राजयोग : यहीं तो है खुशनुमा जिंदगी जीने की कला

अजमेर। स्वयं को जानना ही राजयोग है। परमात्मा ज्योतिर्बिन्दु स्वरूप है। हम सभी आत्माएं उसी परमात्मा की संतान हैं। हमारे शरीर, नाम, धर्म अलग-अलग हैं लेकिन असल में हम आत्मा हैं, एक ही परमात्मा का अंश है। ये बात प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, शाखा नवाब का बेड़ा के तत्त्वावधान में यहां आजाद पार्क में चल रहे हेल्थ वेल्थ हैप्पीनेस आध्यात्मिक मेले के बीच चल रहे राजयोग शिविर में माउंट आबू से आईं बीके आशा बहन ने कहीं।

उन्होंने कहा कि मन की एकाग्रता, मन को शांत रखने की कला, मन को कंट्रोल करने का फार्मूला, जीवन को सही दिशा, जीव को परमात्मा के साथ जोडने, एकाग्रता से मन और शरीर की बीमारियों के निराकरण का उपाय राजयोग में है। राजयोग का उल्लेख भगवत गीता में अलग अलग नामों से मिलता है। कर्मयोग, समाधि, ज्ञान योग, भक्ति योग इसी का रूप है।

हम राजयोग ​के जरिए राजा का राजा बन सकते हैं, यानी अपनी इंद्रियों पर शासन करने की कला राजयोग से सीखने को मिलती है। नित्य राजयोग करने से जीवन में व्याप्त समस्त समस्याओं का समाधान होता है, योग से मनोबल बढता है।

बतादेंकि हेल्थ वेल्थ हैप्पीनेस आध्यात्मिक मेले में वैल्यू गेम की बात हो या फिर मेडिटेशन की प्रेरणा, या फिर सुंदर स्वर्ग की झलक। अलग अलग पांडालों में जीवन का नया पाठ पढ़ाया जा रहा है। खासकर खुशनुमा जिंदगी जीने की कला विषयक राजयोग का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है। यह शिविर 1 मार्च तक प्रतिदिन तीन पारियों में होता है। सुबह 6:30 से 7:30, 11 बजे से 12 बजे और शाम 7 बजे से 8 बजे तक इसमें भाग लिया जा सकता है।

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