दुनिया में शांति व सदभाव का प्रेरणा स्त्रोत है भारत : मोहन भागवत

सिरसा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ संचालक मोहन भागवत ने बुधवार को कहा कि दुनिया ढूंढ रही है कि संतोष व शांति एक साथ कहां मिलेगी और समूचे विश्व का ध्यान भारत की ओर टिका है कि वह उनका मार्गदर्शन करे।

भागवत यहां अनाज मंडी में नामधारी संप्रदाय की ओर से आयोजित राष्ट्र स्तरीय ‘हिन्दू सिक्ख एकता सम्मेलन‘ में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। सम्मेलन की अध्यक्षता नामधारी संप्रदाय के सतगुरू ठाकुर दलीप सिंह ने की। सम्मेलन में मशहूर सूफी गायक हंसराज हंस ने कई कव्वाली की प्रस्तुति भी दी।

डॉ मोहन भागवत ने कहा कि उन्हें विश्व के कई देशों में जाने का मौका मिला है, सब देशों में दु:ख है तनाव है, यह सब भारत में भी है मगर भारत में पुरातन समय का जीवन होने के कारण यहां शांति व समाधान एक साथ मौजूद हैं। उन्होंने यह भी कहा कि देश दुनिया में विद्यमान धर्म उपदेशक भारत से निकले हैं।

उन्होंने कहा कि दुनिया में विज्ञान की प्रगति हुई है मगर इससे पर्यावरण खराब हुआ है, मनुष्य का सुख सुविधा के साथ तनाव भी बढ़ा है। उन्होंने कहा कि मानव जीवन में आंतरिक सुख कभी समाप्त नहीं होता, फीका नहीं पड़ता। सुख तो अंत:करण में होता है।

उन्होंने कहा कि भगवान एक है हम सबकी दृष्टि पर निर्भर करता है कि हम उसको किस रूप में देख रहे हैं। सत्य और और प्रेम सबमें है विभिन्नताओं का सम्मान करो हम सब अपनत्व के सूत्र में बंधे हैं।

भागवत ने कहा कि सरबत का भला में ही सबका भला है कहते हुए दशम गुरू पातशाही ने जंग में घायल लोगों को सम्मान दृष्टि से देखकर पानी पिलाने का उदाहरण दिया। उन्होंने उपस्थित संगत से आह्वान किया कि वे ऐसा जीवन जीएं जिससे दूसरे का भी भला हो इसी का नाम धर्म है। हर जीव का अपना स्वभाव है इसलिए धर्म को चौथा स्वभाव भी कहा गया है। उन्होंने कहा कि धर्म कभी तोड़ता नहीं बल्कि जोड़ता है।

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि राम ने धर्म का काम कर दुष्टों को तोड़ा। प्राचीन समय से यही परंपरा चली आ रही है। भागवत ने कहा कि राम को दुनियादारी का कम अनुभव था जिससे उन्हें रावण से उपदेश लेना पड़ता था मगर रावण अपने अहंकार के कारण मारा गया।

इसलिए अहंकारी बनने की बजाय संयम रखना चाहिए। विविधता में एकता विद्यमान है एकता को जानने के लिए जीवन में साधना करो,खुद व्यवस्थित रहो। उन्होंने सम्मेलन में कहा कि हिंदू सिक्ख सब एक हैं। जिसके बाद पंडाल में हिंदू सिक्ख एकता के खूब नोर गूंजे।