रीट पेपर लीक मामले के तार कांग्रेस सरकार के जिम्मेदार लोगों तक पहुंच रहे : सतीश पूनियां

बीकानेर। राजस्थान के भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष डॉ सतीश पूनियां ने आरोप लगाते हुए कहा है कि अध्यापक पात्रता परीक्षा (रीट) पेपर लीक मामले के तार कांग्रेस सरकार के प्रमुख जिम्मेदार लोगों तक जुडे़ होने के बड़े संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के लिए केन्द्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) जांच जरूरी है।

डा पूनियां ने आज यहां प्रेस वार्ता को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजीव गांधी स्टडी सर्किल के चेयरमैन स्वयं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत हैं और इसके को-ऑर्डिनेटर इनकी सरकार के मंत्री सुभाष गर्ग हैं और राजीव गांधी स्टडी सर्किल के स्टेट को-ऑर्डिनेटर सहित छह लोगों को रीट परीक्षा आयोजन में छह रीजन में को-ऑर्डिनेटर बनाया गया था।

उन्होंने कहा कि रीट पेपर लीक प्रकरण में गिरफ्तार किये गये प्रदीप पाराशर का संबंध भी राजीव गांधी स्टडी सर्किल से होने की जानकारी मिली है, जिन्हें रीट परीक्षा आयोजन में जयपुर का को-ऑर्डिनेटर बनाया गया था और शिक्षक संघ रूक्टा ने मंत्री सुभाष गर्ग सहित कई लोगों को शिक्षक संघ के विभिन्न पदों से हटाने का निर्णय लिया है।

जिससे यह स्पष्ट हो रहा है कि रीट पेपर लीक मामले के तार राजीव गांधी स्टडी सर्किल के लोगों से होते हुए सरकार के मुखिया तक पहुंच रहे हैं, ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए सीबीआई जांच जरूरी है, जिससे राजस्थान के लाखों युवाओं को न्याय मिल सकेगा।

डॉ. पूनियां ने कहा कि अशोक गहलोत अपनी पीठ थपथपाने के लिए कहते हैं कि एक लाख से अधिक नौकरियां दे दी, 90 हजार की प्रक्रिया चल रही है, जबकि हकीकत है कि सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनॉमी(सीएमआईआई) की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में 20 लाख से अधिक बेरोजगार युवा ग्रेजुएट हैं और कुल 65 लाख युवा बेरोजगार हैं। 27 प्रतिशत से अधिक बेरोजगारी दर के साथ राजस्थान में देश में सबसे अधिक बेरोजगारी है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार की कमजोर शासन व्यवस्था के कारण बार-बार युवाओं के सपनों पर कुठाराघात हो रहा है, रीट से पहले कॉन्स्टेबल, लाइब्रेरियन, जेइएन आदि परीक्षाओं के भी पेपर लीक हुए थे।

उन्होंने कहा कि यह भी रोचक है कि राजीव गांधी स्टडी सर्किल से जुड़े शिक्षकों को ही अशोक गहलोत ने कई बार माध्यमिक शिक्षा बोर्ड का अध्यक्ष बनाया एवं सरकार में विभिन्न पदों पर जिम्मेदारियां दी और इसी सर्किल से जुड़े हुए कई लोगों को रीट परीक्षा आयोजित करवाने की जिम्मेदारी दी गई, जो एक बड़े घोटाले की तरफ इशारा है, राज्य सरकार इस मामले की सीबीआई जांच सौंपेगी तभी हकीकत सामने आ पायेगी।

उन्होंने कहा कि रीट घोटाले से यह प्रमाणित हो रहा है कि प्रदेश में नकल गिरोह कांग्रेस सरकार के संरक्षण में व्यवस्था को खुली चुनौती दे रहा है, जिसमें सरकार के जिम्मेदार लोग भी शामिल हैं। शिक्षा संकुल में स्थित परीक्षा संग्रहण केन्द्र तक नकल माफियाओं का पहुँचना, पेपर लीक करना, पैसे लेकर पेपर बेचना, क्या यह सब सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार में बैठे जिम्मेदार लोगों के बिना संभव है? यह भी पता लगाना जरूरी है कि पेपर कितने लोगों तक पहुँचा और कांग्रेस सरकार के किन बड़े लोगों के कहने पर पेपर लीक हुआ?

उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष दो अक्टूबर को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व तत्कालीन शिक्षा मंत्री गोविंन्द सिंह डोटासरा और पांच अक्टूबर को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा था कि पेपर आउट नहीं हुआ, पेपर आउट की बात कहकर विपक्ष छात्रों को भ्रमित कर रहा है।

कांग्रेस के मुखिया और सरकार के मुखिया दोनों इस बात को मानने को तैयार नहीं थे कि रीट का पेपर लीक नहीं हुआ और 36 अभियुक्तों की गिरफ्तारी के बाद भी मुख्यमंत्री पेपर लीक की बात को स्वीकार नहीं कर रहे हैं, जो इस पूरे षडयंत्र में सरकार के प्रमुख लोगों के शामिल होने से इनकार नहीं किया जा सकता।