पाकिस्तान पर प्रतिबंध लगाने की मांग को लेकर 22 अमरीकी सांसदों का विधेयक

वाशिंगटन/इस्लामाबाद। अमरीकी सीनेट के 22 सीनेटरों ने एक विधेयक पेश किया है जो काबुल के पतन से पहले और बाद में और पंजशीर घाटी में तालिबान के हमले में अफगानिस्तान में पाकिस्तान की भूमिका का आकलन करने और उस पर प्रतिबंध लगाने की मांग करती है।

सीनेटर जिम रिस्क, सीनेट की विदेश संबंध समिति के रैंकिंग सदस्य, और अन्य रिपब्लिकन ने सोमवार को सीनेट में अफगानिस्तान काउंटरटेरिज्म, ओवरसाइट, और जवाबदेही अधिनियम पेश किया, ताकि बिडेन प्रशासन की ‘अफगानिस्तान से जल्दी और विनाशकारी वापसी’ से संबंधित बकाया मुद्दों को हल किया जा सके।

प्रस्तावित कानून कहता है कि विदेश सचिव, रक्षा सचिव और राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के परामर्श से, उपयुक्त कांग्रेस समितियों को तालिबान को सहायता प्रदान करने वाली संस्थाओं पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे जिसमें विभिन्न पक्षों के समर्थन का मूल्यांकन- 2001 और 2020 के बीच तालिबान के लिए पाकिस्तान सरकार सहित उपलब्ध कराए गए आश्रय स्थल, वित्तीय सहायता, खुफिया सहायता, रसद और चिकित्सा सहायता, प्रशिक्षण, उपकरण, और सामरिक, परिचालन या रणनीतिक दिशा के प्रावधान सहित मामलों का उल्लेख होगा।

यह तालिबान के 2021 हमले के लिए पाकिस्तान सरकार सहित सरकारी और गैर-सरकारी कर्ताओं द्वारा समर्थन का आकलन करने की भी मांग करता है, जिसने अफगानिस्तान के इस्लामी गणराज्य की सरकार को गिरा दिया था। सितंबर 2021 के लिए पाकिस्तान ने पंजशीर घाटी और अफगान प्रतिरोध के खिलाफ तालिबान के हमले को अंजाम दिया।

इस विधेयक से तिलमिलाए पाकिस्तान ने इस बिल पर अपना एतराज जताया है। पाकिस्‍तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन मजारी ने कहा है कि पाकिस्‍तान को एक बार फ‍िर आतंक के खिलाफ युद्ध में पाकिस्‍तान का साथ देने की कीमत चुकानी होगी। उन्‍होंने इसको लेकर कई ट्वीट किए हैं। उन्‍होंने अपने ट्वीट में लिखा है कि 20 सालों तक अमरीका और नाटो सैन्‍य समूहों के साथ पाकिस्‍तान अफगानिस्‍तान में मौजूद रहा।

पाकिस्‍तान, अफगानिस्‍तान में तब तक मौजूद रहा जब तक कि वहां स्‍थायी सरकार नहीं गठित हो गई। उन्‍होंने कहा कि अमरीकी सेना के जाने के बाद पाक ने उसे अराजकता से मुक्‍त कराया। अब पाकिस्‍तान को बलि का बकरा बनाया जा रहा है।