतिनिधियों के माध्यम से इस विषय को विभिन्न मंचों पर उठाया और मुख्यमंत्री तथा उच्च शिक्षा मंत्री से समुचित संख्या में पद सर्जन एवं अन्य ढांचागत सुविधाओं की वित्तीय स्वीकृति जारी करने की मांग की।

संगठन की तर्क संगत मांगों पर कार्यवाही करते हुए 8 सितम्बर 2021 को राज्य सरकार ने इन महाविद्यालयों के लिए शैक्षणिक और अशैक्षणिक वर्ग में नवीन पद सृजित किए हैं किन्तु मेडीकल कॉलेजेज के लिए गठित राजमेस सोसाइटी की तर्ज पर सोसाइटी के माध्यम से इन नए महाविद्यालयों के संचालन के लिए प्रावधान किए है।

संगठन नवीन पद सृजित करने के लिए राज्य सरकार का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त करता है लेकिन सोसाइटी द्वारा इन महाविद्यालयों के संचालन का विरोध करता है तथा नवीन महाविद्यालयों को सोसाइटी के अधीन संचालित करने के निर्णय को वापस लेने की मांग करता है।

डॉ बिस्सू ने बताया कि इन महाविद्यालयों को मेडिकल कॉलेजेज की तर्ज पर सोसाइटी द्वारा संचालित करने की सरकार की मंशा अव्यावहारिक और उच्च शिक्षा के प्रसार में बाधक है। मेडिकल कॉलेज की प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष फीस लगभग 7.5 लाख रुपए होती है, जिससे मेडिकल कॉलेज का संचालन सम्भव है।

किन्तु अधिकांश नवीन राजकीय महाविद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में खोले गए हैं, जिनमें प्रति विद्यार्थी प्रतिवर्ष फीस लगभग मात्र एक हजार रुपए होती है। जमीनी हालात यह हैं कि यह एक हजार रुपए भी अनेक विद्यार्थी वहन नहीं कर सकते हैं। ऐसे में फीस वृद्धि का तो प्रश्न ही नहीं उठता, फिर सोसाइटी द्वारा कैसे संचालित हो सकेंगे?

संगठन अध्यक्ष डॉ दीपक कुमार शर्मा ने बताया कि राजकीय महाविद्यालयों का संचालन सोसाइटी के अधीन करने से ना तो इन महविद्यालयों के संचालन की समुचित वित्तीय व्यवस्था संभव होगी, ना ही ये महाविद्यालय UGC मापदंडो को पूरा कर पाएंगे।

राज्य सरकार ने नवीन महाविद्यालयों का संचालन सोसाइटी के अधीन करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय राज्य में उच्च शिक्षा को पतन की ओर ले जाने वाला होगा, जिसका संगठन विरोध करता है एवं इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग करता है। संगठन ने आशा व्यक्त की है कि इस संबंध में सकारात्मक कार्रवाई की जाकर राज्य की उच्चशिक्षा एवं उसके हितधारकों के पक्ष में निर्णय लिया जाएगा।