‘सर्वना भवन’ के संस्थापक एवं उम्र कैद के सजायाफ्ता पी राजगोपाल की मौत

चेन्नई। दक्षिण भारतीय व्यंजनों के रेस्तरां ‘सर्वना भवन’ के संस्थापक एवं हत्या के एक मामले में उम्र कैद के सजायाफ्ता पी राजगोपाल का दिल का दौरा पड़ने से चेन्नई के एक अस्पताल में गुरुवार को निधन हो गया।

राजगोपाल ने हत्या के जुर्म में उम्र कैद की सजा काटने के लिए कुछ दिन पहले ही आत्मसमर्पण किया था। राजगोपाल की तबीयत बिगड़ने पर उसे निजी अस्पताल में भर्ती कराए जाने की मद्रास उच्च न्यायालय की ओर से इजाजत मिलने के दो दिन बाद ही उसकी मौत हो गई।

राजगोपाल ने नौ जुलाई को अपर सत्र न्यायालय में आत्मसमर्पण किया था। बीमार पड़ने के बाद उसे सरकारी स्टेनली मेडिकल कॉलेज के कैदी वार्ड में भर्ती कराया गया था।

राजगोपाल की स्थिति बिगड़ने के बाद उसके पुत्र आर सर्वानन ने बंदी प्रत्यक्षीकाण याचिका दायर करके अपने पिता को किसी निजी अस्पताल में भर्ती कराने का अनुरोध किया था। मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति एम एम सुंदरेश और एम निर्मल कुमार की युगलपीठ ने 16 जुलाई को राजगोपाल को निजी अस्पताल में भर्ती कराने की मंजूरी दे दी।

गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय की ओर से राजगोपाल को और समय देने से इंकार करने के बाद उन्होंने नौ जुलाई को आत्मसमर्पण किया था। उसे एंबुलेंस की मदद से अदालत पहुंचाया गया था तथा व्हील चेयर से अदालत कक्ष तक ले जाया गया था।

राजगोपाल को अक्टूबर, 2001 में एक कर्मचारी की हत्या के मामले में सजा सुनाई गई थी। राजगोपाल अपने एक कर्मचारी सांताकुमार की हत्या करके उसकी पत्नी जीवाज्योति से शादी करना चाहता था।

इससे पहले उच्चतम न्यायालय की एक पीठ ने इसी वर्ष 29 मार्च राजगोपाल सहित नौ दोषियों की अपील को खारिज करते हुए उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाने के मद्रास उच्च न्यायालय के फैसले को बरकरार रखा था।

उच्च न्यायालय ने वर्ष 2009 में इस हत्याकांड में राजगोपाल और आठ अन्य की 10-10 साल की कैद की सजा को बढ़ाकर उम्र कैद में तब्दील कर दिया था।