जेल से आसाराम का ऑडियों वायरल, कटारिया बोले जांच कराई जाएगी

Rape convict Asaram audio clip goes viral from Jodhpur Central Jail
Rape convict Asaram audio clip goes viral from Jodhpur Central Jail

उदयपुर। राजस्थान के गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा कि नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में उम्र कैद की सजा काट रहे कथावाचक आसाराम का जेल से ऑडियों वायरल होने के मामले की जांच कराई जाएगी।

कटारिया ने आज यहां मीडिया से बातचीत में कहा कि जेल से सोशल मीडिया पर वायरल हुए ऑडियों के दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि फेसबुक लाईव पर वायरल हुए कथित ऑडियों संदेश में आसाराम ने अपने समर्थकों से कहा कि ये केस पूरी तरह साजिश है, पहले शिल्पी बेटी फिर बेटे शरत को निकलवाएंगे, फिर हम तुम्हारे बीच आ जाएंगे।

तादेंकि जोधपुर की जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम का एक कथित ऑडियो क्लिप ऑनलाइन वायरल हो रहा है। इसमें वे फोन पर एक व्यक्ति को यह कहते हुए सुनाई दे रहे हैं कि जेल में वह थोड़े समय रहेंगे और अच्छे दिन आएंगे।

इस मामले में जोधपुर जेल के डीआईजी विक्रम सिंह का कहना है कि आसाराम की शुक्रवार को टेलीफोन पर बातचीत के दौरान 15 मिनट की यह ऑडियो क्लिप रिकॉर्ड की गई होगी। इससे दो दिन पहले जोधपुर की एक अदालत ने पांच साल पहले उसके आश्रम में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार करने का दोषी ठहराया और उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।

सिंह ने कहा कि कैदियों को एक महीने में 80 मिनट के लिए उनके द्वारा दिए गए दो नंबरों पर फोन करने की अनुमति दी जाती है। उसने शुक्रवार को शाम साढे़ छह बजे साबरमती आश्रम के एक साधक से बात की। हो सकता है कि तब यह बातचीत रिकॉर्ड की गई हो और वायरल हो गई हो।

टेलीफोन पर की गई यह बातचीत उपदेश जैसी लग रही है। इस एकतरफा बातचीत में आसाराम अपने समर्थकों का शांति बनाए रखने और फैसले के लिए जोधपुर ना आने के लिए आभार जता रहे हैं। वह ऑडियो क्लिप में कथित रूप से कह रहे हैं कि हमें कानून एवं व्यवस्था का सम्मान करना चाहिए। मैंने भी यही किया।

उसने दावा किया कि कुछ लोगों ने उनके आश्रम को बदनाम करने का अभियन चला रखा है और वे इस पर कब्जा करना चाहते हैं। उसने कहा कि ऐसे उकसाने वाली बातों या आश्रम के लेटर हेड पर जो कुछ भी लिखा जा रहा है उससे बहक ना जाए।

बातचीत में आरोपी शिल्पी और शरत का जिक्र करते हुए आसाराम ने कहा कि वह जेल से सबसे पहले उनकी रिहाई का बंदोबस्त करेगा क्योंकि यह माता-पिता का कर्तव्य है कि वे पहले अपने बच्चों के बारे में सोचें। शिल्पी और शरत को विशेष अदालत से 20 साल जेल की सजा मिली है।