84 लाख बार राम नाम का हस्तलेखन करने वाले साधकों का सम्मान

अजमेर। अजमेर के आजाद पार्क में अयोजित 54 अरब हस्तलिखित श्रीराम नाम महामंत्रों की परिक्रमा के दौरान श्रीरामनाम धन संग्रह बैंक अजमेर की ओर से 84 लाख बार राम नाम का हस्तलेखन करने वाले साधकों का सम्मान भी किया जा रहा है।

सोमवार को सत्यप्रकाश यादव, विजय यादव, रामगोपाल सतरावला, बुद्धालाल सुनारिवाल, मगनदेवी बंसल एवं मंजू देवी का बहुमान किया गया। ऐसे साधकों को संस्था की ओर से श्रीफल, श्रीफल भेंट कर तथा शॉल ओढाया गया। संस्था के साथ करीब 32 हजार साधक प्रत्यक्ष रूप से जुडकर रामनाम लेखन कर रहे हैं। साधकों की संख्या दिन प्रतिदिन बढती जा रही है।

परिक्रमा स्थल पर रामनाम लेखन का संकल्प

परिक्रमा स्थल पर ही राम नाम महामंत्र की 11 आसनों पर साधना एवं लेखन की विशेष व्यवस्था की गई है। रामनाम लेखन में रुचि रखने वाले साधकों को रिक्त पुस्तिकाएं मुहैया कराई जा रही है। पूर्णरूप से भरी पुस्तिओं को भी जमा करने की व्यवस्था भी की गई है। इस लेखन के रजिस्ट्रेशन के लिए बालकिशन पुरोहित, रामसिंह चौहान, लक्ष्मण शर्मा, विजय शर्मा से संपर्क कर सकते हैं।

84 लाख राम नाम का हस्तलेखन कर निहाल हुए ये साधक

विष्णुहिल टाउन अजमेर निवासी 72 वर्षीय सत्यप्रकाश यादव और 69 वर्षीय श्रीमती विजय यादव ने एक साथ राम नाम लेखन शुरू किया। दोनों पति पत्नी ने एक साथ ही 84 लाख रामनाम लेखन पूर्ण किया। यादव दंपती ने 20 जून 2009 से राम नाम लेखन शुरू किया था। 28 फरवरी 20016 को 84 लाख राम नाम का लेखन पूर्ण हो गया। इस दंपती को साल 2009 में एक बार राम नाम परिक्रमा में आने का मौका मिला था बस तब से राम नाम लेखन की लगन लग गई।

कुचील के रहने वाले 76 वर्षीय बुद्धालाल सुनारिवाल राम नाम बैंक से बरसों से जुडे हुए हैं। इनका कहना है कि नौकरी के दौरान पैर दर्द रहता था, काफी परेशान रहे। इसी बीच किसी ने बताया कि बताया कि राम नाम बैंक जाओ वहां उपचार के लिए स्वास्थ्य केन्द्र भी संचालित है। दर्द के निवारण के लिए पहुंचा। उन्होंने राम नाम लिखने को कहा और राम नाम लेखन शुरू कर दिया। हर दिन कभी एक पेज तो कभी दो पेज लिखा करता था। कब 84 लाख राम नाम परे हो गए पता ही नहीं चला।

जोंसगंज अजमेर के निवासी 76 वर्षीय रामगोपाल सतरावला ने भी 84 लाख राम नामों का हस्तलेखन किया है। वे सन 1990 से राम नाम लेखन कर रहे हैं। सतरावला बताया एक दिन बाजार में कपडे की दुकान पर गया तो वहां उस दुकानदार को राम नाम लिखते देखा। उससे पूछा कि ये क्या तो उसने बताया कि राम नाम का लेखन है। बस तभी मुझे भी लगन लगी। उससे पूछा कॉपी कहा और कैसे मिलेगी। उसने सब बताया। बस तब से राम नाम लिखने की लगन लग गई। इसी साल 11वें माह में 84 लाख राम नाम पूरे हो गए हैं।

नसीराबाद निवासी 75 वर्षीय मगनदेवी बंसल ने 84 लाख रामनाम का हस्तलेखन पूर्ण कर दिया। इसके बाद भी लेखन कार्य की निरंतरता बनी हुई है। 20 साल पहले पुष्कर में रामनाम लेखन का संकल्प लिया था। इसके बाद से राम नाम लेखन करना शुरू किया। इनकों देख परिवार के अन्य लोग बेटी, बहू, जेठ भी लिखने लगे हैं।

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