दुनिया चले ना राम के बिना, रामजी चले ना हनुमान के बिना…

54 अरब हस्तलिखित राम नाम महामंत्रों की परिक्रमा का छठा दिन
अजमेर। राम काज में विश्राम कैसा, इसी भाव के साथ सैकडों भक्त प्रतिदिन राम नाम की परिक्रमा लगा रहे हैं। परिक्रमा के साथ अलसुबह से देर रात तक अयोध्या नगरी में आयोजित हो रहेआध्यात्मिक और भक्तिपूर्ण वातावरण का आनंद लेने के लिए श्रद्धालुओं का आना बना हुआ है। आजाद पार्क में बनाई गई अयोध्या नगरी में विराजित 54 अरब हस्तलिखित श्रीराम नाम महामंत्रों की परिक्रमा के छठें दिन शुक्रवार को भी जारी रही।

श्री कृपालु मानस मण्डल के सम्भाजी व साथियों ने सुन्दरकाण्ड पाठ की संगीतमय प्रस्तुति देकर राम भक्तों को निहाल किया। भक्तजनों ने सामूहिकरूप से श्रीराम नाम कलि अभिमत दाता हित पर लोक लोक पितु माता का उच्चारण कर पाठ में सहभागिता की। दुनिया चले ना राम के बिना, रामजी चले ना हनुमान के बिना… भजन प्रस्तुत कर भक्तजनों को आनंदित कर दिया।

भगवान राम को समर्पित स्वराजंलि में आरोहम गंधर्व महाविद्यालय के आनन्द वैद्य की भक्तिपूर्ण प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। त्वीशी, अयाना, उषा, पूनम, शिवांगी, दुर्गा आदि ने श्रीरामचंद्र कृपालु भज मन…भजन गाकर भक्तजनों को भावविभोर कर दिया। आकाश शोभावत ने सुख के सब साथी दुख में ना कोय…, तनवी वैद्य ने राम भजन कर मन…, विशाल माथुर ने शिव भोला भंडारी…, मधुरा वैद्य ने किनु संग खेलूं होली…, तन्मय वैद्य नेू धन्य भाग सेवा का अवसर पाया…, राजकंवर ने चंदरिया झीनी रे झीनी आदि भजनों की प्रस्तुति दी।

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समाजसेवियों और राम नाम साधकों का सम्मान
उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवी अतुल पाटनी व कमलेश ईनाणी का सम्मान किया गया। 84 लाख बार श्रीराम नाम महामंत्रों का हस्तलेखन पूर्ण कर लेने वाले साधक सोहन सिंह खंगारोत, कानाराम कुमावत, रामनाथ कुमावत और रामसुख प्रजापत का श्रीराम नाम धन संग्रह बैंंक की ओर से श्रीफल देकर तथा शॉल ओढाकर बहुमान किया गया। इन साधकों को प्रशस्तिपत्र प्रदान किए गए। पूरनचन्द अनिल राजकुमार गर्ग, अशोक मुकेश शिवराज विजय, तारा देवी साहू और मनोज नानकानी यजमान रहे।

महाआरती के दौरान बालकृष्ण पुरोहित, सह संयोजक कंवल प्रकाश, उमेश गर्ग, महेन्द्र जैन मित्तल, सुरेश शर्मा, शिवरतन वैष्णव, लोकमल गोयल, वृतिका शर्मा, ललित शर्मा, विनित लोहिया, अशोक टांक समेत बडी संख्या में गणमान्यजनों ने शिरकत की।

सह संयोजक उमेश गर्ग ने बताया कि श्रीराम नाम महामंत्र परिक्रमा समारोह समिति के तत्वावधान और श्री मानव मंगल सेवा न्यास व श्रीराम नाम-धन संग्रह बैंक के सहयोग से विश्व में सर्वाधिक विधिवत संकलित हस्तलिखित श्रीराम नामों की परिक्रमा 15 जनवरी तक जारी रहेगी। इच्छुक भक्तजन सुबह 6:15 बजे से परिक्रमा का आनंद ले सकते हैं। परिक्रमा के दौरान सुन्दरकाण्ड पाठ और संतजनों के प्रवचन भी प्रतिदिन होंगे। परिक्रमा स्थल पर लायंस क्लब उमंग की ओर से निशुल्क राम चाय का वितरण किया जा रहा है।
ram naam maha mantra parikrama mahatva 2017-18 at azad park ajmer

भारत पुन: विश्वगुरु बनने की ओर अग्रसर

चिंतन एवं प्रवचन सत्र में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राजस्थान क्षेत्र की कार्यकारिणी के सदस्य पुरुषोत्तम परांजपे ने मार्गदर्शन करते हुए कहा भगवान राम का व्यवहार ही इस देश में जीवन जीने का सिद्धांत बना। भगवान के जीवन दर्शन का अनुसरण करेंगे तो जीवन के समस्त कष्ट स्वत: ही दूर हो जाएंगे।

प्रभु भक्ति के तरीके अलग हो सकते हैं, कोई भजन गाकर उन्हें पाता है तो कोई पूजा करके तो कोई मंदिर में उनके आशीर्वाद का प्रसाद ग्रहण करने पहुंचता है। भगवान एक हैं लेकिन भगवान के रूप और नाम अनेक होते हैं, दुनिया इस सिद्धांत को मान ले तो सर्व़त्र शांति स्थापित हो जाएगी।

दुनिया में हमारी संस्कृति, विज्ञान और महापुरुषों की वाणी के समान कोई दूसरा नहीं था। भारत ने हमेशा दुनिया को दिया है, इसलिए भारत को विश्वगुरु माना गया था। आज स्थित वैसी नहीं है, हम पिछड गए। काल चक्र घूमता रहता है, एक बार फिर हम फिर इस स्थित में आए हैं कि दुनिया का हमें समर्थन मिलने लगा है। हाल ही में योग को पूरी दुनिया ने स्वीकार किया है। विज्ञान, साहित्य, संगीत, युद्ध हर क्षेत्र में भारत का महत्वपूर्ण दखल रहा है।

इस धरा पर भगवान का अवतार राम हैं। भगवान राम ने भारतीय तट से श्रीलंका तक एक पुल बनाया था। दुर्भाग्य से अपने ही देश में कुछ ऐसे लोग थे जिन्होंने इसे प्राकृतिक कहते हुए नकार दिया था। हाल ही में विदेशी वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया कि यह 7 हजार साल पुराना हस्तनिर्मित पुल है। राम को कथानक और काल्पनिक कहानी मानने वालों को आखिरकार राम का अस्तित्व स्वीकार करना ही पडा।

उन्होंने कहा कि हमारे देश में समय के साथ जांत पांत जैसी बुराईयां घर कर गई, जबकि पुरातन काल में जातिगत आधार पर भेदभाव नहीं होता था। भगवान राम के जीवन पर महाकाव्य की रचना करने वाले आदिपुरुष महर्षि वाल्मीकि थे। वाल्मीकि के आश्रम में ही माता सीता को आश्रय मिला, भगवान राम के पुत्र लव और कुश का लालन पालन हुआ।

महाभारत जैसे काव्य की रचना करने वाले वेदव्यास नाविक के पुत्र थे। नाव चलाने वाले समाज में इतनी विलक्षण विभिूति ने जन्म लिया। लेकिन आज हम देखते ही जात पात के नाम पर ही विभेद बने हुए हैं। धर्म के नाम पर अशांति फैलाई जाती है। हमें अपने पूर्वजों के बारे में जानना चाहिए। अपनी पूर्ववर्ती समाज व्यवस्था को समझ लेंगे तो भेदभाव की स्थिति स्वत: समाप्त हो जाएगी।

उन्होंने कहा कि 5 हजार साल पुराने महाकाव्य महाभारत के बारे में माना जाता है कि इसमें जितने प्रकार के मनुष्यों का वर्णन है उतने की स्वभाव के लोग दुनिया में होते हैं, जितनी प्रकार की घटनाओं का वर्णन इसमें मिलता है उतने ही घटनाक्रम दुनिया में होते हैं। महाभारत में सिर्फ झगडे का वर्णन नहीं बल्कि ज्ञान का वर्णन और उपदेश भी मिलता है। दुनिया के साहित्य में भी महाभारत का प्रभाव है।

इसी तरह गीता में बताए कर्म सिद्धांत भारत की आत्मा में रचे बसे हैं। भारत और इसकी संस्कृति को कोई विदेशी भी समझना चाहे तो सब कुछ गीता पढकर जान सकता है। गीता का दुनिया की 110 भाषाओं में अनुवाद हुआ है। सैद्धांतिक और कथानक दृष्टि से भारतीय साहित्य हमेशा नई अनुभुति के समान लगता है।

संस्कृत प्राचीन समय में हमारे देश की भाषा रही है। संस्कृत से ही अन्य भाषाओं का उदय हुआ। इस भाषा में सबसे अधिक शब्द है, लेकिन इसका व्याकरण महज 80 पृष्ठों में समाहित है। संस्कृत इतनी समृद्ध और सरल भाषा है कि इसे दुनिया के 117 विश्वविद्यालयों में पढाया जाता है। इस भाषा में ही राम और कृष्ण समेत समस्त भगवानों का साहित्य लिखा गया है।

चित्रकला प्रतियोगिता 11 जनवरी को

11 जनवरी को शाम 4 बजे चित्रकला प्रतियोगिता आजाद पार्क स्थित अयोध्या नगरी में आयोजित की जाएगी। संयोजक सुरेश शर्मा ने बताया कि प्रतियोगिता में दो वर्ग रखे गए हैं। कनिष्ठ वर्ग में कक्षा प्रथम से 5 तक के बच्चे पर्यावरण विषय पर चित्रांकन कर सकेंगे। वरिष्ठ वर्ग में कक्षा 6 से 12 के स्कूली बच्चे रामराज्य की परिकल्पना कर चित्रांकन करेंगे। इसमें सभी स्कूलों के  बच्चे भाग ले सकते हैं। प्रतिभागियों को रंग एवं ब्रश स्वयं लाने होंगे। खाली ड्राइंगशीट समिति की ओर से उपलब्ध करवाई जाएगी।जानकारी के लिए समिति कार्यालय में संपर्क किया जा सकता है।

 

12 जनवरी को भगवान बनो प्रतियोगिता

परिक्रमा महोत्सव में 12 जनवरी को शाम 4 बजे भगवान बनो प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा। संयोजक शशिप्रकाश इंदोरिया ने बताया कि इस प्रतियोगिता में तीन आयु वर्ग में जन्म से तीन साल, दूसरे वर्ग में नर्सरी से 5वीं कक्षा और तीसरे वर्ग में छठी कक्षा से 12वीं कक्षा तक के बालक बालिकाएं भाग ले सकेंगे। प्रतियोगिता के तहत राम, कृष्ण जैसे भगवान के किसी भी स्वरूप को धारण कर सकेंगे। रजिस्ट्रेशन परिक्रमा स्थल पर समिति कार्यालय में किया जा रहा है। अधिक जानकारी के लिए 9414666374, 9828029187 पर ​किया जा सकता है।

शनिवार 6 जनवरी के प्रस्तवित कार्यक्रम

मध्यान्ह 2ः30 बजे गणेश मानस मण्डल के कैलाश शर्मा व साथियों द्वारा सुन्दरकाण्ड पाठ की प्रस्तुति दी जाएगी। शाम 5ः30 बजे चित्रकुट धाम पुष्कर के पाठकजी महाराज के प्रवचन होंगे। इसके बाद समाजसेवियों सहित अन्य का सम्मान किया जाएगा। महाआरती के बाद शाम 7ः30 बजे भगवान राम को समर्पित ‘एक शाम राम के नाम’ कार्यक्रम की प्रस्तुति दी जाएगी। इस कार्यक्रम में सीताराम बंसल, कृष्ण अवतार बंसाली, सुरेन्द्र कुमार, अजय वर्मा और गोविन्द खटवानी यजमान रहेंगे।