नारी में संस्कारों के पतन से राष्ट्र का वैभव खो गया : साध्वी ऋतम्भरा

चित्तौड़गढ़। प्रख्यात साध्वी ऋतम्भरा ने देश के वर्तमान हालात पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि हम एक हजार वर्षों की गुलामी में हुए अत्याचारों से भी नहीं टूटे और संस्कृति एवं संस्कारों के प्रति निष्ठावान रहे, लेकिन आजादी के बाद के चंद सालों में ही हुए नारी पतन से राष्ट्र का वैभव खो गया है।

राजस्थान में चित्तौड़गढ़ में आज राष्ट्र चिंतन विषय पर वात्सल्य संस्था की ओर से आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि बच्चों में संस्कार कैसे आएंगे जब उसकी मां उसे पालने के बजाय कहती है कि मेरे कैरियर का सवाल है इसलिए इसे नौकरानी पालेगी और यही बच्चा बड़ा होकर मां-बाप से कहता है कि मां, मै तुम्हें नहीं पाल सकता हूं क्योंकि मेरे कैरियर का सवाल है, इसलिए आपके लिए वृद्धाश्रम है।

उन्होंने कहा कि जब हम गुलाम थे तो सब एक थे, लेकिन अब राष्ट्र के प्रति महिलाओं में वो स्वाभिमान की भावना नहीं रही जो रानी पद्मिनी में थी जिन्होंने राष्ट्र एवं अपने स्वाभिमान के लिए जौहर करके भारत की नारी का परिचय दुनिया को दिया।

साध्वी ऋतम्भरा ने कहा कि अब महिलाएं भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारों का समर्थन करके रातों रात अखबारों की सुर्खिया बनने की लालसा में प्रदर्शन कर रही हैं। अपने सम्पूर्ण उद्बोधन को साध्वी ने महिलाओं में हो रहे संस्कारों के पतन पर केंद्रित करते हुए राष्ट्र के स्वाभिमान के पतन का कारण बताया।

उन्होंने देश में बढ़ती बलात्कारियों की संख्या पर भी बोलते हुए कहा कि नारी ने पाश्चात्य सभ्यता को अपना लिया जिसके चलते उनमें संस्कृति एवं संस्कारों का पतन हो गया जिसका परिणाम बलात्कार है। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाओं पर सरकार को परिवार को सा समाज को कोसने से ये नहीं रुकेगी, बल्कि भोग विलास की अति लिप्सा से दूर रहकर ऐसी घटनाओं को रोका जा सकता है।