जेल से बाहर शिवपाल ने किया आजम का इस्तकबाल, नए समीकरण के संकेत

लखनऊ। हाल ही में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद अपने भतीजे और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव से एक बार फिर दूरी बनाने वाले प्रगतिशील समाजवादी पार्टी अध्यक्ष और सपा विधायक शिवपाल सिंह यादव ने शुक्रवार को सपा के वरिष्ठ नेता मोहम्मद आजम खान की रिहाई के वक्त सीतापुर जेल पहुंच कर उत्तर प्रदेश की राजनीति में नये समीकरणों की ओर इशारा किया है।

शिवपाल शुक्रवार सुबह सवेरे ही आजम को जेल से लेने के लिये सीतापुर जेल पहुंच गए थे और जेल से निकलते ही उन्होंने हाथ मिलाकर सपा के कद्दावर नेता का इस्तकबाल किया और वहां मौजूद प्रेस फोटोग्राफरों की ओर देखकर इस लम्हे को कैमरों में कैद करने का मौन आमंत्रण दिया।

आजम की रिहाई को लेकर पिछले कुछ दिनों से बेहद उत्सुक नजर आ रहे शिवपाल ने गुरूवार को ही सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर इस मामले में अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी थी। उच्चतम न्यायालय में गुरूवार को आजम को अंतरिम जमानत मिलने के बाद उन्होंने ट्वीट कर इसे न्याय की जीत बताया था और ट्वीट किया कि सत्यमेव जयते नानृतं सत्येन पन्था विततो देवयानः। लम्बे अरसे से न्याय की जिस घड़ी की प्रतीक्षा थी वह आज पूर्ण हुई है। आजम खान साहब को सर्वोच्च न्यायालय ने अंतरिम जमानत दे दी है। उन्हें व्यवस्था की घोर प्रताड़ना से न्याय मिला है। भारत की न्याय व्यवस्था उम्मीद की एक किरण है।

शिवपाल ने आज भी जेल के लिए निकलने से पहले ट्वीट कर कहा कि सूबे के आवाम के लिए यह सुखद है कि आजम खान साहब आज उनके चाहने वालों के बीच होंगे…। मैं सीतापुर के लिए निकल चुका हूं, उत्तर प्रदेश के क्षितिज पर नया सूरज निकल रहा है। आइए, आजम खान साहब का इस्तकबाल करें। बाद में उन्होंने आजम से मुलाकात की तस्वीर साझा करते हुए संक्षिप्त ट्वीट किया स्वागत एवं शुभकामनाएं।

गौरतलब है कि पिछली 22 अप्रैल को शिवपाल ने सीतापुर जेल जाकर आजम से मुलाकात की थी। करीब सवा घंटे की मुलाकात के बाद शिवपाल ने पत्रकारों से बातचीत में आरोप लगाया था कि सपा ने आजम को उनके भाग्य भरोसे छोड़ दिया है और सपा की ओर से आजम की रिहाई के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा था कि नेता जी यानी मुलायम सिंह यादव की अगुवाई में लोकसभा में आजम का मामला उठना चाहिए था मगर ऐसा नहीं हुआ। लोकसभा और राज्यसभा में सपा के कई सदस्य हैं। अगर सुनवाई न होती तो धरने पर बैठ जाते। प्रधानमंत्री नेता जी की बात जरूर सुनते क्योंकि वह नेता जी का सम्मान बहुत करते हैं।

एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा था कि मैं आजम खान के साथ हूं और उचित समय आने पर इस बारे में निर्णय लिया जाएगा। अभी कहना जल्दबाजी है। इसी साल संपन्न यूपी विधानसभा चुनाव में शिवपाल जसवंतनगर विधानसभा क्षेत्र से सपा के टिकट पर मैदान पर उतरे थे और जीत हासिल की थी।

हालांकि चुनाव में सपा गठबंधन को शिकस्त मिलने के बाद चाचा (शिवपाल) और भतीजे (अखिलेश) के बीच मनमुटाव एक बार फिर जगजाहिर हो गया था। दोनो के बीच एक दूसरे के खिलाफ हुई बयानबाजी ने इसे हवा दी थी। अखिलेश ने बीते दिनों कहा थ कि अगर हमारे चाचा को भाजपा लेना चाहती है तो देर क्यों कर रही है। एक सवाल के जवाब में उन्होने कहा था कि मुझे चाचा जी से कोई नाराजगी नहीं है लेकिन बीजेपी बता सकती है कि वे क्यों खुश हैं।

शिवपाल ने इस बयान को गैर जिम्मेदाराना बताते हुए कहा था कि मैं हाल के विधानसभा चुनाव में जीते सपा के 111 विधायकों में से एक हूं, अगर वह मुझे बीजेपी में भेजना चाहते हैं तो मुझे पार्टी से निकाल दें। शिवपाल का कहना है कि अगर सपा अध्यक्ष सबको साथ लेकर चलते तो 2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को आसानी से सत्ता से हटाया जा सकता था। सपा में उन्हें अपमान के सिवाय कुछ नहीं मिला।