अदालत का फैसला दर्शाता है कि देश में कानून का शासन है : नारायण राणे

मुंबई। केंद्रीय मंत्री नारायण राणे ने कहा है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे पर उनके बयान के परिप्रेक्ष्य में अदालत का उनके पक्ष में आया फैसला दर्शाता है कि देश में कानून का शासन है। राणे ने संवाददाताओं से आज यहां कहा कि कुछ लोगों ने उनके अच्छे व्यवहार का गलत फायदा उठाया। उन्होंने पार्टी के नेताओं को समर्थन के लिए धन्यवाद दिया।

उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने उनकेे अच्छे स्वभाव का फायदा उठाया है, लेकिन वह अभी इस मामले में बात नहीं करूंगा। उन्होंने कहा कि ‘जन आशीर्वाद यात्रा’ के दौरान जनता को केन्द्र सरकार के सात वर्ष में किए गए कार्यों और लाभकारी नीतियों की जानकारी देना है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशानुसार उन्होंने अपनी यात्रा शुरू की।

राणे ने कहा कि उनकी यात्रा में दो दिन का अंतराल हो गया लेकिन वह सिंधुदुर्ग से शुक्रवार को अपनी यात्रा फिर शुरू करेंगे। ठाकरे पर चुटकी लेते हुए राणे ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री के बारे में कुछ भी गलत नहीं कहा और सवाल किया कि कैसे एक व्यक्ति को देश के बारे में जानकारी नहीं हो सकती।

उन्होंने शिवसेना पर तीखा हमला किया और कहा कि उन्होंने अतीत में आपत्तिजनक बयान दिए हैं, ठाकरे के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर दिए गए एक बयान का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कथित तौर पर कहा था कि योगी आदित्यनाथ को चप्पलों से पीटा जाना चाहिए।

नासिक में दर्ज प्राथमिकी पर 17 सितंबर तक राणे को मिली राहत

महाराष्ट्र सरकार ने बुधवार को बम्बई उच्च न्यायालय को आश्वासन दिया कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ विवादित टिप्पणी के मामले में केंद्रीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री नारायण राणे को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा।

उच्च न्यायालय में राणे के वकीलों द्वारा दायर एक याचिका पर सुनवाई चल रही थी। राणे के वकीलों ने अदालत से आग्रह किया कि ठाकरे को ‘थप्पड़’ मारने वाले मामले में उनके खिलाफ दर्ज प्राथमिकी रद्द कराई जाएं।

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अमित देसाई ने न्यायमूर्ति एसएस शिंदे और न्यायमूर्ति एन जे जमादार की खंडपीठ को बताया कि 17 सितंबर को याचिका पर सुनवाई होगी और तब तक नासिक में राणे के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी।

राणे के वकील सतीश मानेशिंदे ने कथित बयान से उत्पन्न होने वाले सभी दर्ज मामलों में सुरक्षा की मांग की। देसाई ने इसका विरोध करते हुए कहा कि याचिका में केवल नासिक प्राथमिकी का उल्लेख है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा दिए गए बयान को रिकॉर्ड में लेने के बाद अदालत ने आगे की सुनवाई 17 सितंबर तक के लिए स्थगित कर दी।