इस देश में कला आस्था का विषय है : अश्विन एम दलवी

अजमेर। टीवी हो या सिनेमा हर जगह कलाकार की ही मुख्य भूमिका होती है, चित्र और कलाकृतियों की रचना कलाकार के बिना संभव नहीं। कला और कलाकार का संबंध मछली और पानी की तरह है जो एक दूसरे के पूरक हैं। इनमें बिछोह हो जाएगा तो न कला बचेगी न कलाकार। ये बात राजस्थान ललित कला अकादमी जयपुर के अध्यक्ष अश्विन एम दलवी ने मंगलवार को संस्कार भारती की अजमेर ईकाई की ओर से सावित्री गर्ल्स स्कूल में चल रहे ग्रीष्मकालीन कला एवं प्रशिक्षण शिविर के दौरान कही।

दलवी ने कहा कि हमारी सांस्कृतिक और कलात्मक धरोहर अजर अमर है, ये न कभी मिटी है ना कभी मिटेगी। भारत देश ने अनेक आक्रमण झेले, पराधीनता का दंश भी भोगा लेकिन यहां के कलाकार और कला जीवंत रूप लिए हमेशा अस्तित्व में रही। देव स्थाओं, आस्था स्थलों पर विद्यमान चित्रकारी, और कलाकृतियां इस बात का प्रमाण है कि कला यहां आस्था का विषय रही है न कि मनोरंजन का।

उन्होंने कहा कि कलाकार एकमात्र ऐसा माध्यम है जो अपने हुनर की बदौलत समाज को दिशा दे सकता है। टीवी, सिनेमा में काम कर रहा कलाकार चाहे तो सकारात्मक प्रभाव फैला सकता है। कलाकारों की जिम्मेदारी बढी है। वह समाज को दिशा देता है, उसके आचार व्यवहार और प्रकटीकरण से दर्शकों और देखने वालों को राह मिलती है।

इस अवसर पर वरिष्ठ चित्रकार राम जैसवाल ने कहा कि कलाकार का अपना भी घर परिवार होता है लेकिन जब वह साथी कलाकारों के बीच होता है तो अपने घर परिवार को भूल जाता है। कला और कलाकारों बीच ही कलाकार को सुकून मिलता है। कला अभिव्यक्ति का महज केन्द्र नहीं बल्कि उसका बीज है, यह बीज पैदा होने के साथ हर मनुष्य के भीतर होता है, बस इसे अंकुरित करने के लिए उचित वातावरण की जरूरत होती है।

वर्तमान समय में अभिभावक अपने बच्चों के भीतर के कला रूपी बीज को अंकुरित होने का अवसर मुहैया कराएं तो हर घर में कलाकार हो जाएंगे। संस्कार भारती जैसी संस्थाएं इस काम में अनवरत जुटी हुई हैंं। जो साधुवाद की पात्र है।

अकादमी के सचिव सुरेन्द्र सोनी ने कहा कि सपनों को साकार रूप देने वाले को कलाकार कहना गलत न होगा। भीतर उठने वाली भावनाएं और कल्पनाएं जब साकार रूप लेती हैं तो उससे कला का जन्म होता है। अभिव्यक्ति का मूल सिद्धांत भावना से जुडा होता है, ये भावनाएं चित्रकारी, लेखन, संगीत, अदाकारी जैसे तरीकों से बखूबी पोषण पाती हैं और कला के जरिए समाज की सेवा का माध्यम बनती हैं।

आगंतुक अथितियों ने शिविर के दौरान प्रशिक्षु कलाकारों द्वारा तैयार की गई पेंटिंग्स और कृतियों का अवलोकन किया और कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।। रंगोली, चित्रकला के कलाकरों को प्रमाणपत्र भी प्रदान किए गए। अल्पअवधि में ही संख्यात्मक और गुणात्मक चित्र बना पाने में प्रवीण हुए सभी कलाकारों को तथा उन्हें प्रशिक्षण देने वाले शिक्षकों को अतिथियों ने साधुवाद दिया।

संस्कार भारती राजस्थान के क्षेत्र प्रमुख सुरेश बबलानी ने शिविर का परिचय कराया। अजमेर ईकाई के अध्यक्ष डॉ तिलक राज ने आगंतुक अतिथियों को स्वागत किया। इस मौके पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ चितौड प्रांत के संघ चालक एडवोकेट जगदीश राणा, कृष्ण गोपाल पाराशर, संजय सेठी, रेखा शर्मा, अभिनव कमल रैना, डॉ चिमनलाल रैना, सचिन पाटलकर, डॉ अर्चना, उमेश जोशी, सुंदर मटाई, महेन्द्र सिंह चौहान, नंदलाल शर्मा, संदीप लेले, योगबाला वैष्णव समेतबडी संख्या में गणमानयजन मौजूद रहे।

इससे पहले भारत माता के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत हुई। संस्कार भारती के गीत का सभी ने सामूहिक रूप से गायन किया।