सत्गुरू स्वामी टेऊंराम महाराज के जन्मोत्सव पर भक्त प्रवचनों से हो रहे निहाल

अजमेर। सत्गुरू स्वामी टेऊंराम महाराज के पांच दिवसीय जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में चौथे दिन भी वैशाली नगर स्थित प्रेम प्रकाश आश्रम में धार्मिक आयोजनों का सिलसिला जारी रहा। सुबह सामूहिक ध्यान स्वामी ब्रह्मानन्द शास्त्री के नेतृत्व में किया गया जिसमें आश्रम के श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

स्वामी ब्रह्मानन्द ने ध्यान करने के बारे में साधकों को जानकारी देते हुए बताया कि किस तरह ध्यान से जीवन में परिवर्तन आता है। ध्यान से मानसिक दुविधा से छुटकारा मिलता है।

आश्रम के संत ओम प्रकाश ने बताया कि मंगलवार को भी संत महात्माओं के सत्संग हुए जिसमें संत माणिकलाल, संत राजूराम, संत हरीश, स्वामी मनोहरलाल ने प्रवचन के जरिए भक्तों को निहाल किया। प्रेम प्रकाश मण्डलाध्यक्ष स्वामी भगतप्रकाश महाराज ने कहा कि मानव मात्र को जीवन में संयम धारण कर अपने पथ पर आगे बढ़ते जाना है। हमें ईश्वर के अस्तित्व में पूर्ण विश्वास होना चाहिए। भक्ति कभी भी दिखावे, कीमती पदार्थ चढ़ाने आदि जैसी नहीं होनी चाहिए। भगवान को दिखावा व कीमती पदार्थ नहीं चाहिए।

भगवान तो अगाध श्रद्धा, विश्वास के साथ स्मरण करने से ही वे प्रसन्न हो जाते हैं। भगवान की भक्ति शुद्ध, सरल एवं शुभ भावना से करनी चाहिए। इस सारी प्रक्रिया में मन रूकावट डालता है वह दौड़ता ही रहता है। हमारे अन्दर कई तरह की शारीरिक व मानसिक व्याधियां हैं। जिन्हें सद्गुरू की शरण में जाएं बिना ठीक नहीं किया जा सकता। सत्संग के बाद ब्रह्मभोज का आयोजन किया गया। जिसमें अजमेर शहर के सैकड़ों ब्राह्मण उपस्थित थे।

शाम को सत्संग सभा में विभिन्न सांस्कृतिक आयोजन हुए। अमरापुर के मिली सजायो जैसे कई भजनों को बालक बालिकाओं ने मंच पर प्रस्तुत कर सबका मन मोह लिया। सद्गुरू स्वामी टेऊंराम महाराज की जीवनी पर आधारित लघु नाटिका प्रस्तुत की गई। दिल्ली की प्रसिद्ध मनोज-रिया एण्ड पार्टी ने कृष्ण लीला का मंचन किया। शाम संत ओम प्रकाश का सत्संग हुआ।

स्वामी ब्रह्मानन्द शास्त्री ने अपने प्रवचन में कर्मों के प्रतिफल के बारे में बताते हुए कहा कि हमें अपने किए कर्मां का फल अवश्य मिलता है। अच्छे कर्म का फल अच्छा एवं बुरे कर्म का फल बुरा मिलेगा। इस जन्म में नहीं तो अगले जन्म में मिलेगा।

कई लोग ऐसा कहते हैं कि उनकों दान, पुण्य, व्रत, नियम का पालन करते एवं भक्ति करते काफी समय हो गया परन्तु जीवन में से कठिनाईयां नहीं जा रही है। इसका कारण यही है कि उसके मार्ग में कठिनाईयों रूपी कचरा बहुत है। जिससे कि उसको इस भक्ति रूपी मार्ग पर अपने गन्तव्य स्थान पर पहुंचने में वक्त लगेगा।

जिस प्रकार ट्रेफिक वाले रास्ते पर चलने से हमे रास्ता पार करने में समय लगता है लेकिन चलते रहने से अंततः हम रास्ता पार कर ही लेते हैं। वैसे ही हमें अपने भक्ति मार्ग पर शुभ कर्म करते हुए चलते जाना है। उसका शुभ फल हमें अवश्य मिलेगा।

प्रेम प्रकाश आश्रम के महामण्डलेश्वर स्वामी भगत प्रकाश ने अपनी अमृतमय वाणी में बताया कि हमें स्वामी टेऊंराम महाराज के जीवन से प्रेरणा लेकर अपने जीवन को बदलना है। हमें उनके बनाएं स्थान पर पूर्ण सच्ची भावना से सेवा, स्मरण, सत्संग करके अपने मानव जीवन को सफल बनाना है।

जन्मोत्सव के अन्तिम दिन के कार्यक्रमों के बारे में जानकारी देते हुए आश्रम के संत ओम प्रकाश ने बताया कि बुधवार सुबह 6 बजे श्री गुरू महाराज की मूर्तियों की पूजा व 132 भोग लगाए जाएंगे। सात बजे 132 दीपों द्वारा महाआरती, 7:30 से 9 बजे तक हवन होगा। इसके बाद ध्वजावन्दन तथा 10:30 बजे प्रेम प्रकाश आश्रम मार्ग का लोकार्पण समारोह होगा।

प्रेम प्रकाश मार्ग का लोकार्पण प्रेम प्रकाश मण्डलाचार्य सद्गुरू स्वामी भगत प्रकाश महाराज के कर कमलों द्वारा होगा। समारोह की अध्यक्षता स्वामी ब्रह्मानन्द शास्त्री करेंगे। इनके अलावा शिक्षा व पंचायती राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी, मेयर धर्मेन्द्र गहलोत, राजस्थान सिन्धी अकादमी के अध्यक्ष हरीश राजानी, पार्षद दीपेन्द्र लालवानी, पार्षद वीरेन्द्र वालिया आदि कई गणमान्य भी उपस्थित रहेंगे। इसके बाद सत्संग व श्री प्रेम प्रकाश ग्रन्थ का भोग एवं आम भण्डारा होगा। शाम 4:30 से 9 बजे तक संत महात्माओं का सत्संग एवं पल्लव पाकर उत्सव की समाप्ति होगी।