आईपीएल में सर्वाधिक रन बनाने वाले विकेटकीपर बने ऋषभ पंत

Rishabh Pant Becomes Highest Run Scorer in IPL 11, Earns Orange Cap

कोलकाता। इंडियन प्रीमियर लीग के 11वें संस्करण में दिल्ली डेयरडेविल्स की टीम ने भले ही बेहद निराशाजनक प्रदर्शन किया हो लेकिन उसके युवा खिलाड़ी ऋषभ पंत टूर्नामेंट में सर्वाधिक रन बनाने वाले पहले विकेटकीपर बल्लेबाज़ बन गए हैं।

ऋषभ ने आईपीएल-2018 में 684 रन बनाए जो लीग के किसी एक संस्करण में विकेटकीपर बल्लेबाज़ का सर्वाधिक स्कोर है। रॉबिन उथप्पा ने इससे पहले वर्ष 2014 के संस्करण में 660 रन बनाए थे लेकिन रिषभ ने इस संस्करण में अपने प्रदर्शन की बदौलत उथप्पा को पीछे छोड़ दिया है।

ऋषभ साथ ही 2018 संस्करण में पहले बल्लेबाज़ भी हैं जिन्होंने चौके छक्कों सहित 100 बाउंड्री लगाई हैं। दिल्ली के विकेटकीपर बल्लेबाज़ ने मौजूदा संस्करण में 37 छक्के लगाए हैं जो आईपीएल के किसी भी संस्करण में दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। उनसे पहले केवल रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरू के कप्तान विराट कोहली ने एक संस्करण में सवर्ज्ञधिक 38 छक्के बनाने का रिकार्ड बनाया है।

इसके अलावा आईपीएल-2018 में ऋषभ आठ बार सर्वाधिक रन बनाने वाले बल्लेबाज़ों की सूची में शीर्ष स्कोरर भी रहे। उनके बाद एबी डीविलियर्स और लोकेश राहुल को संयुक्त सात सात बार यह मौका मिला।

दिल्ली के विजय शंकर टूर्नामेंट में लगातार पांच बार अपनी पारियों में नाबाद रहे जो किसी भी संस्करण में संयुक्त यह सबसे अधिक आंकड़ा है। उनके साथ यह उपलब्धि चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के नाम है।

मुुंबई इंडियन्स के साथ पारियों में छह विकेट स्पिनरों ने निकाले जिसमें अमित मिश्रा और संदीप लामिछाने ने तीन तीन विकेट लिये। मौजूदा संस्करण में केवल एक ही ऐसा मौका आया जब स्पिनरों को मैच में सर्वाधिक मिले हैं। इसके अलावा कोलकाता नाइटराइडर्स के स्पिनरों ने कोलकाता में दिल्ली डेयरडेविल्स के खिलाफ अपने 16 अप्रैल को खेले गये मैच में सर्वाधिक सात विकेट लिए थे।

आईपीएल मेेंं इस वर्ष दिल्ली भले ही सबसे खराब प्रदर्शन के बाद प्लेऑफ से बाहर रही लेकिन उसने सर्वाधिक 11 बार मुंबई इंडियन्स को हराने की उपलब्धि हासिल की जो संयुक्त किसी टीम का किसी विपक्षी टीम के खिलाफ बेहतर रिकार्ड है। चेन्नई ने भी टूर्नामेंट में मुंबई को 11 बार हराया है।

अपने आखिरी पड़ाव पर पहुंच गये आईपीएल-11 में ग्रुप चरण के मैचों के दौरान दस बार टीमों के कप्तानों ने टाॅस जीतने के बाद पहले बल्लेबाजी का फैसला किया जिसमें उन्हें 50 फीसदी सफलता मिली और वे पांच बार हारे और पांच बार जीते।