राजस्थान में 20 हजार कांस्टेबल की भर्ती शीघ्र : गुलाबचंद कटारिया

Recruitment of twenty thousand constables in Rajasthan soon : Gulab chand Kataria
Recruitment of twenty thousand constables in Rajasthan soon : Gulab chand Kataria

उदयपुर। राजस्थान के गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया ने कहा है कि राज्य में पुलिस बल की संख्या बढाने के लिए सरकार शीघ्र ही बीस हजार कांस्टेबलों की भर्ती प्रक्रिया शुरु करने जा रही है।

कटारिया ने बुधवार को पत्रकारों को बताया कि इसमें उन आवेदकों को पुन: आवेदन नहीं करना पड़ेगा जिन्होंने पिछली बार साढ़े पांच हजार पदों के लिए हुई भर्ती प्रक्रिया में आवेदन किया था।

निरस्त कर दी गई भर्ती के पदों को इन बीस हजार पदों में सम्मिलित कर फिर से प्रकिया प्रारम्भ की जा रही है। उन्होंने कहा कि नई भर्ती में ऑफलाइन आवेदन मांगे जाएंगे तथा इसे पन्द्रह जुलाई तक पूर्ण कर लिया जाएगा।

इसके पश्चात चयनित अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा। समय पर और शीघ्र प्रशिक्षण के लिए अन्य राज्यों के प्रशिक्षण केंद्रों की सेवाएं भी ली जाएंगी।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने मैस भत्ता एक हजार छह सौ से बढ़ा कर दो हजार रुपए प्रतिमाह कर दिया है जिससे पुलिस के जवानों को मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। होमगार्ड के जवानों का मानदेय 325 से बढ़ाकर 693 रुपए प्रति ड्यूटी कर दिया है जो उनके लिए आर्थिक रुप से संबल प्रदान करने वाला कदम है।

उन्होंने कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी के इस युग में साइबर क्राइम रोकने के लिए सभी संभाग मुख्यालयों पर अभय कमांड स्थापित कर योग्य कर्मियों की भर्तियां की है। तेरह नए वृत्त, 28 नए थानें एवं 26 नई चौकियां स्थापित कर पुलिस बल की पहुंच को और भी व्यापक बनाया गया है।

अनुसूचित जाति एवं जनजाति अधिनियम पर उच्चतम न्यायालय के निर्णय के बाद हुए आंदोलन के बारे में कटारिया ने कहा कि न्यायालय के फैसले के बारे में न्यायालय के माध्यम से ही राहत मिल सकती है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आंदोलन के दौरान पुलिस की सतर्कता से कोई बड़ी वारदात नहीं हुई।

उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को इस मामले में राजनीतिक लाभ के लिए गलतबयानी से बचना चाहिए। सोशल मीडिया पर दस अप्रैल को आंदोलन किए जाने की खबरों को अफवाह बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में सबको अपनी बात रखने का अधिकार है लेकिन इस बात का ध्यान रखा जाए कि इससे दूसरों के अधिकारों का हनन न हो।