‘इन्द्रधनुष’ से सजा भगवान राम का दरबार

अजमेर। 54 अरब हस्तलिखित श्रीराम नाम महामंत्र परिक्रमा महोत्सव के 11वें दिन बुधवार को तानसेन संगीत महाविद्यालय की ओर से भगवान राम को समर्पित ‘इन्द्रधनुष’ कार्यक्रम की प्रस्तुति दी गई।

ताक्सी, पूर्वा, ख्याति, संस्कृति ने गणेश वंदना की सुमधुर प्रस्तुति से इन्द्रधनुष का श्रीणेश किया। प्रकृति की छंटा, सुंदर रूप, पेड पौधों और माटी की सुगंध, आकाश के मनमोहक नजारों को एक माला में पिरोकर संगीतमय रूप में प्रस्तुत किया।

प्रभु जैन ने जग में सुंदर है दो नाम चाहे ​कृष्ण कहो या राम…, संतोष और साथियों ने मिलनी घर आए भगवान… भजन पर भक्तों को भावविभोर कर दिया। भजनों के बीच नेहल, श्रेया, आबिशा ने कथक की भावपूर्ण प्रस्तुति दी। भला किसी का कर न सकों… और भारत का रहने वाला हूं…समूहगान ने समूचे पांडाल को गूंजा दिया।

नन्हीं बालिकाओं अदिति, भूमि, कनूप्रिया, श्रिष्ठी, दर्शिका, यशि ने नटखट नटखट…कथक डांस के जरिए दर्शकों की खूब दाद हासिल की। संकल्प और रोहित ने वॉकल सॉन्ग इंसाफ की डगर पर…, ताक्सी ने कान्हा सो जा जरा…, आलिशा ने कान्हा की मुरली… तथा हर्शिक, विधुर, मारूफ, शिवप्रताप व अवनीश ने राम धुन हे राम हे राम…प्रस्तुत कर माहौल को भक्ति से भर दिया।

तू प्यार का सागर है…, मन लागों मेरा फकीरी में… भजन श्रोताओं ने गायकों के साथ में गुनगुनाया। परी, बिंदिया और साथियों की हनुमान चालिसा की नृत्यमय प्रस्तुति का दर्शकों ने तालियों की गडगडाहट के साथ स्वागत किया। हर्षिल और श्रेया ने गीत इतनी शक्ति हमें देना दाता…, दीपक, अमेटा, अंकुश, अहाना ने ये तो सच है कि भगवान है…प्रस्तुत किया।

श्रुति और झलक के राधा कैसे ना जले… भजन पर कथक को खूब सराहा गया। किसी की मुस्कुराहट पे… और श्याम तेरी बंशी तथा तेरे मन में राम मन में राम गीत ने भक्ति की रसधार बहा दी।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि निरंजन शर्मा, विशिष्ट अतिथि सप्तक परिवार के प्रमुख ललित शर्मा, उमेश गर्ग व वृतिका शर्मा ने सभी कलाकारों का स्वागत कर उत्साहवर्धन किया।