पौष मास में जगमगा उठे सहस्त्रों दीप, मानों आ गई दिवाली

ram naam maha mantra parikrama mahatva 2017-18 day 16th at azad park ajmer

अजमेर। पौष मास में सहस्त्र दीप जगमगा उठे मानों दीपावली आ गई हो, राम नाम के जयकारे लगने लगे। मौका था अयोध्या नगरी में 31 दिसंबर से चल रही 54 अरब हस्तलिखित श्रीराम नाम परिक्रमा के विश्राम का। सोमवार शाम भव्य महाआरती के साथ परिक्रमा का विश्राम हुआ। 16 दिनों के दौरान हजारों रामभक्तों ने परिक्रमा रूपी आहूतियां दीं, संतों के प्रवचनों और सुंदरकांड पाठ का श्रवण किया।

पूर्णाहूति यज्ञ में उमडा अपार जनसमूह

परिक्रमा विश्राम के मौके पर अयोध्या नगरी में सुबह 9 बजे पूर्णाहूति यज्ञ का आयोजन किया गया। इस यज्ञ में बडी संख्या में धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने आहुतियां अर्पित की। माता बहनों ने मंगल गीत गाए। राम नाम परिक्रमा का मौका फिर मिले इसके लिए राम नाम महामंत्रों का आह्वान किया। पूर्णाहूति के यजमान रमेश चन्द्र अग्रवाल, अखिलेश गोयल, पूनम मारोठिया, भारती श्रीवास्तव, नितीन शर्मा, राजेश सोनी, इचरज देवी और कुणाल जैन रहे।

देशभक्ति के रंग में रंगे रामभक्त

परिक्रमा महोत्सव यूं तो पूर्णरूप से धार्मिक आयोजन रहा लेकिन अंतिम दिन माहौल देशभक्ति से भर गया। केशव माधव संकीर्तन मंडल ने राष्ट्र की सुरक्षा में तैनात सजग प्रहरियों की हौसला अफजाई के लिए 45 मिनट तक रामधुनी श्री राम जय जय राम का महाजप की विशेष प्रस्तुति दी। इस दौरान रामभक्त पूरी तरह देशभक्ति के रंग में रंग गए। सभी ने देश के वीर जवानों की सलामती के लिए राम जप करके भगवान राम के चरणों में वंदन किया।

महाप्रसादी का लिया आनंद, बंटी तुलसी माला

श्रीराम नाम महामंत्र परिक्रमा महोत्सव के विश्राम पर दीपकों की जगमग के साथ भव्य महाआरती हुई। उत्साहित माता बहने आरती की थाली घर से सजाकर लाईं। महाआरती के बाद समस्त रामभक्तों ने प्रसादी का आनंद लिया। परिक्रमा विश्राम पर महामंत्रों की पूर्णाहुति में सिद्ध श्रीगोवर्धन वृंदावन से मंगवाई गई तुलसी माला का वितरण किया गया।

परिक्रमा के विश्राम पर विश्राम कहां, उमडा अपार जनसमूह

परिक्रमा विश्राम के दिन सोमवार को परिक्रमा के लिए हजारों की संख्या में देर शाम तक रामभक्तों और गणमान्यजनों ने शिरकत की। कांग्रेस नेता महेन्द्र सिंह रलावता, बजरंग दल प्रांत सह संयोजक रामेश्वर लाल धाकड ने भी परिक्रमा कर पुण्य लाभ लिया। परिक्रमा विश्राम होने से रामभक्त बहुत उदास हो गए बिना विश्राम किए परिक्रमा में लीन रहे। सभी चाहते थे परिक्रमा करने का अवसर कुछ दिन और मिले।

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