रविन्द्र जाडेजा की बड़ी बहन नैनाबा जाडेजा ने किया सक्रिय राजनीति में प्रवेश

रविन्द्र जाडेजा की बड़ी बहन नैनाबा जाडेजा ने किया सक्रिय राजनीति में प्रवेश
रविन्द्र जाडेजा की बड़ी बहन नैनाबा जाडेजा ने किया सक्रिय राजनीति में प्रवेश

अहमदाबाद । टीम इंडिया के स्टार हरफनमौला क्रिकेटर रविन्द्र जाडेजा की बड़ी बहन नैनाबा जाडेजा ने आज विधिवित सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया।

आगामी लोकसभा चुनाव से कुछ ही माह पहले महिला अधिकारों के लिए सक्रिय नवगठित नेशनल वीमेन्स पार्टी ने उन्हें महाराष्ट्र, गुजरात और राजस्थान को मिला कर बने पश्चिमी क्षेत्र का प्रभारी बनाने की यहां घोषणा की। ज्ञातव्य है कि जाडेजा की पत्नी रीवाबा ने भी सक्रिय राजनीति में आने के संकेत देते हुए पिछले साल अक्टूबर माह में विवादास्पद जातीय संगठन राजपूत करणी सेना, जो पद्मावत फिल्म के राष्ट्रव्यापी उग्र विरोध के कारण चर्चा में आयी थी, के गुजरात अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली थी।

गुजरात निवासी जाडेजा की दोनो बड़ी बहनों में से भी सबसे बड़ी नैनाबा, जो पहले अपने गृहनगर गुजरात के जामनगर के सरकारी गुरू गोविन्द सिंह में बतौर नर्स काम कर चुकी हैं और अब क्रिकेट के थीम पर राजकोट में बने अपने पारिवारिक रेस्त्रां जड्डूस का कामकाज देखती हैं। उन्होंने चुनाव लड़ने की संभावना से भी पूरी तरह इंकार नहीं किया। इस बारे में पूछे जाने पर यूएनआई से उन्होंने कहा कि कौन जानता है कि आगे क्या होगा।

हालांकि उन्होंने अपनी भाभी रीवाबा के भी चुनावी राजनीति में प्रवेश से जुड़े प्रश्नों के बारे में कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि उनके अपने फैसले को उनके पिता अनिरूद्ध सिंह जाडेजा का पूरा समर्थन है। वह राजनीति में आकर महिलाओं के लिए विशेष रूप से संघर्ष कर अपना मुकाम बनाने का प्रयास करने वाली महिलाओं के लिए बहुत कुछ करना चाहती हैं।

यह पूछे जाने पर कि क्या उन्होंने अपना फैसला लेने से पहले जाडेजा से बात की थी, उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि वह मुझसे छोटा है और अपने सभी फैसले मुझसे पूछ कर नहीं लेता तो मै ऐसा क्यों करूं।

उन्हें अपनी पार्टी में शामिल करने और पश्चिम क्षेत्र का प्रभारी बनाने की घोषणा करने वाली राष्ट्रीय अध्यक्ष डा़ श्वेता शेट्टी ने कहा कि पार्टी महिलाओं की समानता की पक्षधर है और कम से कम आधी लोकसभा सीटों यानी 283 पर और गुजरात में 26 में से 13 पर चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं का समानता के लिए उनका अधिक से अधिक संख्या में सक्रिय राजनीति में प्रवेश ही एकमात्र रास्ता है।