रूसी सुंदरी मारिया शारापोवा ने टेनिस को कहा अलविदा

Russian beauty Maria Sharapova retired from tennis

रूसी सुंदरी और पांच बार ग्रैंड स्लैम और पूर्व टेनिस विश्व चैंपियन मारिया शारापोवा ने 32 साल की आयु में टेनिस को अलविदा कहकर संयास ले लिया। शारापोवा अपने खेल और अपनी सुंदरता की वजह से विश्व भर में सुर्खियों में बनी रहीं। मारिया का नाम सबसे लंबी महिला टेनिस खिलाड़ियों की लिस्ट नंबर एक पर रहा।

दर्शक उनकी लंबाई के प्रशंसक हमेशा रहेंगे, हालांकि मारिया शारापोवा को टेनिस खेलने के दौरान लंबाई का कभी फायदा हुआ तो कभी नुकसान भी उठाना पडा़। साल 2003 से लेकर 2015 तक शारापोवा ने हर साल एक सिंगल्स टाइटल जीतने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। शारापोवा काे हाल के सालों में लगातार होने वाली चोटों ने उन्हें यह फैसला लेने पर बाध्य किया। यहां हम आपको बता दें कि आखिरी बार ऑस्ट्रेलियन ओपन में उतरी थीं।

17 साल की उम्र में मारिया शारापोवा विंबलडन चैंपियन बनी थी

रूसी सुंदरी मारिया शारापोवा मात्र 17 साल की आयु में विंबलडन चैंपियन बनकर टेनिस विश्व भर में सुर्खियों में छा गई थी। शारापोवा ने वर्ल्ड नंबर-1 सेरेना विलियम्स को मात देकर विंबलडन जीता था। साल 2008 में उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई ओपन का खिताब जीता था। वहीं 2012 और 2014 में फ्रेंच ओपन का खिताब अपने नाम किया था। वह लंबे समय से कंधे की चोट से जूझ रही थीं।

शारापोवा ने हालांकि यह स्पष्ट नहीं किया कि क्या वे इस फैसले पर तत्काल अमल करने जा रही हैं। वह अंतिम बार इस साल ऑस्ट्रेलियन ओपन में खेली थीं, जहां उन्हें पहले राउंड में ही 19वीं सीड सर्बिया की डोना वेकिक से हार का सामना करना पड़ा था। शारापोवा खेल और सुंदरता वजह से दर्शकों में हमेशा याद की जाएंगी

शारापोवा पर ड्रग्स मामले में 15 महीने का लगा था प्रतिबंध

वर्ष 2016 में मारिया शारापोवा पर ड्रग्स लेने के आरोप में 15 महीने का प्रतिबंध लगाया गया था। अप्रैल 2017 में कोर्ट पर वापसी की थी। हालांकि कोर्ट में वापसी जरूर उनकी हुई है लेकिन उसके बाद वह टेनिस में कोई खास मुकाम हासिल नहीं कर सकी थी। सबसे खास बात यह रही कि इस दौरान अपनी चाेटों से भी बहुत परेशान दिखाई दी।

टेनिस से संन्यास लेते समय बहुत भावुक नजर आई रूसी सुंदरी ने कहा, ‘आप उस एकमात्र जीवन को कैसे छोड़ सकते हैं जिसे आप जानते हैं। आप कैसे उन कोर्ट से अलग हो सकते हैं जहां आप जब बच्ची थीं, तब से प्रशिक्षण लेती रही हैं। वह खेल जिसने आपको बेपनाह खुशियां और आंसू दिए। एक ऐसा खेल जिसमें आपको पूरा परिवार मिला, बेपनाह फैंस जो 28 साल के करियर में आपके साथ रहे।

शंभूनाथ गौतम, वरिष्ठ पत्रकार