संत बिना युक्ति नहीं और सत्संग बिना मुक्ति नहीं : श्री हित अम्बरीश महाराज

अजमेर। यूं तो भगवान राम का नाम लेने से मानव मात्र पुण्य का भागी बनता है, इसके साथ ही भक्त 84 लाख बार राम नाम का लिखित जप कर ले तो वह भगवान का प्रिय होकर परमपद का अधिकारी हो जाता है। राम नाम के हस्तलेखन का संकल्प करने वाले साधकों की तपस्या का परिणाम है कि भगवान अपने नाम विग्रह रूप में आजाद पार्क स्थित अयोध्या नगरी में विराजित हैं। अलसुबह से देर शाम तक भगवान राम के 54 अरब अंकित रूपों की परिक्रमा का आनंद प्रतिदिन अजमेर के राम भक्तों को मिल रहा है।

श्रीराम नाम महामंत्र परिक्रमा समारोह समिति के तत्वावधान और श्री मानव मंगल सेवा न्यास व श्रीराम नाम-धन संग्रह बैंक के सहयोग से विश्व में सर्वाधिक विधिवत संकलित हस्तलिखित श्रीराम नामों की 15 जनवरी तक चलने वाली परिक्रमा के पांचवें दिन गुरुवार को भी भक्तों का आना बना रहा। परिक्रमा के साथ भक्त पांडाल में बनी अयोध्या नगरी में सजे राम दरबार के दर्शन कर अभिभूत हो रहे हैं।

नाम लेते ही प्रभु का अहसास

दीपक जलाते ही जिस तरह प्रकाश फैल जाता है वैसे ही संतों की शरण में आते ही प्रभु भक्ति का भाव जग जाता है। संत का एक वाक्य ही जीवन में बदलाव ला देता है। मन अभिमान छोड कर ही संतों की शरण में जाएं तो जीवन में अनोखा परिवर्तन पाएंगे। यह बात श्री हित ​हरिवंश चंद महाप्रभु एवं राधावल्लभ लालजी के लाडले संत श्री हित अम्बरीश महाराज ने आजाद पार्क अयोध्या नगरी में 54 अरब ​हस्तलिखत श्रीराम नाम परिक्रमा महोत्सव के दौरान प्रवचन करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि इस संसार में आया हर जीव जानता है कि खाली हाथ आए हैं खाली जाएंगे इसके बाद भी संसार में उलझा रहता है। पाप बढ जाता है तो कथा में मन नहीं लगता। इसलिए सत्संग का अवसर कभी न चूकें। गोस्वामी ने कहा है कि जीव कर्म के बंधन में बंधा है। खूब गुणा भाग करके संपति को अर्जित करना जानता है। विषयों का जानकार होना और ज्ञान का प्रकाश जीवन में फैलना दोनों अलग बात है। मनुष्य पुरुषार्थ और सामर्थ से बहुत कुछ पा सकता है। भगवान भी उसे सब कुछ देते हैं, लेकिन वे भक्ति सहजता से नहीं देते। भक्ति पाना दुलर्भ है। सत्संग से प्रीत करें तो तो संसार के प्रति लगाव खुद ब खुद कम हो जाएगा। संतगण प्रभु से प्रीत करने की रीत सिखाते हैं।

उन्होंने कहा कि प्रभु भक्ति बिना मन के अभाव की पूर्ति नहीं हो सकती। धन तो लोभ लेकर आता है, लोभ के पास विचार करने का सामर्थ नहीं होता तो धन से मन के अभाव की पूर्ति कैसे होगी। जीवन में सत्संग ही ऐसा जरिया है जिससे भगवत मार्ग का रास्ता पता चलता है। सत्संग अनियंत्रित मन को काबू करने की युक्ति है। जब भी संत मिलन हो या सत्संग का अवसर मिले तो हमेशा यह मानो मैं यहां खुद नहीं आया, प्रभु ने मुझे भेजा है, क्योंकि प्रभु की स्वीकृति के बिना कोई जीव सत्संग में नहीं आ सकता।

उन्होंने कहा कि संत बिना युक्ति नहीं और सत्संग बिना मुक्ति नहीं। संत के पास एक ही संपति होती है वह है भगवान की भक्ति। संत ही भगवान से प्रीत लगाने का रास्ता बताता है। जिस तरह गंगा में एक लोटा पानी मिला तो तो वह गंगा में मिल जाता है इसी तरह ठाकुरजी से मन रमा तो फिर उन्हीं का हो जाता है। मनुष्य जीवन मिलना बहुत बडी उपलब्धि है क्योंकि मानव जीवन प्रभु को पाने का सरल साधन है।

जीवन में परमानंनद तब होता है जब भगवतभाव हदय के भीतर प्रकट हो। मन के भीतर देखों, अन्तर्ममुखी बनो तो लगेगा ईश्वर तो भीतर है। राम नाम जीभ पर आ जाए तो भीतर भी प्रकाश फैल जाता है। ये नाम मन के मैले दर्पण को स्वच्छ कर देता है। जीवन में सत्संग सदैव रहे। संत भगवतभाव देता है। जीवन में सतत सत्संग हो तो जीवन सफल हो जाता है। सत्संग विचार शक्ति और विवेक को बढाता है। सत्संग ही सत्य और असत्य का बोध कराता है।

शब्द में अदभुत शक्ति होती है, इसमें वस्तु का साक्षात्कार कराने की शक्ति होती है। इसी तरह शब्द रूपी राम नाम लेते हैं तो प्रभु राम का अहसास हो जाता है। नाम की महिमा देखिए कि जिस सागर को बिना सेतु के भगवान राम न लांघ सके उस सेतु को भक्त हनुमान भगवान का नाम स्मरण कर लांघ गए। इसलिए भगवत नाम का उच्चारण करें, निष्काम भाव से नाम जपे, उससे आप में सात्विकता का संचार होता है। नाम जप मन में सदभाव भरेगा।

जब कभी मन दुखी हो तो भगवान की मुस्कान के दर्शन करें। इतना कर लेने भर से जीव अपने कष्ट भूल जाएगा। व्यस्त होना जीवन की उपलब्धि नहीं बल्कि मस्त होना उपलब्धि है। जीवन में प्रभु नाम की मस्ती होनी चाहिए। सुख और दुख कभी वस्तु से नहीं मन की स्थिति से होता है। जिसके हदय में भगवान का वास हो वह तो सदैव परमानंद में होता है। जब तक चिंता है तब तक द्वंद है। जिनकी कोई चाह नहीं वहीं शहंशाह है।

महाआरती के दौरान संयोजक सुनील दत्त जैन, सहसंयोजक कंवल प्रकाश किशनानी, उमेश गर्ग, महेन्द्र जैन मित्तल, डॉ विष्णु चौधरी, सुरेश शर्मा, कालीचरण खंडेलवाल, ओमप्रकाश मंगल, रमेश तापडिया, किशन बंसल, अंकुर अग्रवाल, रमाकांत भाटी, वृतिका शर्मा, ललित शर्मा, बालकृष्ण पुरोहित, राम सिंह चौहान, लक्ष्मण शर्मा, कमल मूंदडा, पुष्पा ओमप्रकाश जायसवाल, तुलसी सेवा संस्थान के लोकमन दास गोयल, सुरेन्द्र बंसल, रमेश अग्रवाल आदि मौजूद रहे। अमृतवाणी मानस मण्डल की लता तायल व साथियों की ओर से सुन्दरकाण्ड पाठ की संकीर्तन की प्रस्तुति दी गई।

देर रात तक बही भजनों की सरिता

देर शाम भगवान राम को समर्पित भजनामृत गंगा में गिरीराज मित्र मण्डल परिवार (एलन केरियर इंस्टीट्युट) कोटा के गोविन्द माहेश्वरी ने द्वारा सुंदर भजनों की प्रस्तुति देकर माहौल को भक्तिपूर्ण कर दिया।

उन्होंने राम नाम के हीरे मोती, मैं बिखराउ गली गली, ले लो रे कोई राम का प्यारा…, रामजी रो नाम म्हाने मीठो धणो लागे रे…, जग में सुंदर हैं दो नाम, चाहे कृष्ण कहो या राम, बोलो राम राम राम, बोलो श्याम श्याम श्याम…, सीताराम सीताराम सीताराम कहिये, जाही विधि राखे राम ताहि विधि रहिये…, राम रमैया गाए जा, राम से लगन लगाये जा, राम ही तारे, राम उबारे, राम नाम दोहराये जा…, तेरा रामजी करेंगे बेडा पार, उदासी मन काहीे को करे ,तन के तम्बूरे में दो सांसों के तार बोले जय सियाराम राम, जय राधेश्याम…, लिख दो मारे रोम रोम में राम राम हो रमापति, राम हो रघुपति, लिख दो जय सियाराम जी…, हर सांस में हो सुमिरन तेरा यूं ही बीत जाए जीवन मेरा…, संतन के संग संग लाग रे, तेरी अच्छी बनेगी, अच्छी बनेगी तेरी किस्मत जगेगी…, जब संत मिलन हो जाए तेरी वाणी हरि गुण गाए , मन की तरंग मार ले बस हो गया भजन, आदत बुरी सुधार ले बस हो गया भजन…, राम सुमिर के रहम करे ना फिर कैसे सुख पाएगा, कृष्ण सुमिर के कर्म करे ना यूं ही जग से जाएगा…आदि भजनों की प्रस्तुति दी।

15 जनवरी तक भक्त कर सकेंगे परिक्रमा

सहसंयोजक उमेश गर्ग ने बताया कि श्रीराम नाम महामंत्र परिक्रमा समारोह समिति के तत्वावधान और श्री मानव मंगल सेवा न्यास व श्रीराम नाम धन संग्रह बैंक के सहयोग से आजाद पार्क में परिक्रमा का आयोजन 15 जनवरी तक रहेगा। परिक्रमा के दौरान सुन्दरकाण्ड पाठ और संतजनों के प्रवचन भी प्रतिदिन होंगे।

क्या है राम नाम धन संग्रह बैंक, कैसे जुडे

अजमेर में सन 1987 से संचालित श्रीराम नाम धन संग्रह बैंक से जुडे अनन्त भक्तों ने त्रितापों से मुक्ति प्राप्त की और मानव जीवन सार्थक कर मोक्ष के भागी बन रहे हैं। संस्था का उद्देश्य प्रत्येक मानव को 84 लाख राम नाम लिखित जप कराने का संकल्प कराना है। इसके साथ ही संकल्पित सदस्यों को नि:शुल्क राम नाम जप पुस्तिकाएं उपलब्ध कराई जाती हैं एवं जप की गई मंत्र पुस्तिकाएं जमा की जाती हैं। बैंक में प्रत्येक सदस्य के खाते का संधारण होता है। संग्रहित महामंत्रों की परिक्रमा का आयोजन, चमत्कारिक प्रत्यक्ष लाभ-ईष्ट दर्शन के प्रभाव से मुक्ति, आत्म साक्षात्कार, प्रभु दर्शन एवं प्रेम, भाईचारा, विश्व कल्याण की भावनाओं का संचारण करना, कराना। कलि के प्रभाव से मुक्ति और परमानन्द प्राप्ति की प्रकट अनुभूति होती है।

शुक्रवार 5 जनवरी के कार्यक्रम

मध्यान्ह 2ः30 बजे श्री कृपालु मानस मण्डल के सम्भाजी व साथियों द्वारा सुन्दरकाण्ड पाठ होगा। शाम 5ः30 बजे राजगढ़ भैरवधाम के मुख्य उपासक चम्पालाल महाराज प्रवचनों से श्रृद्धालुओं को निहाल करेंगे। इसके बाद उत्कृष्ठ कार्य करने वाले समाजसेवियों आदि का सम्मान होगा। महाआरती के बाद शाम 7ः30 बजे भगवान राम को समर्पित स्वराजंलि में आरोहम – गंधर्व महाविद्यालय के आनन्द वैद्य प्रस्तुति देंगे। इस कार्यक्रम में पूरनचन्द अनिल राजकुमार गर्ग, अशोक मुकेश शिवराज विजय, तारा देवी साहू और मनोज नानकानी यजमान रहेंगे।