शिक्षामंत्री डोटासरा के बयान पर रोष, संघ ने कानूनी भाषा में दी नसीहत

अजमेर। प्रदेश के शिक्षा मंत्री गोविन्द सिंह डोटासरा के राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ को अंग्रेजों का मुखबिर कहे जाने पर राजनीति गर्मा गई है। भाजपा के बाद रविवार को आरएसएस ने खुद इस बयान पर आपत्ति जताते हुए डोटासरा को कानूनी भाषा में नसीहत दी है कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री होने के नाते उन्हें जान लेना चाहिए कि संघ राष्ट्रवादी संगठन है। आजादी से पहले और आजादी के बाद वर्तमान समय तक समाजोत्थान के काम में लगा हुआ है।

संघ के चितौड प्रांत के संघचालक एडवोकेट जगदीश सिंह राणा ने रविवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि संघ निरपेक्ष भाव से समाज में विभिन्न प्रकार के राष्ट्रवादी काम करता है, जबकि कांग्रेस और समान विचारधारा के लोगों को लगता है कि संघ के कारण उनका विचार हार रहा है। वोट बैंक घट रहा है।

कांग्रेस की अगर किसी से राजनीतिक द्वेषता है तो उस राजनीतिक दल का विरोध करें, उसे किसी सामाजिक संगठन से न जोडे, संघ को लांछित करने का मतलब पूरे हिन्दू सूमाज को लांछित करना है। ऐसे में संघ पर लगाए जा रहे लांछन निराधार, झूठे और दुर्भावना से प्रेरित हैं।

संघ के संथापक केशवराव बलिराम हेडगेवार जन्मजात क्रांतिकारी थे, राष्ट्रभक्त थे। पूरे जीवन काल में मैं और मेरा देश भावना के साथ अपना जीवन समर्पित कर दिया। आजादी के समय कांग्रेस ही ऐसा मंच था जिसके नेतृत्व में आजादी की लडाई लडी जा रही थी। तब हेडगेवार भी उसके सक्रिय सदस्य थे। वे भी 9 माह तक जेल में भी रहे।

राणा ने कहा कि मंत्री डोटासरा खुद अधिवक्ता रहे हैं, उन्हें ज्ञान होना चाहिए कि ऐसे गलत बयानी के लिए वे ही उत्तरदायी होंगे। उनके बयानों से लगता है कि उन्हें कभी संघ की जानकारी करने का अवसर नहीं मिला। अल्पज्ञान और सुनी सुनाई बातों के आधार पर वे गलत बोल रहे हैं।

1940 में अंग्रेजों ने आदेश जारी किया था कि कोई राजकीय कर्मचारी संघ की शाखा में भाग नहीं लेगा, इससे साफ है कि संघ अगर मुखबिरी करता था तो अंग्रेजों को उसे लाभांन्वित करते न कि विपरीत तरीके से संघ पर रोक की कोशिश करते।

हेडगेवार ने ही 1920 में नागपुर में कांग्रेस अधिवेशन में पूर्ण स्वतंत्रता का प्रस्ताव रखा था, उस समय प्रस्ताव पास नहीं हुआ। लेकिन 1929 के आंदोलन के बाद उस प्रस्ताव को माना गया।  संघ ने सभी शाखाओं राष्ट्रीय ध्वज का वंदन करने संबंधी परिपत्र जारी किया था।

संघ के पदाधिकारियों ने डोटासरा के बयान को झूठा बताते हुए मांग की कि वे संघ से अपने इस कथन के लिए क्षमा म़ांगे। संघ पदाधिकारियों ने यह भी कहा कि डोटासरा ने झूठे लांछन अज्ञानता में लगाए हैं। यदि भविष्य में उन्होंने इसकी पुनरावृत्ति की तो संघ उनके खिलाफ आंदोलन खड़ा करेगा।

प्रेसवार्ता के दौरान अजमेर के संघ चालक सुनील जैन ने सख्त लहजे में कहा कि संघ पर आरोप लगाना मानसिक दीवा​लियापन को दर्शाता है। संघ की लोकप्रियता से घबराकर अब संघ को गालियां देने का सिलसिला शुरू किया गया है। जो यह कहते हैं कि संघ अंग्रेजों का पिछलग्गू था, उन्हें समझना चाहिए कि संघ पिछलग्गू होता तो अंग्रेजों के जमाने में उस पर प्रतिबंध नहीं लगता।

संघ से जुडे रहे लोगों ने आजादी की लडाई में राम मनोहर लोहिया, दीन दयाल उपाध्याय के साथ पूरे मनोयोग से भागीदारी की, इतना ही नहीं बल्कि आजादी के बाद गोवा की पुर्तगाली सरकार को हटाने के लिए भी संघ आगे आया।

शिक्षा मंत्री का यह कहना कि महाराणा प्रताप महान थे, यह कमेटी तय करेगी,उनके इस वक्तव्य से पता चल जाता है कि देश के लिए प्राण न्योछावर करने वालों के लिए डोटासरा के मन में कितना सम्मान है।

जैन ने कहा कि संघ सकारात्मक भाव से आगे बढ रहा है, उन्होंने विरोधियों को भ्रामक वक्तव्य देने तथा अपने आलाकमान के समक्ष अंक बढाने की प्रवृति से बचने की नसीहत दी।

बातदें कि यह विवाद तब उपजा था जब शिक्षा मंत्री डोटासरा ने 11 जनवरी को अजमेर आगमन पर पत्रकारों के पूछे सवाल पर कहा ​था कि कांग्रेस जब देश को आजाद करा रही थी तब आरएसएस अंग्रेजों के लिए मुखबिरी कर रहा था। उनका यह बयान एक समाचार में सुर्खियां बना। शिक्षा मंत्री के इस बयान से आरएसएस के लोग आहत में हैं।