शिव के प्रिय मास श्रावण में राम नगरी में झूला महोत्सव का आगाज

अयोध्या। आदि देव शिव के प्रिय मास श्रावण के मौके पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की नगरी अयोध्या में प्रसिद्ध सावन झूला महोत्सव रविवार से शुरू हो गया।

जिलाधिकारी नितीश कुमार ने बताया कि मणिपर्वत से शुरू हो रहे सावन झूला मेला श्रावण पूर्णिमा रक्षाबंधन तक चलेगा। 12 दिनों तक चलने वाला सावन झूला मेले का मुख्य केन्द्र मणिपर्वत रहता है। इस दौरान रामजन्मभूमि, कनक भवन समेत रामनगरी के दो हजार से अधिक मंदिरों से भगवान श्रीराम निकल कर मणिपर्वत झूला झूलने आते हैं। मणिपर्वत मेेले में लाखों श्रद्धालुओं के आने की संभावना है। इसको लेकर प्रशासनिक अधिकारियों से भीड़ नियंत्रण व सुरक्षा का प्लान तैयार किया गया है।

सावन झूला मेला में श्रद्धालु रिमझिम फुहारों में भी भव्य राम रस का रसास्वादन करते हैं और रात-रात भर मंदिरों में घूम-घूमकर विग्रहों को झुलाते हैं। इस समय छटा देखते ही बनती है। सावन में गाये जाने वाली कजरी गीतों का भी चारों ओर गूंज सुनाई देती है मणिपर्वत के मेले के दिन सीताराम झांकी को लेकर रामधुन गाते हुए श्रद्धालु मणिपर्वत पहुंचते हैं जहां वृक्षों में झूले डालकर भगवान के विग्रहों को झुलाया जाता है।

पूरे सावन में मंदिरों में दोनों समय भगवान विग्रहों को झुलाने की परम्परा है। मणिपर्वत पर पडऩे वाले झूलों में विग्रहों के अलावा छोटे-छोटे बच्चों को राम-सीता के रूप में सजाकर झुलाया जाता है। सखी सम्प्रदाय के लोग मनमोहक पोशाक पहनकर सोलह श्रृंगार करते हैं। इसी प्रकार 12 दिन तक चलने के बाद पूर्णिमा अर्थात् रक्षाबंधन के दिन मेला समाप्त हो जाता है। इस मेले में दूरदराज से श्रद्धालु आते हैं और मेले का आनंद उठाते हैं।

डीएम ने बताया कि मणिपर्वत मेले में लाखों श्रद्धालु आते हैं ऐसे में टीले पर विराजमान भगवान सीताराम के दर्शन समूह में करना खतरा भरा होता है। इसके मद्देनजर जिला प्रशासन द्वारा मणिपर्वत तक काफी हद तक मरम्मत कराई जा चुकी है। खतरे जैसी कोई स्थिति नहीं है। मेला क्षेत्र को सात जोन में बांट कर सुरक्षा के लिए मजिस्ट्रेटों की तैनाती कर दी गई है तथा बैरियर को भी चिन्हित स्थानों पर लगा दिया गया है। सुरक्षा के लिए पर्याप्त पुलिस बल की भी तैनाती की गई है।

कुमार बताया कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था देना हमारी प्रतिबद्धता है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा एवं सुविधा तथा भीड़ नियंत्रण के लिए प्रवेश से लेकर निकासी मार्ग तक पांच बैरियर लगाए जा रहे हैं। भीड़ बढऩे की स्थिति में बैरियर की संख्या बढ़ाई जा सकती है। मणिपर्वत पर जत्थे में श्रद्धालुओं को भेजा जाएगा तथा उनके उतरने के बाद दूसरा जत्था जाएगा।

उन्होंने बताया कि इस बार में 15 से 20 श्रद्धालु को भेजा जाएगा। श्रद्धालु मणिपर्वत के प्रवेश मार्ग से टीले पर जाएंगे, फिर दर्शन-पूजन के बाद टीले के पीछे के रास्ते से मनमुनि कुंड होते हुए वापस मुख्य मार्ग पर आएंगे। अयोध्या में प्रारम्भिक सावन मेला होता है जो मणिपर्वत पर भगवान के प्रमुख विग्रहों पर अपने-अपने मंदिर से लेकर श्रद्धालु आते हैं और झूलनोत्सव में श्रद्धालु लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। उन्होंने बताया कि अति संवेदनशील और संवेदनशील स्थानों पर मजिस्ट्रेटों की तैनाती करके पुलिस बलों की तैनाती की गई है।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रशांत वर्मा ने बताया कि श्रावण झूला मेला का शांति व सुरक्षित तरीके से सम्पन्न कराने के लिए मेले को छह जोन, छब्बीस सेक्टर में विभाजित करके 67 सब सेक्टर प्रत्येक जोन में बनाया गया है जिसमें प्रत्येक सेक्टर में पुलिस उपाधीक्षक स्तर के अधिकारी, सब इंस्पेक्टर, उपनिरीक्षक की तैनाती रहेगी।

मेला क्षेत्र में छह अपर पुलिस अधीक्षक, 25 पुलिस उपाधीक्षक, 40 निरीक्षक, 200 उपनिरीक्षक, 100 कांस्टेबिल, 150 पचास कांस्टेबिल, 15 महिला उपनिरीक्षक, 15 महिला हेड कांस्टेबिल, 50 हेड कांस्टेबिल, नौ कम्पनी पीएससी, एक कम्पनी सीआरएफ सहित एक टीम एटीएस कमांडो की लगाई गई है।

उन्होंने बताया कि सरयू घाट पर जल बैरीकेडिंग व जल पुलिस, फ्लैट पीएससी कम्पनी व एसटीआरएफ की टीम द्वारा लगातार गश्त व निगरानी की जा रही है। 42 जवान व दो नाव इंजन चलित एसटीआरएफ की 16 जवान या तीन जवान इंजन चलित पीएससी की 29 जवान व चार नाव इंजन चलित पुलिस की, 53 प्राइवेट गोताखोर व 53 नाव चलित लगाई गई है। यह 24 घंटे शिफ्ट वाइज गश्त करके लोगों को लगातार जागरूक करते हुए सुरक्षित किया जा रहा है ताकि श्रद्धालुओं को डूबने से बचाया जा सके।

वर्मा ने बताया कि इसके अतिरिक्त यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए और मेले के दौरान कांवडिय़ों और श्रद्धालुओं की संख्या ज्यादा बढऩे से यातायात व पार्किंग की भी व्यवस्था सुचारू रूप से की गई है। उन्होंने बताया कि सत्रह पार्किंग स्थल बनाए गए हैं और मेला क्षेत्र में 46 स्थानों पर बैरियर लगाकर चेकिंग की जा रही है। जहां जरूरत पड़ी तो रूट डायवर्जन भी किया गया है। यातायात व्यवस्थापन में 20 उपनिरीक्षक यातायात, 30 हेड कांस्टेबिल यातायात, 80 कांस्टेबिल यातायात लगाए गए हैं। उन्होंने बताया कि इसके अतिरिक्त मेला को सकुशल सम्पन्न कराने हेतु सीसीटीवी ड्रोन कैमरे से भी निगरानी की जा रही है।