54 अरब श्रीराम नाम महामंत्र महापरिक्रमा : धर्म, आध्यात्म और भक्ति का संगम

अजमेर। आजाद पार्क अयोध्या नगरी में 9वें दिन सोमवार को 54 अरब हस्तलिखित श्रीराम नाम महामंत्रों की महापरिक्रमा करने को भक्तों का तांता लगा रहा। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे, हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे गाते हुए श्रद्धालु परिक्रमा करते रहे। दिन में सुंदरकांड पाठ और प्रवचन का श्रवण कर भक्त निहाल हुए। देर शाम कवि सम्मेलन में कविता पाठ के जरिए कवियों ने माहौल को भक्ति भाव और वीर रस से ओतप्रोत कर दिया।

सह संयोजक उमेश गर्ग ने बताया कि विश्व में सर्वाधिक विधिवत संकलित हस्तलिखित श्रीराम नामों की परिक्रमा 15 जनवरी तक जारी रहेगी। इच्छुक भक्तजन सुबह 6:15 बजे से परिक्रमा का आनंद ले सकते हैं। सोमवार को श्रीराम मानस मण्डल के देवेन्द्र कुमार झा व साथियों द्वारा सुन्दरकाण्ड पाठ की प्रस्तुति दी। शाम को महाआरती के दौरान रामभक्तों का सैलाब उमड पडा। महाआरती में शिवज्योतिषानन्द महाराज, वीएचपी के केन्द्रीय मंत्री उमाशंकर, समिति केे सह संयोजक कंवल प्रकाश किशनानी, उमेश गर्ग, सुरेन्द्र बंसल, लज्जा शंकर गोयल, नृसिंह बंजारा, देवीलाल जांगिड, कैलाश शर्मा समेत बडी संख्या में रामभक्त मौजूद रहे।

दुश्मन को भी अनुरागी भक्त बना लेता राम का नाम : शिवज्योतिषानन्द

राम नाम की महिमा से शास्त्र भरे पडे हैं। भगवान राम पूर्ण ब्रह्म है। राम में समस्त ब्रहमांड बसता है। भगवान के नाम की जितनी परिक्रमा होगी उतने पाप नष्ट होते हैं। भगवान के नाम की परिक्रमा कर गणेश प्रथम पूज्य हो गए। यह बात संन्यास आश्रम अजमेर के अधिष्ठाता स्वामी शिवज्योतिषानन्द महाराज ने परिक्रमा महोत्सव के दौरान प्रवचन करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि अजमेर की भूमि का अहोभाग्य है कि यहां 54 अरब हस्तलिखित राम नाम की परिक्रमा का अवसर मिल रहा है। हमारे यहां ऐसी मान्यता है कि कोई एक बार राम का नाम लिखकर उसकी परिक्रमा कर ले तो जगत में वंदनीय बन जाता है। अजमेर में तो साक्षात 54 अरब राम की परिक्रमा करने को मिल रही है।

उन्होंने कहा कि कल कभी नहीं आता, वर्तमान में जो कार्य हो जाता है उसे कर लो, धर्म कार्य में पीछे मत रहो। कई बार जन्म जन्मांतर के पाप हमें आगे नहीं बढने देते, ऐसे में प्रभु से प्रार्थना करो कि हे प्रभु हमारा मार्गदर्शन करें। भगवान बडे दयालु हैं, वे भक्त की प्रार्थना जरूर सुनते हैं। सबको आराम देने वाली शक्ति राम है।

राम इतने दयालु थे कि उन्होंने लंका आक्रमण के समय असुरों को सिर्फ मारा ही नहीं बल्कि उनको भवसागर से तार दिया। असुरों को भी पापों से मुक्ति दिलाई। राम के नाम में इतनी शक्ति है कि वह पत्थर दिल को भी पिघला देता है। राम नाम में वह शक्ति है कि जो दुश्मन को भी अनुरागी भक्त बना लेता है। भगवान का नाम जप कर वाल्मीकि भी संत हो गए।

मनुष्य के कर्तव्यों का बोध कराने के लिए राम धरती अवतरित हुए। राम ने राजा का प्रजा के प्रति, पुत्र का पिता के ​प्रति, पति का पत्नी के प्रति, भाई के प्रति भाई के प्रति दायित्व का बोध कराया। आज समाज जाति वर्ग में बंटा नजर आता है, इसे जोडने का तरीका राम का नाम है। इसे जपने में न जाति आडे आती है न समाज। राम नाम सबका मंगल करता है। किसी के जीवन में कोई कठिनाई आए तो राम नाम का स्मरण कर लें तो हल स्वत: निकल आएगा।

अयोध्या में अब रामलला ही रहेंगे : उमाशंकर

अजमेर। मुख्यअतिथि विश्व हिन्दू परिषद के केन्द्रीय मंत्री उमाशंकर ने राम नाम परिक्रमा महोत्सव में आए रामभक्तों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि हमारा सौभाग्य है कि हम इस धरती पर जन्मे। यह प्रभु राम का देश है। भारतीय समाज और जीवन दर्शन में त्याग का बडा महत्व है। राम के जीवन का विश्लेषण करें तो रामायण, रामचरित मानस जैसे हर ग्रंथ में भगवान के त्याग का वर्णन मिलता है। राम ने सत्य और धर्म की पालन करते हुए जीने की हमें जो पद्धति दी वैसी कहीं ओर नहीं मिलती। यहां घट घट में राम बसते हैं, जब तक यह धरती रहेगी तब तक राम रहेंगे।

राम कोई कोरी कल्पना नहीं है, अयोध्या में का जन्म स्थल है। आक्रांता बाबर ने इस देश में मंदिर तोडे, उस समय अयोध्या में भगवान राम के मंदिर को भी तोड कर मस्जिद खडी कर दी। राम का मंदिर टूटना देश की मर्यादा टूटने के समान था। राम को लेकर हर युग में संघर्ष चला। राम का मंदिर फिर बने यही संकल्प लेकर संत महात्मा फिर खडे हुए और 1992 में मस्जिदरूपी ढांचा ढहा दिया गया। गुलामी के निशान को राम भक्तों ने मिटा डाला और इस धरती का स्वाभिमान जाग उठा। अयोध्या में अब रामलला ही रहेंगे। 2019 में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हो जाएगा।

समाजसेवियों और राम नाम साधकों का सम्मान

परिक्रमा महोत्सव के दौरान संन्यास आश्रम के अधिष्ठाता शिवज्योतिषानन्द महाराज ने उत्कृष्ट कार्य करने वाले समाजसेवी शकुन्तला तंवर, शैलेन्द्र अग्रवाल तथा पत्रकार शिवराज सिंह भाटी व कौशल जैन और यजमान एडवोकेट बबिता टांक, कन्हैयालाल, हरीश शर्मा और किशन हरवानी, सुंदरकांड पाठ मंडली के निर्मल कुमार शर्मा को आशीर्वाद प्रदान किया तथा समिति की ओर से शॉल ओढाकर सम्मान किया गया। 84 लाख बार राम नाम का हस्तलेखन पूर्ण करने वाले साधक अर्जुनलाल गुर्जर और सीता जाग्रत का श्रीरामनाम धन संग्रह बैंक की ओर से प्रशस्ति पत्र देकर बहुमान किया गया।

कवियों ने बहाई भक्ति और वीररस की सरिता

परिक्रमा महोत्सव के दौरान देर शाम भक्ति भाव और वीर रस से ओतप्रोत कवि सम्मेलन में भारी भीड जुटी। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुति दे चुके भीलवाडा से वीर रस के विख्यात कवि योगेन्द्र शर्मा और हास्य व्यंग्य के कवि अशोक पंसारी ने भक्तों को अपनी कविताओं से गुदगुदाया। इनके अलावा अमित टंडन, डॉ ब्रिजेश माथुर, प्रदीप गुप्ता, पुष्पा गौड, मुस्कान कोटवानी राम भक्तों के बीच कविताओं के जरिए भक्ति की रसधार बहाई।

श्रीरामनाम महामंत्रों 108 परिक्रमा करने का महत्व

श्रीराम नाम महामंत्रों की 108 परिक्रमा करने का भक्तों से आग्रह किया जाता है, इसके पीछे आध्यात्मिक अर्थ छिपा है। 108 अंक बडा़ महत्वपूर्ण है। जगत के जनक पारब्रह्म परमेश्वर को वेदों में ब्रह्म कहा गया है। ब्रह्म शब्द के अंकों का योग 108 होता है। हमारे सर्व प्रथम और सर्वोत्कृष्ट संबोधन “राम राम” के अंकों का योग भी 108 ही है। “सीताराम” के अंकों का योग भी 108 है। एक सौ आठ के एक और नौ का योग 9 होता है जो कि पूर्णांक है। पूर्णांक पूर्ण ब्रह्म का द्योतक हैं। हम जिस पृथ्वी पर रह रहे हैं, उसकी चार दिशाएं हैं और सताइस नक्षत्र हैं। 27×4=108 होता है। श्रीराम नाम महामंत्र की प्रदक्षिणा 108 करने के आग्रह में यही मूल कारण निहित हैं। इस ब्रह्माण्ड में सम्पूर्ण चराचर एक दूसरे की परिक्रमा कर रहा हैं। परिक्रमा तो केन्द्र की ही होती हैं। केन्द्र अर्थात नाभि। हमारे नक्षत्र मण्डल का केन्द्र सूर्य हैं। पृथ्वी सहित सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हुए चारों दिशाओं में भ्रमण करते हुए सताइस नक्षत्रों से गुजरते हैं। जिनका तात्पर्य हैं 27×4=108 अर्थात पूर्णता को उपलब्ध होना। एक माला में मणके भी 108 होते हैं,यह भी पूर्णता का प्रतीक है। श्रीराम नाम महामंत्र की परिक्रमा भी 108 बार की जाती हैं, जिससे हमारी उर्जा उर्द्धवगामी होकर हमें विशिष्ट अनुभव कराती है।

मंगलवार 9 जनवरी के प्रस्तावित कार्यक्रम

मध्यान्ह 2ः30 बजे जय अम्बे महिला मण्डल के अनिता नरचल व साथियों द्वारा सुन्दरकाण्ड पाठ की प्रस्तुति दी जाएगी। शाम 5ः30 बजे रामनिवास धाम भीलवाड़ा के जगदगुरू श्री रामदयाल महाराज के प्रवचन होंगे। इसके बाद समाजसेवियों सहित अन्य का सम्मान किया जाएगा।महाआरती के बाद शाम 7ः30 बजे भगवान राम को समर्पित श्री सर्वेश्वर संकीर्तन मण्डल द्वारा ‘एक शाम किशोरी जी के नाम’ में अशोक तोषनीवाल अपनी प्रस्तुति देंगे। इस कार्यक्रम में शंकरलाल बंसल, शिवशंकर फतेहपुरिया, रमाकान्त बाल्दी और राधेश्याम गर्ग यजमान रहेंगे।